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देश में कच्चे तेल का उत्पादन 20 साल के निचले स्तर पर

by GoNews Desk 5 days ago Views 974

crude oil

देश को आत्मनिर्भरता की तरफ ले जाने की तमाम कोशिशों में मोदी सरकार की बेइमानी झलकती है।मसलन कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने और तेल के आयात को कम करने की सरकार की कोशिशों के बावजूद कच्चे तेल का उत्पादन 2020-21 में गिरकर 30.5 मिलियन टन रह गया है जो कम से कम अपने 20 साल के निचले स्तर पर है। 

ग़ौरतलब है कि इससे पहले साल 2019-20 के दौरान देश में कच्चे तेल का उत्पादन 32.17 मिलियन टन रहा था जिसमें अब 5 फीसदी की कमी देखी गई है।

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने अप्रैल महीने में यह जानकारी दी थी। अगर नए कच्चे तेल के उत्पादन की तुलना साल 2011-12 के आंकड़ों से करें तो पता चलता है कि मौजूदा गिरावट 22 फीसदी है।

मसलन साल 2011-12 के दौरान देश में कच्चे तेल का उत्पादन 38.09 मिलियन टन रहा था। इसका उत्पादन साल 2015-16 में गिरकर 36.9 मिलियन टन हो गया था। यह वही साल था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कच्चे तेल के इंपोर्ट पर साल 2022 तक निर्भरता को दस फीसदी तक कम करने का लक्ष्य रखा था।

कोच्चि इंटिग्रेटेड रिफाइनरी एक्सपैंशन कॉम्पलेक्स का उद्घाटन करने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था,  'कच्चे तेल के आयात में कटौती करने के लिए, सरकार ने आयात को 10 फीसदी तक कम करने और कीमती विदेशी मुद्रा बचाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं।' अगर आंकड़े देखें तो साल 2014-15 के दौरान देश का तेल इंपोर्ट पर निर्भरता 78.6 फीसदी रहा था जो जानकार बताते हैं कि अब 85 फीसदी हो गया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ महामारी में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट की वजह से ईंधन की मांग में भी गिरावट देखी गई। यही वजह रही कि भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के रिफाइनरी ने 2020-21 के दौरान कुल मांग 221.7 मिलयन टन का 13 फीसदी कम उत्पादन किया। 

गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की दोनों रिफाइनरियों ने 11.5 फीसदी कम यानि 60.94 मिलियन टन कच्चे तेल का ही उत्पादन किया।

इनके अलावा  रोसनेफ्ट की अगुवाई वाली नायरा एनर्जी ने अपने कुल उत्पादन का 13 फीसदी कम यानि 17 मिलियन टन तेल का उत्पादन किया। 

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के रिफाइनरी में लगभग 12 फीसदी कम यानि अपने कुल उत्पादन में 127.5 मिलियन टन तेल का ही उत्पादन कर सका। आंकड़ों से पता चलता है कि रिफाइनरियों ने 2020-21 में 233.4 मिलियन टन पर 11.2 फीसदी कम पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन किया। 

आंकड़े बताते हैं कि साल 2020-21 को दौरान भारत ने 198.2 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर 61.9 बिलियन अमरीकी डालर खर्च किए।

यह पिछले वित्त वर्ष में 227 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर खर्च किए गए 101.4 बिलियन अमरीकी डॉलर से कम था। इसका यह मतलब क़तई नहीं है कि भारत का आयात बिल कम हो गया बल्कि आयात बिल में यह कमी तेल के आयात में कमी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  इसकी कीमतों में गिरावट की वजह से देखी गई थी। 

महामारी के दौरान भारत ऐसा तीसरा देश रहा जहां तेल के डिमांड में सबसे ज़्यादा 9 फीसदी का कॉन्ट्रैक्शन यानि संकुचन दर्ज किया गया। भारत में 2019-20 के दौरान 214.1 मिलियन टन तेल की खपत हुई जबकि 2020-21 के दौरान 31 मार्च के बाद से देश में तेल की खपत 194.6 मिलियन टन रही।

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