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2020: 6 सालों में महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए सबसे ज़्यादा अपराध, उत्तर प्रदेश रहा अव्वल

by Siddharth Chaturvedi 3 months ago Views 2294

CRIMES AGAINST WOMEN IN 2020 WAS HIGHEST IN LAST S
‘अगर वो वहाँ रात में नहीं जाती तो शायद ऐसा नहीं होता’, ‘शायद उस लड़की ने छोटे कपड़े पहने थे’, ‘शायद लड़की ने ही बुलाया होगा’- जघन्य बलात्कार की घटना के बाद अगर आप पीड़िता को ही दोषी ठहराने वाले ऐसे बयान सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान को ग़ुस्सा आ सकता है। और अगर ऐसा बयान राष्ट्रीय महिला आयोग का कोई सदस्य दे तब तो लगेगा कि पूरी व्यवस्था ही महिलाओं का शिकार करने में जुटी है।

अफ़सोस कि नारी की पूजा करने का दावा करने वाले भारत का यही हाल हो रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बदायूँ में एक पचास वर्षीय महिला के साथ एक मंदिर में सामूहिक बलात्कार हुआ। इस  अपराध का आरोप मंदिर के पुजारी और उसके दो साथियों पर है। पूरे देश में आक्रोश की लहर उठी  पर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी ने पीड़ित के परिजनों से मिलने के बाद जो बयान दिया उसने इस ग़ुस्से को और बढ़ा दिया  चंद्रमुखी देवी ने कहा कि पीड़ित महिला अगर शाम के वक्त मंदिर नहीं गई होतीं या उसके साथ परिवार का कोई बच्चा साथ में होता तो शायद ऐसी घटना नहीं घटती।


यानी जो आयोग महिलाओं के अधिकार और आज़ादी के पहरेदार की तरह वजूद में आया था, उसमें ऐसे सदस्य पहुँच गये हैं जो महिला को ही अपने ऊपर होने वाले अत्याचार की वजह मान रहे हैं। यह वही मानसिकता है जिसने भारत को महिला उत्पीड़न के मामले में शर्मिंदा करने वाले स्थान पर पहुँचा दिया है। साल 2020 में महिलाओं को पहले से ज़्यादा हिंसा का सामना करना पड़ा। हमारा देश किसी और क्षेत्र में आगे बढ़े या नहीं पर महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध करने की श्रेणी में निरंतर ऊपर चढ़ता जा रहा है।

2020 में कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा और लोग घरों में कैद हो गए। इस दौरान महिलाओं के लिए मुश्किलें और बढ़ गईं। उन्हें पहले से ज्यादा हिंसा का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय महिला आयोग को 2020 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की 23,722 शिकायतें मिलीं, यह 6 साल में सबसे ज्यादा है।

आयोग के मुताबिक, कुल शिकायतों में से एक चौथाई यानी 5,294 घरेलू हिंसा से जुड़ी थीं। यह कहना गलत नहीं होगा कि महिलाएँ घर में भी सुरक्षित नहीं हैं। वहीं देश में कई महिलाएं तो डर की वजह से शिकायत नहीं कर पाती हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग के मुताबिक, सबसे अधिक 11,872 शिकायतें उत्तर प्रदेश से मिलीं। इसके बाद दिल्ली से 2,635, हरियाणा 1,266 और महाराष्ट्र 1,188 से शिकायतें मिलीं।

जब देश में लॉकडाउन लगाया गया, उस वक्त राष्ट्रीय महिला आयोग के पास घरेलू हिंसा की शिकायतों की भरमार लग गई थी। घरेलू हिंसा की शिकायतें जुलाई महीने में और बढ़ीं। संयुक्त राष्ट्र के अभियान से हाल ही में जुड़ीं मॉडल और अभिनेत्री मानुषी छिल्लर कहती हैं कि महिलाएं हर कहीं अलग-अलग तरह से हिंसा की शिकार होती हैं और उन्हें यह देखकर दुख होता है। महिलाओं को हिंसा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए।

एनसीआरबी यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की क्राइम्स इन इंडिया 2019 रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराध 2018 से 2019 में 7.3% बढ़ गए हैं और स्थिति काफ़ी भयावह है।  2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,05,861 केस दर्ज हुए, जबकि 2018 में 3,78,236 केस हुए थे और 2017 में यह आँकड़ा 3,59,849 था।

अगर 2019 की बात करें तो भारत में सबसे ज़्यादा महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले उत्तर प्रदेश से आए जहाँ यह संख्या 59,853 (14.7%) थी, वहीं दूसरे नंबर पर राजस्थान था जहाँ से 41,550 (10.2%) मामले सामने आए। इसके बाद तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र 37,144 (9.2%), फ़िर पश्चिम बंगाल 30,394 (7.5%) और पाँचवें स्थान पर था असम जहाँ कुल 30,025 (7.4%) मामले सामने आए।

बलात्कार की घटनाओं को लेकर अक्सर पहनावे और उम्र आदि को लेकर टीका टिप्पणियाँ होती है, तो हक़ीक़त ये है कि साल 2019 में कुल बलात्कार के मामलों में से 15.4% घटनाएँ नाबालिग लड़कियों के साथ घटीं वहीं 84.6% मामले उन महिलाओं के साथ घाटे जिनकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है।

साथ ही बलात्कार से जुड़े कुछ और आंकड़ें भी हैं जो आँखें खोल देने वाले हैं। बलात्कार के कुल मामलों में से 35 घटनाएँ गर्भवती महिलाओं के साथ हुईं वहीं 2,220 मामले 16 साल या उससे कम उम्र की लड़कियों के साथ घटी।

यह सभी आँकड़े उन तमाम लोगों के मुँह पर तमाचा हैं जो बलात्कार जैसे घिनौने अपराध को या किसी भी अपराध को उम्र, वक़्त और कपड़ों जैसी तमाम बातों से जोड़कर देखते हैं।

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