ads

कोरोना से ठीक हुए मरीज़ों को हो रहा ब्लैक फंगस, बिना इलाज मौत का भी ख़तरा

by GoNews Desk 1 month ago Views 1543

Covid-induced black fungus cases on rise
हाल ही में देश में कुछ ऐसी कहानियां सुनने को मिल रही हैं जिसमें कोरोना से ठीक हो चुके मरीज अब एक नई बीमारी से जूझ रहे हैं। ये बीमारी इतनी ख़तरनाक है कि लोगों की जान बचाने के लिए उनके शरीर के अंग तक काटकर निकालने पड़ रहे हैं। ऐसे ही कई मामले राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, गुजरात में सामने आ चुके हैं। दिसंबर में इसके कुछ मामले देश में आए थे।

अब फ़िर से इसके कई केस अलग-अलग राज्यों में सामने आ रहे हैं। इनमें से कुछ मरीजों की मौत हो गई तो कुछ को संक्रमण से बचाने के लिए उनकी आंखें तक निकालनी पड़ी। इस नए संक्रमण का नाम है ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस। हालांकि, ज्यादातर उन्हीं लोगों में संक्रमण हो रहा है जिन्हें पहले से डायबिटीज है। ब्लैक यादातर उन लोगों को होता है जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों या शरीर की दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।


वहीं अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने भी एडवाइजरी जारी कर बताया है कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए यह म्यूकोरमाइकोसिस जानलेवा साबित हो रहा है। ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस वातावरण में मौजूद रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर देता है । सही समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान तक जा सकती है।

ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस में सरदर्द, बदन दर्द, तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में समस्या, आंखों और नाक के पास लाल होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति बदल जाना जैसे कई लक्षण दिखते हैं। केंद्र सरकार और आईसीएमआर ने इसे नज़र अंदाज नहीं करने की सलाह दी है। ऐसी स्थिति होने पर चिकित्सकों से परामर्श लेने को कहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर ने बीमारी की निगरानी, जांच और इलाज के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है ‘‘ ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस का इलाज नहीं किया जाए तो इससे मरीज की जान तक जा सकती है। हवा में मौजूद फफूंद सांस के रास्ते शरीर में पहुंचता है और धीरे-धीरे फेफड़े को प्रभावित करना शुरू कर देता है’’

आईसीएमआर-स्वास्थ्य मंत्रालय के परामर्श में कहा गया इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा, मधुमेह का अनियंत्रित होना, स्ट्रॉयड की वजह से प्रतिरक्षण क्षमता में कमी, लंबे समय तक आईसीयू में रहने वाले मरीजों पर यह जल्द प्रभाव छोड़ता है। इस संक्रमण से बचने के लिए कोरोना मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी देने के बाद भी ब्लड में ग्लूकोज की निगरानी रखनी जरूरी है।

ताज़ा वीडियो