कोरोना महामारी कैब पर पड़ी भारी

by Siddharth Chaturvedi 6 months ago Views 2037

Covid Era: Auto-rickshaws and bike taxis recover f
एक वक़्त था जब लोग ऑटो और बाइक से ज़्यादा टैक्सी को प्राथमिकता देते थे पर कोरोना महामारी ने क़रीब क़रीब सब कुछ बदलकर रख दिया और यह क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। ताज़े आंकड़े जो तस्वीर बयान करते हैं वो पुराने वक़्त से बिलकुल उलट है क्यूँकि अब लोग टैक्सी के मुक़ाबले ऑटो और बाइक को प्राथमिकता देने लगे हैं।

आंकड़े बताते हैं कि सार्वजनिक वाहन का उपयोग भी पूर्व-कोविड स्तरों की ओर बढ़ रहा है, साथ ही बाइक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा जैसे मोड कैब की तुलना में तेज़ी से पटरी पर लौट रहे हैं। जानकारों का मानना है कि ऐसा इस वजह से हो रहा है क्यूँकि लोगों को कोरोना महामारी के संक्रमण से बचने के लिए बंद टैक्सी की तुलना में बाइक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा ज़्यादा बेहतर और सुरक्षित विकल्प लग रहे हैं।


टैक्सी कंपनी उबर का कहना है कि, “कम टचप्वाइंट्स, बेहतर एयर सर्कुलेशन और बेहतर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ, ऑटो को काफ़ी हद तक सुरक्षित माना जा रहा है।” वहीं उबर के अनुसार अगर कुल बुकिंग की बात करें तो कुछ शहरों में ऑटो-रिक्शा की माँग पूर्व-कोविड स्तर से भी ऊपर चली गई है।

इंटरनेट सेक्टर कंसल्टेंसी फर्म RedSeer के आंकड़ों की बात करें तो जनवरी 2021 में 36 मिलियन कैब बुकिंग हुईं वहीं पिछले साल इसी वक़्त यह आँकड़ा 66 मिलियन था। हालांकि, ऑटो-रिक्शा बुकिंग में पिछले साल 28 मिलियन के ख़िलाफ़ इस साल 23 मिलियन सवारी दर्ज की गई, और बाइक टैक्सियों ने पिछले साल 19 मिलियन के ख़िलाफ़ इस साल 12 मिलियन सवारी दर्ज की। इससे यह साफ़ पता चलता है कोरोना ने कैब बुक करने वालों को ज़्यादा प्रभावित किया, जबकी ऑटो-रिक्शा और बाइक टैक्सी बुक करने वालों को तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित किया।

साथ ही दफ़्तरों के खुलने के बाद गैर-मेट्रो शहरों की तुलना में महानगरों में ऑटो और टैक्सी की सेवाएँ ज़्यादा तेज़ी से बहाल हुई हैं। 80 प्रतिशत के आँकड़े के साथ कोलकाता पहले स्थान पर है, जबकि मुंबई और दिल्ली 50 प्रतिशत उछाल के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में शीर्ष सात शहरों का हिस्सा, जो जनवरी 2020 में 72 प्रतिशत था, वो अब सवारी की संख्या के मामले में जनवरी 2021 में बढ़कर 75 प्रतिशत हो गया है।

उबर इंडिया के अध्यक्ष प्रभजीत सिंह ने कहा, “जैसे-जैसे शहर खुलने लगे हैं और लोग फिर से बढ़ने लगे हैं, हम नए सिरे से सवारियों की मांग देख रहे हैं, जो ड्राइवरों के लिए अच्छी ख़बर है, क्योंकि इसका मतलब है कि हम उनके लिए आजीविका के अवसर पैदा कर सकते हैं।”

साथ ही टीईआरआई के एक अध्ययन में कहा गया है कि, “लोग अधिक जोखिमों के कारण सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से हटने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे यात्रा के निजी साधनों का उपयोग बढ़ जाता है।”

कुल मिलाकर इन सब आंकड़ों से यह पता चलता है कि कोरोना ने हमारे जीने के तरीक़े को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। ज़िंदगी धीरे धीरे पटरी पर लौट तो रही है पर लगता है अभी दिल्ली काफ़ी दूर है।

ताज़ा वीडियो

ads