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ऑक्सीजन की कमी से हो रही मौतें 'नरसंहार' से कम नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

by GoNews Desk 1 month ago Views 1035

मेरठ मेडिकल कॉलेज के नए ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में ऑक्सीजन नहीं मिलने से 5 मरीजों की मौत हो गई थी...

Covid deaths due to oxygen shortage no less than '
देश में कोरोना संक्रमण से हालात बेकाबू हैं। ऑक्सीजन की कमी से कई मरीज जान गंवा चुके हैं। इस बीच एक सख्त टिप्पणी में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से हे हो रही मौतों को आपराधिक कृत्य क़रार दिया और कहा कि यह उन अधिकारियों द्वारा किसी 'नरसंहार' से कम नहीं है जिन्हें इसकी आपूर्ति की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। 

कोर्ट ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उन खबरों पर किया जिनके मुताबिक ऑक्सीजन की कमी से लखनऊ और मेरठ जिले में कोविड मरीजों की जान गई। कोर्ट ने लखनऊ और मेरठ के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इनकी 48 घंटों के भीतर जांच करें।


जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस कुमार की पीठ ने राज्य में संक्रमण और क्वारनटाइन सेंटर के हालात संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। कोर्ट ने दोनों जिलाधिकारियों से कहा है कि वे मामले की अगली सुनवाई पर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करें और अदालत में ऑनलाइन मौजूद रहें।

कोर्ट ने कहा, “हमें यह देखकर दुख हो रहा है कि अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने से मरीजों की जान जा रही है। यह एक आपराधिक कृत्य है और यह उन लोगों द्वारा नरसंहार से कम नहीं है जिन्हें मेडिकल ऑक्सीज़न की ख़रीद और उसके आपूर्ति की ज़िम्मेदारी दी गई थी।

कोर्ट ने आगे कहा, 'जब साइंस इतनी तरक्की कर गई है कि दिल और दिमाग की सर्जरी तक की जा रही है, ऐसे में हम अपने लोगों को इस तरह से कैसे मरने दे सकते हैं। आमतौर पर हम सोशल मीडिया पर वायरल ख़बरों के जांच के आदेश नहीं देते लेकिन इस जनहित याचिका में पेश अधिवक्ता इस तरह की खबरों का समर्थन कर रहे हैं, इसलिए हमारा सरकार को तत्काल इस संबंध में कदम उठाने के लिए कहना जरूरी है।’

सुनवाई के दौरान कोर्ट यह बताया गया कि मेरठ मेडिकल कॉलेज के नए ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में ऑक्सीजन नहीं मिलने से 5 मरीजों की मौत हो गई थी और यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसी तरह, लखनऊ के गोमती नगर में सन हॉस्पिटल और एक अन्य निजी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी होने पर डॉक्टरों ने मरीज़ों का अपना इंतज़ाम ख़ुद करने को कहा ता जो ख़बर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक जज जस्टिस वीके श्रीवास्तव की संक्रमण से मौत हो गई थी। इसपर कोर्ट ने कहा, 'हमें बताया गया है कि जस्टिस श्रीवास्तव को 23 अप्रैल की सुबह लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, मगर शाम तक उनकी देखभाल नहीं की गई। शाम 7:30 बजे हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और उसी रात उन्हें एसजीपीजीआई में ले जाया गया जहां वो पांच दिन आईसीयू में रहे और उनकी कोरोना संक्रमण से असामयिक मृत्यु हो गयी।’

कोर्ट ने यह भी पूछा की बताएं कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल में जस्टिस श्रीवास्तव का क्या इलाज हुआ और उन्हें 23 अप्रैल को ही एसजीपीजीआई क्यों नहीं ले जाया गया?' 

जनहित याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य में संक्रमण की दूसरी लहर के बीच हुए पंचायत चुनाव पर भी सवाल उठाए गए थे। याचिका में कहा गया था कि, ' ग्राम पंचायत चुनावों की मतगणना के दौरान कोविड दिशानिर्देशों का भारी उल्लंघन किया गया। लोग मतगणना केन्द्रों पर भारी संख्या में इकट्ठा हुए और चुनाव अधिकारी और पुलिस मूक दर्शक बनी रही।'

इस पर कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को सुनवाई की अगली तारीख 7 मई को लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, गाजियाबाद, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर और आगरा में मतगणना केंद्रों का सीसीटीवी फुटेज पेश करने को कहा है। अदालत ने कहा, हम यहां स्पष्ट करते हैं कि अगर आयोग सीसीटीवी फुटेज से यह पाता है कि कोविड प्रोटोकाल का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है तो वो इस संबंध में कार्य योजना पेश करेगा।

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