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कोरोना वायरस: तब्लीग़ियों पर ‘चिल्लाहट’ और कुंभ को लेकर ‘चुप्पी’ पर सवाल

by GoNews Desk 1 month ago Views 1739

kumbh mela 2021
भारत कोरोना के दूसरी लहर की ज़द में है। कोरोना के हर रोज़ डेढ़ लाख से ज़्यादा मरीज़ सामने आ रहे हैं। इस बीच हरिद्वार में कुंभ की धूम है। यहां लाखों लोगों का जमावड़ा लगा है। एक रिपोर्ट के मुकाबिक़ सोमवार दोपहर तक कोरोना नियमों को दरकिनार कर करीब 21 लाख लोगों ने गंगा में ‘आस्था की डुबकी लगाई।’ 

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच राज्य अपने स्तर पर नियम लागू कर रहे हैं। महाराष्ट्र समेत कुछ राज्य ऐसे हैं जहां कोरोना के  मामले भयावह रूप ले रहे हैं। मीडिया समूंह का एक बड़ा हिस्सा दावा कर रहा है कि मेले में कोरोना के नियमों का पालन किया जा रहा है जबकि एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि घाट पर सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करना बहुत ज़्यादा मुश्किल है। कोरोना के नियमों की नज़रअंदाजी का नतीजा ये हुआ है कि मंगलवार को मेले में आने वाले 102 श्रद्धालु कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।


एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना टेस्टिंग में भी लापरवाही बरती जा रही है। स्नान के लिए आ रहे लाखों लोगों में केवल कुछ लोगों की ही टेस्टिंग की जा रही है जबकि अन्य लोगों को मास्क पहना देख, थर्मल स्क्रिनिंग कर या फिर नेगेटिव टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। सोमवार को मेले में दर्शन के लिए उमड़ी 28 लाख लोगों की भीड़ में से रविवार दोपहर 11.30 बजे से सोमवार शाम 5 बजे तक सिर्फ 18,169 लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया। उत्तराखंड में सोमवार को कोरोना के 1,333 नए मामले सामने आए हैं। 

राज्य में कोरोना के एक्टिव केस बढ़ कर 7,000 के पार पहुंच गई है। दूसरी ओर कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इस तरह के बड़े उत्सव के आयोजन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मेले का आयोजन ऐसे समय किया गया है जब देश में कोरोना का डबल म्यूटेंट वैरिएंट पाया जा चुका है। कई राज्यों की महामारी से निपटने की क्षमता कम हो गई है और देश के कई हिस्सों में शमशान घाटों पर कोरोना से मारे गए लोगों के शवों का ढेर इकट्ठा हो रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी संक्रमण के तेज़ी से फैलने के बीच कुंभ मेले के आयोजन को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इन सब के बीच लोगों को बड़ी संख्या में कुंभ में भाग लेने के लिए कहा है। उन्होंने कहा था कि लोगों को बड़ी संख्या में स्नान के लिए हरिद्वार आना चाहिए और किसी को भी कोविड 19 के नाम पर रोका नहीं जाएगा। रावत ने साथ ही कहा था कि हरिद्वार कुंभ मेले की तुलना तबलीगी जमात से नहीं की जानी चाहिए।

ग़ौरतलब है कि महामारी की शुरूआत में दिल्ली के निज़ामुद्दीन मर्कज़ में तबलीगी जमात का कार्यक्रम हुआ था। इस कार्यक्रम में देश के उत्तर प्रदेश, कश्मीर, असम, कर्नाटक जैसे राज्यों के साथ थाइलैंड, मलेशिया, नेपाल और इंडोनेशिया के मुस्लमानों ने शिरकत की थी। ये कार्यक्रम दिल्ली में 10 से लेकर 13 मार्च के बीच 2020 में हुआ था। 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड 19 को महामारी घोषित कर दिया था जबकि 13 मार्च तक केंद्रिय स्वास्थ्य मंत्रालय यही कहता रहा कि कोरोना से लोगों को घबराने की ज़रूरत नहीं है।

इसके बाद जब देश में लॉकडाउन की घोषणा की गई और लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगाई गई तब तबलीगी जमात के 2,631 सदस्यों को मर्कज़ से निकाल कर अस्पतालों में क्वारंटीन के लिए भेजा गया। भारत में महामारी को फैलाने का ज़िम्मेदार तबलीगी जमात को माना गया और इसमें शामिल हुए लोगों एवं मुस्लिम समुदाय को नफरत का शिकार बनना पड़ा।

इसमें बहुत बड़ी भूमिका भारतीय मीडिया और नेताओं की रही। मीडिया में जमात के सदस्यों को अपराधियों की तरह पेश किया गया। यहां तक कि नेशनल मीडिया में इनसे जुड़ी गलत वीडियो साझा की गई। समाचार चैनलों में तबलीगी जमात को बैन करने की मांग उठी और मस्जिदों को भारतीयों के लिए खतरा बताया गया। गृह मंत्रालय ने इंडोनेशिया के 800 प्रचारकों पर प्रतिबंध लगाने का भी निर्णय किया था।

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