कोरोना महामारी: केन्द्र को कांग्रेस के आठ सुझाव

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2367

कांग्रेस पार्टी ने अपने श्वेत पत्र में बताया है कि पार्टी के नेताओं की तरफ से यह सभी मांगें बार-बार की गई है...

Corona Pandemic: Congress 8 Recommendations to cen
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को पार्टी की तरफ से एक व्हाइट पेपर यानि श्वेत पत्र जारी किया है। इसमें पार्टी ने केन्द्र की मोदी सरकार को दूसरी लहर के दौरान किए गए अपनी ग़लतियों को सुधारने को कहा है। राहुल ने श्वेत पत्र जारी करने के दौरान कहा कि तीसरी लहर आनी तय है, ऐसे में केन्द्र को चाहिए कि वे इसके लिए तैयारियां पूरी करे।

कांग्रेस की तरफ से जारी श्वेत पत्र में केन्द्र को तीसरी लहर से निपटने को लेकर मुख्य तौर पर आठ सुझाव दिए गए हैं। ऐसे तो पार्टी की तरफ से यह मांग महामारी की शुरुआत से ही की जाती रही है लेकिन श्वेत पत्र में इन्हें शामिल करना अलग से प्रभावी माना जाता है।


आठ सुझावों में ग़रीबों के लिए इन्कम सपोर्ट, मनरेगा के तहत रोजगार, फूड सिक्योरिटी से लेकर किसानों के लिए मदद की मांग की गई है। इनके अलावा एमएसएमई और बड़ी इंडस्ट्रियों के लिए भी क़दम उठाने और उनपर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

1- इन्कम सपोर्ट

श्वेत पत्र में मांग की गई है कि कम से कम 13 करोड़ गरीब परिवारों को 'आय सहायता' प्रदान किए जाएं। यह भी मांग की गई है कि प्रत्येक परिवार के खाते में 7,500 रूपये ट्रांसफर किए जाएं। श्वेत पत्र में कहा गया है कि अगर इतना नहीं तो 13 करोड़ परिवार के खाते में सिर्फ 5000 रूपये ही ट्रांसफर किए जाते हैं तो यह कुल 65,000 करोड़ रूपये बनता है जो हमें अवश्य ही अफोर्ड करना चाहिए।

2- मनरेगा

जो लोग मनरेगा से जुड़े हुए हैं उनके लिए काम के दिन 100 से बढ़ाकर 200 दिन किया जाना चाहिए ताकि इससे जुड़े लोगों को और ज़्यादा काम मिल सके और अपना घर-परिवार चला सकें। श्वेत पत्र के मुताबिक़ हमारे देश की 28-30 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। कांग्रेस की मांग है कि मनरेगा को शहरी इलाकों में भी लागू किया जाना चाहिए। 

3- फूड सिक्योरिटी

श्वेत पत्र में बताया गया है कि पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम से 11 करोड़ लोग बाहर हैं, ऐसे में इन लोगों को अनाज कैसे मुहैया कराई जाए, इसके लिए क़दम उठाने की मांग की गई है। इनके अलावा अगले छह महीने तक पीडीएस के तहत आने वाले लोगों को प्रति व्यक्ति दस किलोग्राम चावल या गेहूं, एक किलो दाल और एक किलो चीनी मुहैया कराए जाने की  मांग की गई है।

4- एग्रिकल्चर एंड फार्मर्स

कांग्रेस के श्वेत पत्र में अन्नदाता को समर्थन और सशक्त करने की मांग की गई है। 

श्वेत पत्र में पीएम किसान योजना में शामिल सभी 8.22 करोड़ खाते में केन्द्र से दस हज़ार रूपये अर्जेंट ट्रांसफर की मांग की गई है। किसानों के सभी अनाजों को एमएसपी या मिनिमम सपोर्ट प्राइस पर खरीदारी की मांग की गई है। इसके साथ ही फर्टिलाइजर, पेस्टिसाइड्स और खेती में इस्तेमाल होने वाली सभी इक्वीपमेंट को जीएसटी फ्री करने की मांग भी की गई है।

5- एमएसएमई

कांग्रेस ने श्वेत पत्र में कहा है कि 6.25 करोड़ एमएसएमई 11 करोड़ नौकरिया पैदा करते हैं। ऐसे में इनके लिए एक लाख करोड़ के 'वेज प्रोटेक्शन स्कीम' और एक लाख करोड़ के 'क्रेडिट गारंटी स्कीम' शुरु करने की मांग की गई है। इनके अलावा एमएसएमई द्वारा लिए गए कर्ज पर छह महीने के ब्याज के बराबर सब्सिडी देने की मांग भी की गई है। 

6- लार्ज इंडस्ट्रीज़

इसी तरह की क्रेडिट गारंटी और ब्याज सब्सिडी बड़े उद्योगों को भी दिए जाने की मांग की गई है, ताकि वे अपनी सहायक इकाइयों का समर्थन कर सकें। श्वेत पत्र के मुताबिक़ इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी की वे वैल्यू चेन को बरक़रार रखेंगे और कर्मचारियों की छंटनी नहीं होगी। 

7- शॉपकीपर्स

श्वेत पत्र में कांग्रेस ने हॉट्स्पॉट को छोड़कर रिटेल सप्लाई चेन को बहाल करने की मांग की है। इससे पूरे देश में सात करोड़ दुकानदारों को मदद मिलेगी। 

ग़ौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान किराना स्टोर की बिक्री 10-15 फीसदी घट गई है। अग्रेज़ी दैनिक बिज़नेस टुडे के मुताबिक़ किराना स्टोर पर पहली लहर के मुक़ाबले दूसरी लहर का बुरा प्रभाव पड़ा है। हालांकि संक्रमण की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन में किराना स्टोर का मार्केट शेयर 6-7 फीसदी बढ़ा था। 

8- माइग्रेंट लेबरर्स

कांग्रेस ने श्वेत पत्र में पार्टी नेता राहुल गांधी के एक बयान का ज़िक्र किया है जिसमें उन्होंने दिहाड़ी मज़दूरों को लेकर कहा था, 'ट्रेनों के रद्द होने और प्रवासियों की ख़बर से मैं बहुत परेशान और दुखी हूं। कुछ राज्यों में मज़दूरों को वापस रहने के लिए मज़बूर किया जा रहा है।'

'वे बंधुआ मजदूर नहीं हैं और उन्हें अपनी मर्ज़ी से घर जाने की इजाज़त होनी चाहिए। बसों और रेलगाड़ियाँ की घोषणा के बावजूद हज़ारों लोग अभी भी पैदल अपने गाँव जाने को क्यों मजबूर हैं?' 

कांग्रेस पार्टी ने अपने श्वेत पत्र में बताया है कि पार्टी के नेताओं की तरफ से यह सभी मांगें बार-बार की गई है, जबकि केन्द्र ने इसपर कोई संज्ञान नहीं लिया। यह मांगें पिछले साल पार्टी की तरफ से 16 मई और 26 मई को भी किए गए थे लेकिन सरकार ने इन मांगों की अनदेखी की।

इतना ही नहीं कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी 26 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री मोदी को लिखे अपनी चिट्ठी में इन मांगों का ज़िक्र किया था। अब आख़िरी में पार्टी की तरफ से यह श्वेत पत्र जारी किया गया है।

क्यों और कब जारी होता है श्वेत पत्र ?

राजनयिकों या किसी देश की ओर से जारी होने वाला यह श्वेत पत्र एक तरह की रिपोर्ट है, जिसमें किसी मुश्किल मुद्दे पर सिलसिलेवार जानकारी दी जाती है। यह आमतौर पर तब जारी किया जाता है कि जब किसी मुद्दे पर बहुत सारे विचार एक साथ आ रहे हों और उसे समझने में लोगों को समस्या हो रही हो।

इस पत्र के ज़रिए मुद्दे को समझाया जाता है, किसी समस्या का हल खोजा जाता है और यहां तक कि श्वेत पत्र में लिखी बातों से किसी निष्कर्ष तक भी पहुंचा जा सकता है।

ताज़ा वीडियो