कोरोना, ऑक्सीजन संकट: प्रधानमंत्री मोदी की 'नाकाम कोशिशों' पर क्या लिख रहा विदेशी मीडिया ?

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2089

"भविष्यवाणियां की गईं कि भारत दुनिया में कोरोनोवायरस से सबसे अधिक प्रभावित होगा"

Corona, Oxygen Crisis: What Global Media Writing O
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करोड़ों रूपये ख़र्च कर विदेशों में अपना प्रचार-प्रसार किया, इस सोच के साथ कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक पहचान मिलेगी। लेकिन विदेशी मीडिया में इन दिनों भारत को लेकर हो रही रिपोर्टिंग से वैश्विक स्तर पर देश की साख़ को गंभीर रूप से धक्का लगा है।

मसलन देश में कोरोना संक्रमण को लेकर पीएम मोदी और उनकी सरकार के रवैये की विदेशी मीडिया में जमकर आलोचना हो रही है। रविवार को गलोबल मीडिया आउटलेट न्यू यॉर्क टाइम्स ने भारत में कोरोना संक्रमण के हालात और ‘छुपाए जा रहे’ मौतों के आंकड़े को लेकर एक लेख प्रकाशित की है।


The New York Times

अख़बार ने लिखा है कि ‘कोरोना वायरस ने भारत में तबाही मचाई हुई है और मौतों के आंकड़े कम करके बताए जा रहे हैं।’ अख़बार ने आगे लिखा है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर देश में तबाही बनती जा रही है। इस बीच अस्पातल में बेड ख़त्म हो गए हैं, ऑक्सीजन सप्लाई बाधित हुआ है और अस्पतालों में लोग डॉक्टर के इंतज़ार में दम तोड़ रहे हैं। एविडेंस या साक्ष्य से पता चलता है कि आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट्स की तुलना में भारत में मौतें कहीं ज़्यादा हो रही है।

अख़बार ने गुजरात के अहमदाबाद स्थित एक शवदाह गृह में काम करने वाले सुरेश भाई के हवाले से लिखा है कि 24 घंटे आसमान में उज्जवल नारंगी सा जलता रहता है। शव इस तरह से जल रहे हैं जैसे कोई औद्योगिक प्लांट में काम हो रहा हो, जो कभी बंद नहीं होते। अख़बार ने लिखा है कि शवदाह गृह में काम करने वाले सुरेश बताते हैं कि उन्होंने मौतों का ऐसा भयानक मंज़र कभी नहीं देखा।

अख़बार आगे लिखता है, ‘मौतों की वजह दर्ज नहीं की जा रही है। संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच मौतें बढ़ रही है लेकिन शवदाह गृह में एक छोटे से काग़ज़ पर जानकारी दर्ज कर परिवार को सौंपा जा रहा है।’ अख़बार ने लिखा है कि पूछे जाने पर कि काग़ज़ पर क्या दर्ज किए जाते हैं, जवाब मिला ‘बीमार, बीमार, बीमार।’ यह पूछे जाने पर कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा, जवाब मिला कि मालिक के निर्देश पर ही ऐसा किया जा रहा।

Financial Times

देश में संक्रमण के हालात और उसके क़ाबू करने की सरकार की नाकाम कोशिशों को लेकर फाइनेंशियल टाइम्स ने भी एक लेख प्रकाशित की है। भारत की विनाशकारी दूसरी लहर, ‘इसबार और भी बुरी।’ शीर्षक के साथ अख़बार ने लिखा है कि, ‘गंगा के तट पर हर रात अंतिम संस्कार की चिताएं, एक क्रूर कोरोना की लहर का एक गंभीर प्रतीक है जिसने भारत में स्वास्थ्य संकट और मानव त्रासदी को जन्म दिया है। भारत में पिछले साल के संकट से कहीं बड़ी संकट पैदा हो गई है।

अस्पतालों में परिवार के लोग बेड की तलाश कर रहे हैं और इसकी कमी से संक्रमण के मरीज़ दम तोड़ रहे हैं। ऑक्सीजन और दवाओं की आपूर्ति कम है जिससे अस्पतालों में दवाइयों की लूट हो रही है। तबाही के सामने सरकारी अधिकारियों के संक्रमण से लड़ने की तैयारी के दावे को फीके पड़ गए हैं जो मानते थे कि महामारी का बुरा दौर ख़त्म हो गया।

The Wall Street Journal

कब्रिस्तान में कोविड मरीज़ के दफनाने की तस्वीर के साथ दि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है कि ‘भारत में कोरोना के बढ़ते मामले सबसे ज़्यादा क्रूर, जंगल की आग की तरह फैल रहा है।’ अख़बार ने भारत में संक्रमण के हालत पर कई लेख प्रकाशित किए हैं। एक लेख में अंग्रेज़ी अख़बार ने लिखा है कि ‘1.3 अरब से ज़्यादा की आबादी और आसमान छूते संक्रमण के आंकड़े, बहुत ज़्यादा संभावना है कि भारत में वायरस के नए वैरिएंट उत्पन्न हो, जो मूल और सीमाओं से परे भी फैल सकता है।’

अख़बार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनवरी महीने में वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम में दिए उस बयान का भी ज़िक्र किया है जिसमें उन्होंने कहा था, "भविष्यवाणियां की गईं कि भारत दुनिया में कोरोनोवायरस से सबसे अधिक प्रभावित होगा।” "आज भारत उन देशों में से है जो अपने नागरिकों के जीवन को बचाने में सफल रहे हैं।”

अख़बार ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के उन दावों का भी ज़िक्र किया है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को "सक्षम, संवेदनशील, प्रतिबद्ध और दूरदर्शी नेतृत्व" का बताया गया था और कहा गया था कि ‘हमन कोरोना को हरा दिया।’ अख़बार ने संक्रमण की दूसरी लहर के बीच कुंभ मेले की अनुमति को लेकर भी मोदी सरकार की आलोचना की है।

ग़ौरतलब है कि भारत में संक्रमण के हालात और उसे क़ाबू करने में मोदी सरकार की नाकाम कोशिशों पर विदेशी मीडिया में जिस तरह से रिपोर्टिंग हो रही है। उसके मुक़ाबले देश की मीडिया मानो आंख पर पट्टी लगाकर ख़ामोश हो गई है।

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