क्लाइमेट क्राइसिस इज रियल, 1970 के बाद से आपदा की घटनाएं बढ़ी- रिपोर्ट

by M. Nuruddin 9 months ago Views 1615

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं से कुल 3.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है और इसकी मुख्य वजह जल-आधारित आपदाएं जैसे चक्रवात और बाढ़ हैं...

Climate Crisis Is Real, Disaster Incidents Increas
वर्ल्ड मेटरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन ने अपनी नई रिपोर्ट डब्ल्यूएमओ एटलस ऑफ मॉर्टेलिटी एंड इकोनॉमिक लॉस- 2021 जारी कर दी है। इस रिपोर्ट से पता चला है कि चरम मौसम और परिणामी आर्थिक नुकसान की घटनाएं दुनिया भर में 1970 के बाद से बढ़ गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है, "50 सालों की अवधि में आपदाओं की घटनाओं में पांच गुना बढ़ोत्तरी हुई है। 1970-79 के दौरान 711 आपदाएं देखी गई, जबकि साल 2000 से 2009 के बीच 3,536 आपदाएं दर्ज हुईं।”


पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में बारिश ने अपना 19 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह बार-बार देखा गया है और अध्ययन किया गया है कि भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के साथ और ज़्यादा अनिश्चित और तीव्र हो रही है। बारिश से शहरों में न सिर्फ बाढ़ बल्कि ट्रैफिक जाम, स्वास्थ्य समस्याएं, बिजली की कटौती भी होती है। इस मानसून के पैटर्न की समग्र अस्थिरता का कृषि और मौसम के पैटर्न पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि आपदाओं की वजह से भारी संख्या में संपत्तियों और जान-माल का नुक़सान होता है। रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिाभर में 44 फीसदी आपदाएं बाढ़ से जुड़ी हैं, जबकि 17 फीसदी आपदाएं चक्रवाती तूफानों की वजह से घटित होती हैं।”

रिपोर्ट से पता चलता है कि क्लाइमेट क्रासिस का सबसे ज़्यादा खामियाजा विकासशील दुनिया या ग्लोबल साउथ भुगत रहे हैं। विश्व बैंक के मुताबिक़ आपदाओं में 82 फीसदी मौतें लोअर-मिडिल इन्कम देशों में दर्ज की गई है जबकि संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ 91 फीसदी मौतें डेवलपिंग देशों में दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 1970 से अबतक अलग-अलग आपदाओं में 2.6 मिलियन लोग मारे गए हैं। इनमें सबसे ज़्यादा 39 फीसदी मौतें अलग-अलग स्टॉर्म की वजह से हुई हैं। इनके अलावा सूखे की वजह से भी भारी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि सूखे की वजह से 34 फीसदी मौतें हुई हैं और बाढ़ की वजह से 16 फीसदी मौतें दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं से कुल 3.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है और इसकी मुख्य वजह जल-आधारित आपदाएं जैसे चक्रवात और बाढ़ हैं।

अब अगर हम एशियाई देशों की बात करें तो चीन और भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश हैं और इन दोनों देशों ने क्लाइमेट संबंधी आपदाओं का सबसे ज़्यादा सामना किया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि "आर्थिक नुकसान के मामले में सबसे प्रचलित ख़तरा बाढ़ था।”

आंकड़े देखें तो हर साल बाढ़ की वजह से सैकड़ों-हज़ारों लोगों की मौत हो रही है। जुलाई 2021 में पश्चिमी महाराष्ट्र में बाढ़ से 251 लोगों की मौत हो गई। इसी तरह साल 2020 में असम में बाढ़ की वजह से 149 लोग मारे गए। इनके अलावा 2019 में केरल में 121, 2015 में गुजरात में 72 और 2013 में उत्तराखंड में बाढ़ और लैंडस्लाइड में 5,700 लोग मारे गए।

रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन में पिछले 50 सालों में अलग-अलग दर्ज 907 आपदाओं में 90,624 लोग मारे गए। जबकि भारत में 551 आपदा की घटनाएं हुई और 134,037 लोगों की मौत हुई।

हाल ही में चीन के हुनान प्रांत में फ्लैश फ्लड में कई लोगों की मौत हो गई और भारतीय राजधानी दिल्ली में लगातार बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। इससे साफ है कि क्लाइमेट क्राइसिस रियल है और स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर कुछ ठोस क़दम उठाने की ज़रूरत है।

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