क्लाइमेट क्राइसिस बन रहा भारत में घरेलू पलायन का कारण: IIED Report

by GoNews Desk 1 month ago Views 1583

आसान भाषा में कहें तो सर्वे में पाया गया कि सूखा, बाढ़ से फसल को नुकसान होने या अन्य मौसमी कारणों से लोग पलायन ज़्यादा कर रहे हैं...

Climate crisis becoming the reason for domestic mi
ब्रिटेन के Glasgow में अगले हफ्ते होने वाले COP26 से पहले इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट (IIED) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि जलवायु परिवर्तन भारत में पलायन में बढ़ोत्तरी और इसका कारण बन रहा है। अध्ययन से पता चला कि वो लोग जो मौसमी घटनाओं से ज़्यादा प्रभावित थे, ने पलायन करना ज़्यादा बेहतर समझा। आसान भाषा में कहें तो सर्वे में पाया गया कि सूखा, बाढ़ से फसल को नुकसान होने या अन्य मौसमी कारणों से लोग पलायन ज़्यादा कर रहे हैं।

रिपोर्ट का शीर्षक 'कनेक्टिंग द डॉट्स: क्लाइमेट चेंज, माइग्रेशन एंड सोशल प्रोटेक्शन' है। इसे पांच शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है। इसका उद्देश्य डेटा और अन्य प्रासंगिक जानकारी के साथ जलवायु प्रवासियों की ज़रूरतों, मुद्दों और कमजोरियों को समझने में नीति निर्माताओं की सहायता करना है।


IIED में सीनियर रिसर्चर और सर्वे में शामिल रितु भारद्वाज ने कहा, "जलवायु प्रवास का पैमाना चौंकाने वाला है" और "हम यह दिखावा नहीं कर सकते कि ऐसा नहीं हो रहा है"। भारत के हाशिए पर रहने वाले समुदायों और गरीब लोगों को हीटवेव, चक्रवात और अप्रत्याशित बारिश की बढ़ती घटनाओं का सामना करना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के सार के रूप में, "सूखा, समुद्र के बढ़ते स्तर और बाढ़ उन लोगों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं जो पहले से ही संघर्षरत हैं। इस वजह से वे अपने घरों और अपने मूल स्थान को छोड़ने के लिए मज़बूर हो रहे हैं।”

विशेषज्ञों ने तर्क दिया है कि उत्तराखंड में हाल ही में भारी बारिश की वजह से आई बाढ़ और हाल के महीनों में दिल्ली में लैंडस्लाइड और बाढ़ की जो स्थिति बनी है, उसे जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

सर्व में मुख्य रूप से बड़ी आबादी वाले राज्यों- जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान को शामिल किया गया। अध्ययन के हिस्से के रूप में सर्वेक्षण किए गए लगभग 70 फीसदी परिवारों ने कहा कि पिछले 5-10 सालों में सूखे की हालत गंभीर हुई है, और इसकी वजह से लोग तेज़ी से प्रवास कर रहे हैं, उनके पास जीवित रहने के लिए कोई अन्य विकल्प भी नहीं बचा है।

IIED द्वारा जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि "दो तिहाई से ज़्यादा परिवार अपने प्रवास के लिए सूखे, बाढ़, लू और ओलावृष्टि को दोष देते हैं"। रिपोर्ट के मुताबिक़ बेहतर शिक्षा और घरेलू दबाव जैसे अन्य कारणों के अलावा अब जलवायु संकट या क्लाइमेट क्राइसिस भी जल्द ही बड़े स्तर पर भारत में घरेलू प्रवास का कारण बन सकता है।

सर्वे में शामिल तीन राज्यों में लोगों के प्रवास का कारण मुख्य रूप से रोजगार की तलाश रही। रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में 94.4 फीसदी, मध्य प्रदेश में 95.2 फीसदी और राजस्थान में 90.6 फीसदी लोगों ने रोजगार की तलाश में पलायन किया। इनके अलावा सूखा की वजह से राजस्थान से 28.3 फीसदी और अन्य दो राज्यों में 8 फीसदी लोग सूखे की वजह पलायन कर गए।

रिपोर्ट में कहा गया है, "उत्तर प्रदेश में 35 फीसदी उत्तरदाताओं ने बताया कि वे जलवायु के झटके की वजह से अपने गांवों में काम नहीं कर रहे थे।" कुल मिलाकर, आय का मौसमी नुकसान 5.21 फीसदी पलायन में योगदान देता है, जो मध्य प्रदेश में 7.42 फीसदी है। "सूखा, बाढ़ और ओलावृष्टि जैसी जलवायु घटनाएं 'तनाव' के रूप में काम करती हैं और ऐसे में लोग पलायन को मज़बूर हो जाते हैं।”

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