गुजरात में चीनी कंपनियों का आना जारी, राज्य में पिछले 20 दिनों में 41 हज़ार करोड़ का प्रस्तावित निवेश

by Rahul Gautam 1 month ago Views 1552
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गलवान वैली में चीनी सेना के साथ झड़प में 20 सैनिकों की मौत के बाद देश में चीन की आर्थिक गतिविधियों के बहिष्कार की लहर है। केंद्र सरकार चीनी एप्प, टेलीकॉम सेक्टर से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में चीन की कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रही है। कई राज्य सरकारों ने भी चीनी कंपनियों को दिए ठेके रद्द कर दिए हैं। लेकिन मानो पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात और चीनी निवेशकों के बीच सब ठीक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 20 दिनों में ही 3 चीनी कंपनियों ने गुजरात में 41 हज़ार करोड़ का प्रस्तावित निवेश किया है। इसमें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 19 हज़ार करोड़ रुपए, टेक्सटाइल पार्क में 12 हज़ार करोड़ रुपए और 10 हज़ार करोड़ रुपए इंडस्ट्रियल पार्क के लिए प्रस्तावित है। चीनी कंपनियों ने खासतौर पर गुजरात में ऊर्जा, स्टील और ऑटोमोबाइल सेक्टर में पहले से ही निवेश कर रखा है। दिलचस्प यह है कि इन चीनी कंपनियों की राह खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने आसान की थी।

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दुनियाभर में निवेश पर शोध करने वाली ब्रुकिंग्स इंडिया की मार्च की रिपोर्ट बताती है कि चीनी कंपनी टेबियन इलेक्ट्रिक एपरेटस देश में उर्जा से जुड़े भारी उपकरण बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है।गुजरात में इस कंपनी ने 2014 में ट्रांसफॉर्मर बनाने का प्लांट लगाने और 400 मिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया था। अबतक 150 मिलियन डॉलर का निवेश किया भी जा चुका है।

एक और चीनी कंपनी शिंगशान होल्डिंग समूह ने भी भारत में जॉइंट वेंचर के तहत गुजरात के ढोलेरा इंडस्ट्रीयल एरिया में एक स्टील प्लांट में एक अरब डॉलर का निवेश किया है। इस कंपनी का लक्ष्य है कि आगे चलकर स्टील प्लांटों में दो अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश किया जाये।

इसके अलावा साल 2019 में शंघाई की ऑटोमोबाइल कंपनी एसएआईसी मोटर कॉर्पोरेशन भारत पहुंची ताकि भारतीय ग्राहकों की ज़रूरतों और सहूलियतों के मुताबिक उत्पादन कर सके। इसके लिए कंपनी ने गुजरात के हलोल में जनरल मोटर्स के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 2000 करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान किया। इसके अलावा यह चीनी कंपनी भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में 350 मिलियन डॉलर के और निवेश की तैयारी कर रही है।

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब केंद्र और कई राज्य सरकारें चीन को आर्थिक चोट देने के लिए एक के बाद एक करार रद्द कर रही है, ऐसे में गुजरात की विजय रुपानी सरकार भी आगे बढ़कर चीनी कंपनियों के साथ हुए तमाम MoU रद्द करेगी ?