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भारत के साथ सीमा विवाद को चीन पहले हवा नहीं देगा : वांग यी

by Shahnawaz Malik 8 months ago Views 768

China will not be first to escalate China-India bo
भारत-चीन के सैनिकों के बीच 29/30 अगस्त की दरमियानी रात झड़प के बाद रिश्तों में तनाव अपने चरम पर है. इस विवाद पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने चुप्पी तोड़ी है जो फ्रांस के दौरे पर हैं. उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा पर हमेशा स्थिरता बनाए रखने के लिए उनका देश प्रतिबद्ध है और उसकी तरफ से किसी विवाद को उलझाने या बढ़ाने की कोशिश पहले नहीं होगी.

चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत-चीन के बीच सीमा का विभाजन अभी तक नहीं हुआ है जिसकी वजह से समस्याएं हो रही हैं. चीन अपने देश की सीमा की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और भारत के साथ हर तरह के मुद्दों को बातचीत के ज़रिए सुलझाने के लिए तैयार हैं.


चीन के विदेश मंत्री फ्रांस के दौरे पर हैं और फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस में अपने भाषण के दौरान उन्होंने यह दावा किया. वांग यी ने यह भी कहा कि चीन इकलौता देश है जिसके साथ सबसे ज्यादा देशों की सीमाएं जुड़ती हैं.

मगर पड़ोसी देशों के इतिहास में हुए फेरबदल के चलते हमेशा तरह-तरह की समस्याएं पैदा हुई. चीन पड़ोसी देशों के साथ उन सभी मुद्दों को सुलझाना चाहता है जो इतिहास में अधूरे रह गए थे. चीनी विदेश मंत्री संभवतः 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे की और इशारा कर रहे थे और मौजूदा सीमा विवाद को इसी की उपज बता रहे थे.

हालांकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पूर्वोत्तर के राज्यों में लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी है. चीन पर बार-बार अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ के आरोप लगते रहे हैं.

इस बीच चीन की वेस्टर्न कमांड ने उलटा भारत पर आरोप लगाया है कि भारतीय सैनिकों ने एक बार फिर अवैध तरीक़े से पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी इलाक़े में एलएसी को पार किया. चीन से इसे एक भड़काऊ कार्रवाई के साथ-साथ क़रार को तोड़ने वाला क़दम बताया है.

यह भी कहा है कि इस तरह की गतिविधि से भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता में कमी आएगी. इससे पहले सोमवार को चीनी विदेश मंत्री ने कहा था कि चीनी सैनिकों ने हमेशा सख़्ती से एलएसी के नियमों का पालन किया है और कभी भी एलएसी को पार नहीं किया. दोनों देशों के सैन्य अधिकारी सीमाई विवाद पर एक दूसरे से बातचीत कर रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेता कई बार मिल चुके हैं और महत्वपूर्ण नतीजे पर पहुंचे हैं. दोनों पक्ष इसपर राज़ी हैं कि द्वीपक्षीय सहयोग से मतभेदों को दरकिनार करते हुए आपसी हितों पर गौर किया जाना चाहिए. मतभेदों को ढंग से संभाला जा सकता है. इतना तो किया ही जा सकता है कि मतभेद बढे नहीं और संघर्ष में न बदलें.

चीनी विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि चीन और भारत विकासशील देश हैं और दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों के हितों और वैध अधिकारों की रक्षा मिलकर करनी चाहिए. इसके अलावा उभरती हुई अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक जगह तैयार करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि अगर भारत और चीन विकसित हो जाएं तो इन दोनों में रहने वाली दो अरब 70 करोड़ से ज़्यादा की आबादी एक साथ आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ेगी जो इंसान की तरक्की के सफ़र में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

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