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चीन, विपक्ष और विवाद: सैन्य स्तर की आज दसवें दौर की बैठक

by GoNews Desk 1 month ago Views 4246

माना जा रहा है कि भारत इस बैठक में फिंगर इलाके में पहले की ही तरह गश्त जारी रखने पर ज़ोर देगा...

Tenth round of military level meeting in India-Chi
भारत और चीन के बीच शनिवार यानि आज दसवें दौर की बैठक बुलाई गई है। यह उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता तब बुलाई गई है जब पैंगोग त्सो और उसके दक्षिणी किनारों से सेना और हथियार हटा लिए गए हैं। इस बैठक में हॉट स्प्रिंग्स, देपसांग और गोग्रा जैसे इलाकों में तैनात सैनिकों को हटाने पर बात होगी। माना जा रहा है कि भारत इस बैठक में फिंगर इलाके में पहले की ही तरह गश्त जारी रखने पर ज़ोर देगा। 

हाल ही संसद में दिए अपने बयान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, ‘चीन अपनी सेना की टुकड़ियों को हटा कर पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे में फिंगर आठ इलाके के ईस्ट में ले जाएगा। भारत अपनी सैन्य टुकड़ियों को फिंगर तीन के पास अपने स्थायी ठिकाने धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा। आगे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि इसी तरह की कार्रवाई दक्षिणी किनारे वाले क्षेत्र में भी दोनों पक्ष करेंगे।’


दोनों देशों के बीच वरिष्ठ कमांडरों की बैठक की बात भी रक्षा मंत्री ने संसद को बताई थी। उन्होंने कहा था कि पैंगोग और उसके आसपास के इलाकों से सैनिक हटा लेने के 48 घंटे के भीतर दोनों देशों में वरिष्ठ कमांडर स्तर की बात होगी। उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी थी कि हॉट स्प्रिंग्स, देपसांग और गोग्रा में तैनात चीनी सैनिक और अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। 

इस बीच चीन ने भी आधिकारिक तौर पर माना है कि भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में उसके भी पांच सैनिक मारे गए थे। गलवान घाटी में जून 2020 में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की भी मौत हुई थी। चीन ने इसको लेकर एक वीडियो क्लिप भी जारी किया है जिसमें देखा जा सकता है भारी संख्या में चीनी सैनिक इकट्ठा हो रखे हैं और उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संसद में यह बता चुके हैं कि लद्दाख में 38000 स्क्वायर किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीन ने क़ब्ज़ा कर लिया है। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया था कि 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर पाकिस्तान का भी क़ब्ज़ा है। उधर चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पूर्वी क्षेत्र में लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर दावा किया है।

अब इसको लेकर मोदी सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर है। गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भी मोदी सरकार ने यह नहीं क़बूला था कि चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में घुस आए हैं। ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में कहा था कि ‘न कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।’ यही वजह रही कि चीन को भारत की तरफ सख्ती दिखाने का मौका मिला। 

गलवान में सैन्य हिंसा के बाद चीन ने अपने बयान में भारत को ज़िम्मेदार ठहराया था और कहा था कि घाटी में जो कुछ भी हुआ वो भारत के ‘उकसावे’ की वजह से हुआ। इतना ही नहीं मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने भी चीन को दुष्प्रचार का भरपूर मौका दिया।

हाल ही में वीके सिंह ने अपने एक बयान में यह तक कह दिया कि ‘जितनी बार चीन ने भारतीय क्षेत्र में नियंत्रण रेखा लांघी है उससे कई गुणा ज्यादा भारत ने चीनी क्षेत्र में ऐसा किया है।’ ये तमाम बातें इस बात का तस्दीक़ है कि जितनी बहादुरी से हमारे जवानों ने सीमा पर अपनी मौजूदगी दिखाई, उतनी बुद्धिमत्ता से मोदी सरकार ने चीन से लड़ाई नहीं लड़ी। 

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