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चीन ने बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़ का प्रसारण क्यों बैन किया ?

by M. Nuruddin 2 months ago Views 1738

चीन के ब्रॉडकास्टिंग रेगुलेटर ने बीबीसी पर नियमों के उल्लंघन और फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगाया है...

China bans BBC World News from broadcasting, Says
चीन ने वीगर मुसलमानों की हालत को लेकर दिखायी गयी रिपोर्ट की वजह से बीबीसी वर्ल्ड न्यू़ज़ का प्रसारण देश में रोक दिया है। बीबीसी की इस रिपोर्टिंग के बाद चीन की काफी आलोचना हुई थी। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि चीन के शिनजियांग में वीगर मुस्लिमों के साथ काफ़ी बुरा व्यवहार किया जा रहा है। चीन के ब्रॉडकास्टिंग रेगुलेटर ने बीबीसी पर नियमों के उल्लंघन और फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगाया है।

चीन का यह फैसला ब्रिटेन में चीन के सरकार नियंत्रित मीडिया सीजीटीएन का प्रसारण लाइसेंस रद्द किये जाने के बाद आया है। ब्रिटेन के मीडिया नियामक का आरोप है कि सीजीटीएन का लाइसेंस अवैध रूप से चीन की स्टार चाइना मीडिया लिमिटेड के पास था, जिसका सीजीटीएन के एडिटोरियल पर कोई अधिकार नहीं है। सीजीटीएन पर ब्रिटेन ने पिछले साल भी ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।


चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीन का कहना है कि बीबीसी की कुछ रिपोर्ट्स ने पत्रकारिता में सच्चाई और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि बीबीसी एक ‘अफवाह मिल’ है जो जानबूझकर चीन पर कीचड़ उछालता है।

चीन का कहना है कि समाचार 'सत्य और निष्पक्ष’ होना चाहिए और जिस तरह से वीगर मुसलमानों को लेकर रिपोर्टिंग हुई उससे चीन के राष्ट्रीय हितों को नुकसान हुआ है। चीन का कहना है किसी भी विदेशी सैटेलाइट टीवी चैनलों को चीन की राष्ट्रीय एकता, संप्रभुता और अखंडता को ‘नुकसान पहुंचाने का अधिकार’ नहीं है।

फैसले पर बीबीसी और ब्रिटिश सरकार

चीन के इस फैसले पर बीबीसी ने निराशा जताई है। बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़ ने अपने बयान में कहा है, ‘हमें निराशा है कि चीनी अधिकारियों ने इस तरह की कार्रवाई करने का फैसला किया। बीबीसी दुनिया का सबसे भरोसेमंद अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ ब्रॉडकास्टर है। निष्पक्ष और बिना किसी डर के दुनियाभर की ख़बरों पर रिपोर्ट करता है।’

बीबीसी विश्व स्तर पर अंग्रेज़ी में और दुनियाभर में अलग-अलग कई भाषाओं में ख़बरे देता है। चीन में यह काफी हद तक प्रतिबंधित ही है। बीबीसी को चीन में सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय होटलों और कुछ ख़ास जगहों पर ही प्रसारण की इजाज़त है। इसका मतलब यह है कि ज़्यादातर लोग बीबीसी की ख़बरों से पहले से वंचित हैं।

ब्रिटिश विदेश सचिव डॉमिनिक रैब ने चीन के इस क़दम को ‘मीडिया की स्वतंत्रता के लिए अस्वीकार्य’ बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘चीन में बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़ पर प्रतिबंध लगाने का चीन का निर्णय मीडिया की स्वतंत्रता के लिए अस्वीकार्य है। चीन ने दुनिया भर में मीडिया और इंटरनेट की स्वतंत्रता पर सबसे गंभीर प्रतिबंध लगाये हैं, इस कदम से दुनिया की नज़र में चीन की प्रतिष्ठा को सिर्फ ठेस ही पहुंचेगी।’

वीगरों की दुर्दशा

बीबीसी ने फरवरी में वीगर मुसलमानों के साथ चीनी सरकार के  बर्ताव पर रिपोर्ट दी थी।रिपोर्ट में सामने आया था कि चीन के जिस शिनजियांग प्रांत में वीगरों को रखा गया है वहां महिलाओं के साथ ‘व्यवस्थित रूप से बलात्कार, यौन शोषण और अत्याचार किया जाता है। इसको लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने बीबीसी की आलोचना भी की थी और रिपोर्ट को फेक बताया था।

वीगर मुस्लिमों को लेकर लगातार हो रही रिपोर्टिंग के आधार पर ही अमेरिका ने चीन पर नरसंहार का आरोप लगाया था। चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में लाखों वीगर मुसलमानों को एक डिटेंशन कैंप में रखा हुआ है। आरोप है कि वहाँ उनके साथ काफ़ी बुरा व्यवहार किया जाता है। इसको लेकर समय-समय पर चीन की आलोचना होती रही है।

हाल ही में पत्रकारों और एनजीओ द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि चीन वीगरों के ख़िलाफ एक ‘स्वीपिंग अभियान’ चला रहा है। और इसके माध्यम से वीगर संस्कृति को ख़त्म करने की कोशिश की जा रही है।

चीन और ब्रिटेन के रिश्ते

हाल के दिनों में चीन और ब्रिटेन के बीच हॉंग-कॉंग को लेकर रिश्ते कमज़ोर हुए हैं। यहांँ एक बड़े लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के बाद चीन ने  विवादास्पद सुरक्षा क़ानून पेश किया था। इसके बाद ब्रिटेन ने चीन पर हॉंग-कॉंग के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।

पिछले महीने जनवरी में ही ब्रिटेन ने हॉंग-कॉंग के करीब 60 लाख नागरिकों को अपने देश की नागरिकता दी थी। ब्रिटेन लगातार आरोप लगाता रहा है कि चीन हॉंग-कॉंग में नागरिकों के अधिकार और स्वतंत्रता ख़त्म करने की कोशिश कर रहा है।

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