Twitter की कमान थामते ही ट्रोल हुए CEO पराग अग्रवाल; नस्लवाद पर पुराने ट्वीट की आलोचना

by GoNews Desk 6 months ago Views 1583

Parag Agrawal

ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। डॉर्सी के इस्तीफे के साथ ही नए सीईओ का भी ऐलान हो गया। जैक की जगह उनका पद अब भारतीय मूल के पराग अग्रवाल संभालेंगे। सोशल मीडिया प्रमुख ने अपनी पॉजिशन से पीछे हटते हुए कहा कि अब उनके जाने का समय आ गया है। । पराग अग्रवाल के ट्विटर का सीईओ बनते ही कई तरह की कवायदें शुरू हो गई हैं। 

दरअसल अग्रवाल के कुछ पुराने इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कहा जा रहा है कि नए सीईओ को भी लेफ्ट और राइट विंग की आलोचनाओं का सामना करना पड़ेगा जबकि कुछ आलोचकों ने कहा है कि ‘अग्रवाल ट्विटर पर भाषा की आज़ादी के लिए और बड़ खतरा साबित हो सकते हैं।’

कौन हैं पराग अग्रवाल? 

37 साल के पराग ने आईआईटी बॉम्बे से इंजिनियरिंग की और फिर अमेरिका की स्टैंडफोर्ड युनिवर्सिटी से पीएचडी कर 2011 में ट्विटर से जुड़े। सॉफ्ट इंजिनियर के रूप में ट्विटर पर काम करते करते पराग ने कंपनी में 2017 में CTO का पद पाया और सोमवार को उन्हें माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट का सीईओ चुना गया है। 

क्यों लोगों के निशाने पर पराग अग्रवाल

सीईओ चुने जाने के बाद ही दुनियाभर में पराग के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाने लगी और आखिरकार यूजर्स को उनके कुछ ऐसे बयान मिले जिसने कि अग्रवाल को दक्षिणपंथी और वामपंथ दोनों के निशाने पर ला कर खड़ा कर दिया है। 

आलोचक पराग के नवबंर, 2020 में MIT टेक्नोलॉजी रिव्यू को दिए इंटरव्यू पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसमें उन्होंने कहा था कि ‘दूसरी निजी कंपनियों की तरह ट्विटर पहले संशोधन से बाध्य नहीं है।’ यहां अग्रवाल अमेरिका के पहले संशोधन की बात कर रहे थे जिसके तहत नागरिकों को धर्म, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी दी गई है। इंटरव्यू में आगे पराग कहते हैं, “हमारा काम पहले संशोधन से बंध कर रहना नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर कम ध्यान देना और यह सोचना है कि समय बदल गया है।” 

पराग के इस बयान के अलावा साल 2010 में पराग का किया एक ट्वीट भी सोशल मीडिया की सुर्खी बना हुआ है। इस ट्वीट के सामने आने के बाद से पराग पर ‘नस्लवाद’ के आरोप लग रहे हैं। करीब 10 साल पुराने इस ट्वीट में अग्रवाल ने कहा था, “अगर वह मुस्लमानों और चरमपंथियों के बीच भेद नहीं करते हैं तो मैं व्हाइट लोगों और नस्लवादियों में फर्क क्यों करू?”

ट्विटर के नए सीईओ के बयान की  रूढ़ीवादी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Gettr’ के सीईओ Jason Miller ने सोमवार को ट्विटर पर कहा कि अग्रवाल पुराने CEO के मुकाबले बोलने की आज़ादी के लिए “ज़्यादा बड़ा खतरा” हो सकते हैं। उधर राइटविंग का समर्थन करने वालों का आरोप है कि पराग के नेतृत्व में दक्षिणपंथियों को ट्विटर पर और ज़्यादा सेंसरशिप का सामना करना पड़ेगा। 

पहले से मुसीबतों में ट्विटर

सोशल मीडिया दिग्गज ट्विटर कुछ समय से दोहरी समस्याओं का सामना कर रहा है। ट्विटर के कई यूजर्स और संभावित यूजर्स प्लेटफॉर्म को छोड़ रहे हैं। कंपनी के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वह युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने में नाकाम रही है। ट्विटर की जगह युवा फेसबुक और टिक-टॉक से जुड़ने में ज़्यादा रूचि रखते हैं। इससे उसे संभावित यूजर्स का नुकसान हो रहा है जबकि अमेरिका और भारत जैसे देशों की सरकार से मतभेद के चलते सरकार और उसकी विचारधारा के समर्थक इसके विकल्प पर स्विच कर गए हैं। इसका उदाहरण भारतीय कू और अमेरिकी Gettr ऐप है।

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा के बाद ट्विटर ने पूर्व प्रेजीडेंट डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट को स्थायी तौर पर सस्पेंड कर दिया था। अमेरिका की कैपिटल हिल में हुई हिंसा को लेकर ट्विटर और तत्काल CEO जैक डॉर्सी की दोतरफा आलोचना हुई थी। लेफ्ट के समर्थकों का कहना था कि ट्विटर को भड़काऊ और हानिकारक तत्वों को रोकने के लिए और पहले कदम उठाना चाहिए था जबकि राइट विंग का आरोप था कि प्लेटफॉर्म विपक्ष की आवाज़ को दबाने की खतरनाक कोशिश कर रहा है।

कुछ इस तरह ही भारत में भी केंद्र और ट्विटर के बीच भी फरवरी में लाए गए डिजिटल नियमों के चलते मतभेद गहरा गए थे। इसके बाद सरकार के कई समर्थकों और बड़े मंत्री ट्विटर की जगह इसके भारतीय वर्जन कू पर शिफ्ट हो गए थे। यूजर्स के ट्विटर छोड़ने के कारण उसका रेवन्यू गिर गया है। आलोचक कहते हैं कि भारत जैसे बड़े मार्केट में अपना वित्तीय फायदा बढ़ाने के लिए ट्विटर ने पराग अग्रवाल को सीईओ चुना है। 

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