कैब कंपनियों के मनमाना किराया वसूली पर लगाम, केंद्र ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

by Siddharth Chaturvedi 9 months ago Views 1555

Central issued new guidelines to curb arbitrary fa
किराये की टैक्सी मुहैया कराने वाली कैब कंपनियों को भारत सरकार की नई मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइन्स से बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन एग्रीगेटर्स के लिए नये दिशा-निर्देश जारी किये हैं जिसके वजह से ओला और उबर जैसी कंपनियों को मनमाना किराया वसूलना मुश्किल हो जायेगा। इस तरह के दिशा-निर्देश पहले बार जारी हैं।

नये दिशा निर्देश के मुताबिक  के मुताबिक, किराया निर्धारित करने का अधिकार अब राज्य सरकारों के पास होगा और उसी से कैब कंपनियों को लाइसेंस भी लेना पड़ेगा। एग्रीगेटर को बेस फेयर से 50% से अधिकार चार्ज करने की अनुमति नहीं होगी। ड्राइवर को किराये का  80 प्रतिशत मिलेगा जबकि कंपनी 20 प्रतिशत की हिस्सेदार होगी।


कैब इस्तेमाल करने वालों के लिए कैंसिलेशन फीस भी एक बड़ा मुद्दा होता है तो अब कैंसिलेशन फीस को कुल किराये का 10% किया गया है, जो राइडर और ड्राइवर दोनों के लिए 100 रुपए से अधिक नहीं होगा।

वैसे आजकल हर जगह डेटा चोरी भी एक अहम् मुद्दा बन गया है।  इसी को ध्यान में रखते हुए एग्रीगेटर्स के लिए डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने रखना जरूरी होगा।  डेटा को भारत सरकार के कानून के अनुसार सुलभ बनाना होगा लेकिन यूजर्स की सहमति के बिना इसे शेयर नहीं किया जाएगा।

कैब एग्रीगेटर्स को एक 24X7 कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा और सभी ड्राइवरों को अनिवार्य रूप से हर समय कंट्रोल रूम से जुड़ा रहना होगा।

दिशा निर्देश के मुताबिक राज्य सरकार सरकारी खजाने के लिए नोटिफिकेशन के माध्यम से कुल किराए का 2% या उससे अधिक टैक्स भी वसूल सकती है।

दरअसल, ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियाँ पीक आवर्स के दौरान किराये में कई गुना बढ़ोतरी कर देती हैं। लेकिन अब  कंपनियों के ऊपर मांग बढ़ने पर किराये बढ़ाने की एक सीमा तय कर दी गयी है। अब ये कंपनियाँ मूल किराये के डेढ़ गुने से अधिक किराया नहीं वसूल सकेंगी।

सर्ज फीस पर कैप और ड्राइवरों के लिए आरक्षित 80% किराया कैब एग्रीगेटर्स के लिए एक झटका है, जो कोरोनावायरस महामारी के बाद से रिकवरी की एक धीमी राह पर हैं।

अप्रैल और मई के लॉकडाउन महीनों के दौरान कोविड -19 महामारी के कारण कैब कंपनियों का कारोबार पूरी तरह से रुक गया था। 2019 में, उबर ने एक सप्ताह में 1 करोड़ 40 लाख राइड्स का दावा किया था, जबकि ओला ने कथित तौर पर एक सप्ताह में 2.8 करोड़ राइड्स देखी थी।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि पहले एग्रीगेटर का रेगुलेशन उपलब्ध नहीं था।  इस नियम को ग्राहकों की सुरक्षा और ड्राइवर के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जिसे सभी राज्यों में लागू किया जाएगा। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया गया है।

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