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केंद्र असफल, अब राज्य टेंडर के जरिए खरीदेंगे वैक्सीन

by GoNews Desk 1 month ago Views 1367

pm modi

कोरोना महामारी की शुरूआत में मोदी सरकार के बिना सोचे समझे लगाए गए लॉकडाउन ने केंद्र सरकार की काफी किरकरी कराई. बिना ज़रूरी इंतज़ाम के लगाई गई पाबंदी के कारण लाखों की संख्या में देशभर से मज़दूरों का पलायन हुआ. करोड़ों लोगों ने नौकरी खोई. इसके बावजूद सरकार संक्रमण को रोकने में नाकामयाब रही. अब भारत एक बार फिर कोरोना महामारी से जूझ रहा है.

इसे रोकने के लिए बनाई गई कोविड रोधी वैक्सीन की भी भारी कमी आ रही है और ऐसे माहौल में मोदी सरकार ने इस कमी से निपटने का ज़िम्मा राज्यों पर छोड़ दिया है. उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्य अब अपने स्तर पर वैक्सीन का प्रबंध करने में लगे हैं क्योंकि केंद्र सरकार उन्हें राज्यों की आबादी का टीकाकरण कराने के लिए ज़रूरी टीकों की खुराक उपलब्ध कराने में असफल साबित हो रही है. 

मुंबई की सिविक बॉडी, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई ने 12 मई को वैक्सीन की 10 मिलियन खुराक के लिए वैक्सीन उत्पादकों से बात की है. इससे 18.4 मिलियन आबादी वाली ग्रेटर मुंबई की 5 मिलियन जनता को टीको की दोनों खुराक दी जा सकेगी. उत्तर प्रदेश सरकार ने भी वैक्सीन की 40 मिलियन खुराक के लिए 7 मई को टेंडर जारी किया है. ये राज्य की 10 फीसदी आबादी को टीकों की दोनों खुराक देने के लिए काफी होगी. राज्य सरकार ने अग्रिम वैक्सीन उत्पादकों जैसे सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक, जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कंपनियों के सामने एक ग्लोबल टेंडर का हिस्सा बनने का प्रस्ताव रखा है.

देश के कई और राज्य जैसे दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु ने भी टीकों की खरीददारी के लिए टेंडर जारी करने की ओर इशारा किया है. रिपोर्ट बताती हैं कि कर्नाटक सरकार 20 मिलियन वैक्सीन की डोज़ ऑर्डर कर सकती है जबकि राजस्थान सरकार 10 से 40 मिलियन खुराक खरीद सकती है. 

सरकारों ने टीकों के लिए अलग अलग मापदंड भी रखें हैं. MCGM ने कंपनियों से 18 मई तक अपनी बिड पेश करने के लिए कहा है. इसके अलावा उसका कहना है कि टेंडर में ऐसे देशों की कंपनियां भाग नहीं ले सकती जिनकी सीमा भारत से लगती है. यूपी सरकार ने बिड पेश करने की सीमा 21 मई तय की है. भारत में अभी सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की बनाई वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन से टीकाकरण किया जा रहा है. हाल ही में रूस की स्पूतनिक 5 का इस्तेमाल शुरू हुआ है जबकि भारत जल्दी ही मॉर्डर्ना और सिनोफार्म जैसी कंपनियों की वैक्सीन को भी मंज़ूरी दे सकता है.

मशहूर जनरल द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार एस्ट्राजेनेका की एक वैक्सीन की कीमत 5 डॉलर है, भारत बायोटेक की वैक्सीन की कीमत 6 डॉलर जबकि मॉर्डर्ना और सिनोफार्म की बनाई वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 31 डॉलर और 62 डॉलर है. वैक्सीन की महंगी कीमत राज्यों के लिए इन्हें खरीदने में परेशानी का सबब बन सकती है. राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से कोई अतिरिक्त मदद न मिलने के कारण उन्हें दूसरे क्षेत्रों के फंड वैक्सीन खरीदने के लिए इस्तेमाल करने पड़ सकते हैं.

दिल्ली सरकार ने आम आदमी मुफ्त कोविड वैक्सीन योजना के लिए 50 करोड़ रूपये जारी किए हैं जबकि राजस्थान सरकार ने एमएलए लोकल एरिया फंड से 3 करोड़ रूपये टीकाकरण करने के लिए लेने का फैसला लिया है. इसके अलावा दूसरे विकास कार्यों के फंड को भी इस काम के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. वैक्सीन की महंगी कीमत से जूझ रही राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार से वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने की अपील की है. वहीं बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों ने केंद्र से वैक्सीन से जीएसटी जैसे शुल्क हटाने की मांग भी रखी है.
 

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