26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली पर रोक लगे वरना शर्मिंदा होगा देश: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र की गुहार

by GoNews Desk 1 year ago Views 1976

Center moves Supreme Court to stop the January 26
किसानों के प्रस्तावित 26 जनवरी के ट्रैक्टर रैली को रोकने के लिए केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है। आंदोलन मामले में दायर हलफनामे में केन्द्र ने किसानों के प्रस्तावित 26 जनवरी के ट्रैक्टर रैली को रोकने की मांग की है। केन्द्र ने कहा कि गणतंत्र दिवस के मौके पर इस तरह के विरोध-प्रदर्शनों से आयोजन और समारोह बाधित होंगे।

केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सुरक्षा एजेंसियों से जानकारी मिली है कि ‘विरोध करने वाले लोगों और संगठनों के एक छोटे समूंह ने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर मार्च निकालने की योजना बनाई है।’ केन्द्र के हलफनामे में कहा गया है कि प्रस्तावित मार्च गणतंत्र दिवस के उत्सवों में बाधा डालने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इससे बड़े पैमाने पर क़ानून-व्यवस्था की स्थित बिगड़ने का ख़तरा है।


केन्द्र ने यह भी कहा कि प्रस्तावित मार्च राष्ट्र के लिए शर्मिंदगी का विषय है। केन्द्र का कहना है कि विरोध करने का अधिकार हमेशा ‘सार्वजनिक व्यवस्था और सार्वजनिक हित का मुकाबला करने’ के अधीन होता है और विरोध करने का अधिकार कभी भी ‘राष्ट्र की छवि को विश्व स्तर पर धुमिल’ नहीं कर सकता।

केन्द्र ने यह भी कहा है कि, ‘हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह का अपना संवैधानिक और साथ ही एक ऐतिहासिक महत्व है। अकेली 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह का मसला नहीं है बल्कि 23 जनवरी को अभ्यास भी होते हैं। गणतंत्र दिवस समारोह के जिक्र के साथ केन्द्र ने कहा कि ऐसे विरोध प्रदर्शन न सिर्फ क़ानून व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और सार्वजनिक हित के ख़िलाफ होगी बल्कि इससे राष्ट्र की शर्मिंदगी भी होगी।’

केन्द्र ने कोर्ट से किसानों के ट्रैक्टर मार्च, ट्रॉली मार्च, व्हीकल मार्च या किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शनों को रोकने की मांग की। इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन और कृषि क़ानून को लेकर केन्द्र को फटकार लगाई और क़ानून स्थगित करने का सुझाव दिया। सीजेआई ने सख़्ती से कहा कि अगर केन्द्र क़ानून पर रोक नहीं लगाता है तो कोर्ट इस पर रोक लगा देगा। अदालत ने कहा कि एक इस मामले में बातचीत के लिए किसी पूर्व चीफ़ जस्टिस की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार यानि आज इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगा।

क़ानून को लेकर केन्द्र और किसानों के बीच आठ दौर में बातचीत हो चुकी है लेकिन मसले का कोई हल नहीं निकल सका। केन्द्र ने किसानों के साथ आख़िरी बातचीत 7 जनवरी को की थी। अगली बैठक 15 जनवरी को होगी। सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से नाराज़गी जताई और साफ किया कि मोदी सरकार जिस तरह से कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ जारी आंदोलन से पेश आयी है, उससे देश की सर्वोच्च अदालत ख़ासी निराश है। वहीं कोर्ट ने किसानों से पूछा कि अगर क़ानून स्थगित हो जाता है तो क्या वे अपना आंदोलन ख़त्म करेंगे ?

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