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लॉकडाउन की आहट, कैश पर निर्भरता बढ़ी

by GoNews Desk 1 week ago Views 2010

currency in circulation

कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन की  आहट ने लोगों की कैश पर निर्भरता बढ़ा दी है. नए वित्त वर्ष 2022 में भी सर्कुलेशन में आ रही करेंसी में बढ़ोतरी जारी है. आंकड़ों के अनुसार लोगों ने अप्रैल 2021 के शुरूआती चार हफ्तों में ही 57,800 करोड़ रूपयों की निकासी की है. 

ये वह समय है जब भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दी थी. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार 23 अप्रैल 2021 तक लोगों के पास करेंसी यानि करेंसी विद पब्लिक बढ़ कर 29,07,067 करोड़ रूपये हो गई है. ये पिछले हफ्ते से 7,352 करोड़ रूपये अधिक है वहीं मार्च की 26 तारीख तक ये राशि 28,58,547 करोड़ रूपये थी.

आंकड़े बतातें हैं कि लोग अपने पास नकदी इकट्ठा कर रहे हैं जबकि डिजिटल ट्रांजेक्शन में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है. यूपीआई के जरिए मार्च के महीने में पांच लाख करोड़ के 2.3 बिलियन ट्रांजेक्शन किए गए हैं. लॉकडाउन हटाए जाने के बाद से डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में भी बढ़ोतरी देखी गई है. बैंक विशेषज्ञों की मानें तो ये लॉकडाउन का डर है जिसके कारण लोग भारी मात्रा में अपने पास नकदी जमा कर रहे हैं जबकि लोगों के पास इन्हें खर्च करने के रास्ते बहुत कम हैं.

एटीएम ऑपरेटर के अनुसार लोग एटीएम से निकाली गई राशि वापस जमा नहीं कर रहे हैं जिसके कारण नकदी की जमाखोरी हो रही है. ऑपरेटर्स के मुताबिक एटीएम ट्रांसेक्शन कम है लेकिन लोग बड़ी संख्या में बैंकों से नकदी की निकासी कर रहे हैं. महामारी से पहले लोग औसतन 4,000 रूपये निकाल रहे थे जो अब बढ़ कर 4,500 रूपये हो गया है. बैंकर्स का मानना है कि अगर सरकार कोई कैश-ट्रांस्फर स्कीम लाती है तो करेंसी इन सर्कुलेशन में और वृद्धि देखी जा सकती है. 

केंद्र सरकार की लाई गई जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए खातों के अधिकतर खाताधारकों के पास हालांकि डेबिट कार्ड है लेकिन फिर भी पिछले साल के रूझान बतातें हैं कि ज़्यादातर खाताधारक तत्काल रूप से अपने अकाउंट से फंड निकाल लेने के पक्ष में थे.

पिछले साल जब केंद्र सरकार ने 24 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन का एलान किया था तब भी करेंसी विद पब्लिक में इज़ाफा दर्ज किया गया था. मार्च 2020 से लेकर जून 2020 तक नागरिकों के पास करेंसी में 3.07 लाख करोड़ की बढ़ोतरी देखी गई थी. 28 फरवरी तक 22.55 लाख करोड़ रूपये थी जबकि 19 जून 2020 तक ये बढ़ कर 25.62 लाख करोड़ रूपये हो गई थी.
 

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