CAA Protest: 'वसूली वापस करो' सुप्रीम कोर्ट का योगी सरकार को आदेश !

by M. Nuruddin 4 months ago Views 1620

CAA Protest: Supreme Court's order to return the a
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा सीएए प्रदर्शनकारियों से करोड़ों रूपये की गई रिकवरी को उन्हें वापस करने का आदेश दिया है। कोर्ट का यह फैसला तब आया है जब योगी सरकार ने कोर्ट में बताया कि उसने जारी किए गए 274 रिकवरी नोटिस को वापस ले लिया है।

कोर्ट ने कहा कि “अगर कुर्की क़ानून के ख़िलाफ़ की गई है और आदेश वापस ले लिए गए हैं, तो कुर्की को कैसे चलने दिया जा सकता है।” यूपी सरकार ने दिसंबर 2019 में राज्य में सीएए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के बाद प्रदर्शनकारियों को रिकवरी का नोटिस भेज दिया था और कथित रूप से करोड़ रूपये रिकवर किए थे।


हालांकि उत्तर प्रदेश की तरफ से पेश एडवोकेट जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से रिफंड का आदेश पारित नहीं करने का आग्रह किया। एडवोकेट जनरल का कहना था कि अगर कोर्ट इस तरह के आदेश जारी करता है तो “यह दिखाएगा कि प्रशासन द्वारा की गई पूरी प्रक्रिया अवैध थी।”

11 फरवरी को, टॉप कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को जारी किए गए वसूली नोटिस पर कार्रवाई करने के लिए यूपी सरकार की खिंचाई की थी और उसे नोटिस वापस लेने का एक आख़िरी मौका दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर सरकार अपना नोटिस वापस नहीं लेती है तो क़ानून के उल्लंघन को लेकर कोर्ट उसके निर्णय पर रोक लगा देगा।

हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदर्शनकारियों पर ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की वसूली अधिनियम’ जो अगस्त 2020 में एक अध्यादेश द्वारा पारित किया गया था - के तहत कार्रवाई करने की छूट दी है।

जस्टिस डी.वाई. चंद्रचुड़ और जस्टिस सूर्य कांत की बेंच ने यूपी सरकार की तरफ से पेश एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद के मामले को ट्रायब्यूनल में चुनौती दिए जाने की छूट की मांग को भी मानने से इनकार किया और डायरेक्ट रिफंड के आदेश दिए।

याचिका में बताया गया था कि इस तरह के रिकवरी नोटिस उन लोगों को भी भेजा गया जिनकी पहले ही मौत हो गई थी।

कथित रूप से इस तरह के नोटिस एक 90 साल के शख़्स को भी भेजा गया था। इस मामले में परवेज़ आरिफ द्वारा कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिन्होंने उन सभी रिकवरी नोटिसों को वापस लिए जाने के आदेश जारी करने की मांग की थी जो कथित रूप से प्रदर्शनकारियों को भेजे गए थे।

सीएम योगी की बदले की भावना !

कथित प्रदर्शनकारियों की संपत्तियों को ज़ब्त करने का सरकारी आदेश 21 दिसंबर, 2019 को जारी किया गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बदले की भावना के साथ 19 दिसंबर, 2019 को कहा था कि हिंसा में शामिल लोगों को सार्वजनिक संपत्तियों के नुक़सान के लिए भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा था, ''हम उनकी संपत्तियों को कुर्क करेंगे क्योंकि वीडियो फुटेज के ज़रिए कई चेहरों की पहचान की गई है।’’

लाखों का नोटिस लेकिन अस्पष्ट !

एक अंग्रेज़ी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ 3.35 करोड़ रूपये की रिकवरी के लिए यूपी सरकार ने दस ज़िलों में 500 नोटिस जारी किए थे। यह नोटिस एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया था जिसमें लखनऊ के हज़रतगंज इलाक़े में 46 नोटिसें भेजी गई थी और प्रत्येक को एक समान 64.37 लाख रूपये की रिकवरी नोटिस भेजी गई।

सड़कों और वाहनों को हुए नुक़सान की भरपाई; चार सरकारी बसों को हुए नुक़सान के लिए 8,80,000 रुपये, एक निजी कार के लिए 10,00,000 रुपये; और सरकारी अधिकारियों की तीन निजी मोटरसाइकिलों के लिए प्रत्येक के लिए 98,000 रुपये की वसूली नोटिस भेजी गई। हालांकि यह किस आधार पर तैयार किया गया था नोटिस में इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम को नुकसान के संबंध में सभी 46 को आईपीसी की धारा 146 (दंगा), 186 (एक सार्वजनिक अधिकारी को बाधित करना), 152 (आपराधिक बल का इस्तेमाल करना और सार्वजनिक अधिकारियों को अपना काम करने देने से रोकना) और सीआरपीसी धारा 144 के तहत लगाए गए कर्फ्यू को तोड़ने के साथ-साथ रोकथाम के प्रावधानों के तहत भी दर्ज किया गया था।

“Name And Shame” होर्डिंग !

इतना ही नहीं यूपी सरकार ने राज्य की राजधानी लखनऊ में “Name And Shame” होर्डिंग भी लगा दिया था जिसमें कथित रूप से प्रदर्शनकारियों की तस्वीर और उनका पता छाप दिया था। कथित रूप से यूपी सरकार के होर्डिंग में 50 लोगों के नाम, उनकी तस्वीर और उनका पता छापा था जिसकी बड़े स्तर पर आलोचना भी हुई थी।

इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस गोविंद माथुर ने स्वत: संज्ञान लिया था और 9 मार्च के अपने आदेश में कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के पक्ष में ‘निजता के अधिकार’ के तहत यूपी सरकार को होर्डिंग हटाने के आदेश दिए थे।

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