Budget Challenge: कच्चे तेल के दाम बढ़े लेकिन पेट्रोल-डीज़ल की कीमत सामान्य !

by M. Nuruddin 5 months ago Views 1738

Budget 2022: Crude oil prices rise but petrol-dies
भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ेगी या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी निर्भर करता है। और कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर निर्भर करती है जो बाधित हो रही है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की आशंकाओं से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें सात साल के अपने उच्चतम स्तर पर है, जिसके आने वाले समय में और भी बढ़ने की आशंका है।

आम बजट और पांच राज्यों के चुनाव से पहले अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आए इस उछाल का भारतीय रिटेल बाज़ार पर असर नहीं पड़ेगा लेकिन इससे सरकारी ख़ज़ाने पर बोझ ज़रूर बढ़ सकता है। साथ ही यह भी आशंका है कि बजट और चुनाव के बाद उगाही के लिए सरकार इसकी कीमतें फिर से बढ़ा सकती है।


अंतरराष्ट्रीय ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड बेंचमार्क 2014 के बाद से पहली बार बुधवार को 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पर पहुंच गया। अक्टूबर 2014 में क्रूड ऑयल की कीमतें 86.08 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई थी जिसमें अब 2 फीसदी का उछाल देखा गया है। ख़बर लिखे जाने तक कच्चा तेल 89.30 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

अब ग़ौर करने वाली बात यह है कि 31 जनवरी से संसद का बजट सत्र शुरु हो रहा है और 1 फरवरी को आम बजट पेश होना है।

तेल मंत्रालय के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2021 में 9 महीने (अप्रैल-दिसंबर) में भारत ने 82.4 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जो 2020-21 में समान अवधि में 39.6 अरब डॉलर के मुक़ाबले 108 फीसदी ज़्यादा है। हालांकि समान अवधि में वॉल्यूम के हिसाब से (156 mt) सिर्फ 9 फीसदी ज़्यादा कच्चा तेल भारत ने आयात किया लेकिन उसके लिए ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ी।

भारत अपने कच्चे तेल की ज़रूरतों का 80 फीसदी से ज़्यादा आयात करता है, जो चालू वित्त वर्ष (2021-22) में मार्च महीने तक 100 अरब डॉलर को पार कर सकता है। पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में भारत का कच्चे तेल का कुल आयात बिल 62.2 अरब डॉलर रहा था, जिसके लागत के हिसाब से अब लगभग दोगुना होने की संभावना है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद दिल्ली में पेट्रोल 95.41 रूपये और डीज़ल 86.67 रूपये प्रति लीटर बिक रहा है।

हालांकि अक्टूबर महीने में देश में पेट्रोल के दाम करीब 110 रूपये प्रति लीटर और डीज़ल के दाम 100 रूपये प्रति लीटर पर पहुंच गए थे। जबकि समान अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर 83.54 डॉलर प्रति बैरल पर था।

इसके मुक़ाबले अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीज़ल की कीमत सामान्य बनी हुई है, जो यह ज़ाहिर करता है कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमत सरकार के हाथों में होती है और यह सरकार के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी के बराबर है।

मसलन Gonewsindia ने आपके सामने ऐसी कई रिपोर्ट पेश किए हैं जिसमें यह बात ज़ाहिर होता है। महामारी (2020-21) में केन्द्र सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी से पूर्व महामारी के मुक़ाबले 108 फीसदी ज़्यादा की कमाई की थी।

वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार की पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी से होने वाली कमाई 1.78 लाख करोड़ रूपये (2019-20) के मुक़ाबले 3.34 लाख करोड़ रूपये (2020-21) हो गई।

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