BSP 'बीजेपी की बी-टीम' मुस्लिम मतदाताओं पर दांव खेल सपा गठबंधन का खेल बिगाड़ रही है ?

by M. Nuruddin 4 months ago Views 2121

देखने वाली बात होगी कि उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाता परिवर्तन के लिए मतदान करते हैं या वे अपना प्रतिनिधि चुनने पर ज़्यादा ज़ोर देते हैं...

BSP 'BJP's B-team' playing bets on Muslim voters i
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अपने दिलचस्प मोड़ पर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 10 फरवरी को मतदान है। 7.12 की आबादी वाले इस क्षेत्र में विधानसभा की 144 सीटें हैं जिनपर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 26 फीसदी है। भाजपा को छोड़ बीएसपी, एसपी और कांग्रेस इन्हीं मतदाताओं को लुभाने में जुटी है।

चुनावी मैदान में एक लहर के अलावा उम्मीदवारों की जाति और धर्म भी हार जीत तय करती है। जैसा की अन्य विपक्षी दल हमेशा से बहुजन समाज पार्टी पर बीजेपी की बी-टीम होने का आरोप लगाती रही है वो इस चुनाव में साफतौर से देखा भी जा सकता है। मसलन पश्चिमी यूपी में जहां पहले चरण में मतदान होने हैं, बसपा सुप्रीमो मायावति ने 31 फीसदी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है।


बीएसपी पश्चिमी यूपी में 144 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और पार्टी ने इनमें 44 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है जो सपा-रालोद गठबंधन को नुक़सान पहुंचा सकता है। मुस्लिम उम्मीदवारों के बारे में जहां राय है कि वे बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए मतदान करते हैं, वहीं यह भी कहा जा सकता है कि मुस्लिम मतदाता अपने प्रतिनिधि की खोज में भी है। ऐसे में मुस्लिम मतदाता के बंटने की संभावना ज़्यादा है।

मसलन पश्चिमी यूपी में सपा-रालोद गठबंधन ने 24 फीसदी या 34 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं जबकि कांग्रेस की तरफ से 35 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में हैं। ग़ौरतलब है कि 28 सीटें ऐसी हैं जहां सपा-रालोद गठबंधन, बीएसपी और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने सामने हैं और सपा गठबंधन ने जातीय समीकरण को बरक़रार रखने के लिए ज़्यादातर सीटों पर जाट उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।

अगर इन सीटों पर गठबंधन को मुसलमानों के एकमुश्त वोट नहीं मिलते तो इससे बीजेपी को फायदा हो सकता है। सात चरणों में होने वाले यूपी चुनाव में शुरुआती तीन चरणों में बीएसपी ने गठबंधन और कांग्रेस को सीधे टक्कर देने की कोशिश की है।

पश्चिमी यूपी में पहले चरण में 58, दूसरे चरण में 55 और तीसरे चरण में 35 सीटों पर मतदान होने हैं। इनमें 15 सीटों पर गठबंधन और बीएसपी आमने सामने हैं जहां हार-जीत का फैसला मुस्लिम मतदाताओं के हाथों में है।

उत्तर प्रदेश में माना जाता है कि 143 सीटों पर मुस्लिम मतादातओं का दबदबा है और इनमें 60 सीटें पश्चिमी यूपी में ही हैं जहां पहले चरण में मतदान है। 9 सीटों मेरठ सदर, रामपुर सदर, संभल, मुरादाबाद ग्रामीण और कुंदरकी, अमरोहा नगर, हापुड़ के धौलाना, सहारनपुर की बेहटा और देहात ऐसी सीटें हैं जहां मुस्लिम मतादाता 55 फीसदी हैं। इनके अलावा आठ अन्य सीटें हैं जहां 30-50 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं।

2017 में हालात यह थे सभी जातियों की बेड़ियां टूट गई और जाट, कुर्मी-कोरी, अन्य ओबीसी, और अन्य दलित ने भारी संख्या में भाजपा के समर्थन में मतदान किया। बसपा के मतदाताओं ने 2012 के मुक़ाबले 2017 में बीजेपी को समर्थन दिया जहां पार्टी का ब्राम्हण वोट 42 फीसदी से 80 फीसदी पर पहुंच गया।

ख़ास बात यह है कि पिछले चुनाव में एसपी, बीएसपी और कांग्रेस ने महा-गठबंधन में चुनाव लड़ा जिससे बीजेपी के लिए वोटों का ध्रुविकरण आसान हो गया और पार्टी को अंत में 300 से ज़्यादा सीटें मिल गई। तब सपा को 45 फीसदी मुस्लिम मतादाताओं ने मतदान किया और कांग्रेस और बसपा को 19-19 फीसदी मुस्लिम वोट मिले।

2017 के चुनाव में बीजेपी की लहर की वजह से सिर्फ 35 मुस्लिम उम्मीदवारों को ही जीत मिली। इससे पहले 1993 में 28, 1996 में 38, 2002 में 46, 2007 में 56 और 2012 में 68 मुस्लिम उम्मीदवार जीते थे। अब देखने वाली बात होगी कि उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाता परिवर्तन के लिए मतदान करते हैं या वे अपना प्रतिनिधि चुनने पर ज़्यादा ज़ोर देते हैं।

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