उत्तर प्रदेश में बीजेपी का ट्रंप कार्ड योगी नहीं; फिर क्या है ?

by GoNews Desk Edited by M. Nuruddin 5 months ago Views 1653

आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 2.25 करोड़ भूमिहीन किसानों के बीच अबतक 5,150 करोड़ रूपये बांटे गए हैं...

BJP's trump card in Uttar Pradesh is not Yogi; The
भारत का आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश आकार में ब्राज़ील के बराबर है। राज्य की जीएसडीपी पेरू के और प्रति व्यक्ति आय के मामले में राज्य बुर्किना फासो के बराबर है। जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं सियासी घमासान अपने चरम पर पहुंच गए हैं। सरकार और राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा उन परियोजनाओं का वादा कर रही है जो अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में घोषित प्रोत्साहन राशी से भी बड़ी है।

अबतक प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी राज्य की 22 करोड़ आबादी के लिए 150,000 करोड़ रूपये की परियोजनाओं का ऐलान कर चुके हैं। हालांकि राज्य में 14.5 करोड़ मतदाता हैं। यह कोई रहस्य नहीं है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार या सरकारी सेवाओं जैसे सभी मानकों पर उत्तर प्रदेश निम्नतम स्तर पर है।


पिछले कुछ हफ्तों के रिकॉर्ड देखें तो पता चलता है कि केन्द्र और राज्य सरकारें राज्य और उसके मुख्यमंत्री की छवि चमकाने के लिए टेलिविज़न, रेडियो, ऑनलाइन पोर्टल, अख़बारों और आउटसाइड विज्ञापनों के लिए बड़े स्तर पर टाइम स्लॉट और स्पेस ख़रीदे जा रहे हैं। हालांकि यह साफ नहीं है कि इसके लिए सरकारी ख़ज़ाने से भुगतान हो रहे हैं या पार्टी फंड से ख़र्च हो रहे हैं।

दर्जनों न्यूज़ चैनल हैं जो अब विज्ञापन के अलावा पेड प्रोग्रामिंग भी कर रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखा गया। समाजवादी पार्टी के नेता अख़िलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावति ने मीडिया के पक्षपाती कवरेज़ को लेकर सवाल भी उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी मीडियाकर्मियों को फटकार लगाते देखा गया जिसमें उन्होंने साफ तौर पर मीडियाकर्मी को “दलाली नहीं करने की सलाह दे दी।”

हालांकि ग़ौर करने वाली बात यह है कि मीडिया की वजह से यूपी में वोट नहीं बटोरा जा सकता है, जहां बिहार और ओडिशा को छोड़ दें तो टीवी और ब्रॉडबैंड की पहुंच भारत में सबसे कम है। बीजेपी की मुख्य उम्मीद यह है कि किसानों को बांटे गए पैसे से पार्टी को जनता की सहानुभूति मिलेगी और अगर आप राज्य की दयनीय हालत को देखें तो यह एक उचित धारना है।

वित्त वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय आईएमएफ के मुताबिक़ 41,023 रूपये या 550 डॉलर दर्ज की गई थी जो चार साल की तुलना में सबसे कम है, जो दक्षिण अफ्रीकी देश बुर्किना फासो की प्रति व्यक्ति आय 642 डॉलर की तुलना में थोड़ कम और अफ़ग़ानिस्तान की 538 डॉलर की तुलना में थोड़ा बेहतर है।

दूसरे शब्दों में उत्तर प्रदेश का हर नागरिक हर महीने 3,418.58 रूपये कमाता है। ऐसे में केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना PMKSNY की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक़ पिछले सप्ताह पीएम किसान सम्मान निधी की आठवीं किस्त की घोषणा की गई है। आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 2.25 करोड़ भूमिहीन किसानों के बीच अबतक 5,150 करोड़ रूपये बांटे गए हैं।

इसलिए आर्थिक मंदी और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के समय में प्रत्येक भूमिहीन किसान को 2,288 रुपये, एक राजा की फिरौती के रूप में मिले। केन्द्र की इस योजना के तहत भूमिहीन किसानों को सालाना 6000 रूपये डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर किए जाते हैं जो उनकी वार्षिक औसत आय का 15 फीसदी है।

ऐसा राज्य जहां कुल मतदाताओं की संख्या 14.52 करोड़ है, उनमें 14.5 फीसदी मतदाताओं तक सरकार ने अपनी पहुंच बना ली है। यही नहीं बल्कि सरकार के पास पंचायत दर पंचायत उनका डेटा भी इकट्ठा कर लिया है। इससे यह समझा जाना चाहिए कि बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण मतदाताओं तक अपनी पहुंच बना ली है।

सांप्रदायिक आक्रोश, चुनावी बयानबाजी, जाति और समुदाय का विभाजन, और यहां तक ​​कि सीएम योगी की करोड़ों की छवि निर्माण मतादाताओं को आकर्षित करने का काम कर सकती है।

ताज़ा वीडियो