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बिहार चुनाव: पप्पू यादव और उपेंद्र कुशवाहा की अगुवाई वाले मोर्चे कितने मज़बूत ?

by GoNews Desk 1 month ago Views 2138

Bihar Election: How strong are the Front led by Pa
बिहार विधानसमभा चुनाव में एनडीए गठबंधन और महागठबंधन के अलावा दो अन्य गठबंधन भी मैदान में हैं। इनमें एक उपेंद्र कुशवाहा की अगुवाई वाली युनाइटेड डेमोक्रेटिक सेक्युलर अलायंस (यू़डीएसए) और पप्पू यादव की अगुवाई वाली प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) शामिल है।

उपेंद्र कुशवाहा की अगुवाई में बनी युनाइटेड डेमोक्रेटिक सेक्युलर अलायंस ने पूरे 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इस ग्रांड गठबंधन में छह दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, असददुद्दीन ओवैसी की एआइएमआइएम, मायावती की बहुजन समाज पार्टी, देवेंद्र प्रसाद यादव की पार्टी समाजवादी जनता दल (डेमोक्रेटिक) और जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) शामिल हैं।

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इनके अलावा प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस में पप्पू यादव की जनअधिकार पार्टी, चन्द्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी,  एमके फैज़ी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी और वीएल मातंग की बहुजन मुक्ति पार्टी शामिल है। पीडीए ने पप्पू यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है। उन्होंने सीएम नीतीश कुमार पर कोरोना महामारी से ठीक ढंग से नहीं निपटने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘नीतीश’ को सेवा करने की बजाय सत्ता की लत लग गई है।

हालांकि ये नए मोर्चे उन नेताओं द्वारा बनाए गए हैं जो महागठबंधन या एनडीए गठबंधन के साथ सीट बंटवारे से सहमत नहीं हुए। मसलन आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में राजद से 30 सीटों की मांग की थी जबकि सुत्र बताते हैं कि उन्हें पांच सीटें ऑफर की गई थी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा सीट बंटवारे को लेकर भाजपा के साथ भी बातचीत की कोशिश में थे। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने यहां तक कहा कि उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा से आठ सीटें मांगे थे।

इसी तरह जनअधिकारी पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन तेजस्वी यादव के इनकार के बाद उन्हें अपना एक गठबंधन मोर्चा बनाना पड़ा। हालांकि, जानकार मानते हैं कि बिहार का यादव समाज तेजस्वी यादव के विकल्प के रूप में पप्पू यादव को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इसी तरह उपेंद्र कुशवाहा के बारे में माना जाता है कि कुशवाहा समाज उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार के विकल्प के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते।

जानकार बताते हैं कि कोई भी तीसरा मोर्चा चुनाव तक ही सीमित होता है और यह मोर्चा भी ख़त्म हो जाएगा। अगर देखा जाए तो पीडीए के सीएम उम्मीदवार पप्पू यादव की पार्टी को पिछले चुनाव में महज़ 1.35 फीसदी वोट मिले थे। जबकि यू़डीएसए के सीएम उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 2.6 फीसदी वोट मिले थे। हालांकि तब उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

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