बिहार चुनाव: चिराग के आरोपों पर भाजपा चुप, नीतीश कुमार की उलझनें बढ़ी

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1569

Bihar election: BJP silent on Chirag's allegations
बिहार चुनाव में जदयू और लोजपा की आमने-सामने की लड़ाई ने भाजपा की उलझनें बढ़ा दी है। दोनों दलों के बीच घमासान इतना बढ़ गया है कि अब भाजपा को खतरा महसूस होने लगा है। इसको देखते हुए अब भारतीय जनता पार्टी ने लोजपा पर आरजेडी के साथ आंतरिक गठबंधन का आरोप लगाया है। भाजपा मान रही है कि चिराग के सीएम नीतीश कुमार पर हमलावर होने से एनडीए गठबंधन और भाजपा को नुकसान हो सकता है।

बिहार बीजेपी के कद्दावर नेता गिरिराज सिंह ने हाल में ट्वीट कर ये बताने की कोशिश की तेजस्वी यादव और चिराग पासवान की आपस में सांठगांठ है। इतना ही नहीं भाजपा ने किसी भी ‘संदेह’ को दूर करने के लिए राज्यभर में एनडीए की को-ऑर्डिनेशन कमेटी का आयोजन करना शुरु कर दिया है। इसके तहत भाजपा यह साफ करने की कोशिश में है कि उनके और लोजपा के बीच में कोई समझौता नहीं है और नीतीश कुमार ही एनडीए गठबंधन के चेहरा हैं।


माना जा रहा है कि राज्य में नीतीश विरोधी लहर है और ऐसे में भाजपा किसी भी संभावना से खुद को दूर रखने की कोशिश में है। इसी के चलते अब बीजेपी लोजपा पर सख्ती दिखा रही है। यहां तक कि भाजपा ने चिराग को प्रघानमंत्री मोदी की तस्वीरें इस्तेमाल न करने की भी चेतावनी दी है। भाजपा सरकार में मंत्री प्रकाश जावड़ेकर लोजपा को ‘वोट कटवा’ पार्टी तक क़रार दिया है।

चुनाव में एनडीए के साथ सीट बँटवारे के विवाद के बाद लोजपा ने गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान का कहना है कि उनकी लड़ाई बीजेपी से नहीं है बल्कि जनता दल यूनाइटेड से है। चिराग पासवान खुलेआम नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। वो खुद को प्रधानमंत्री मोदी का हनुमान बता चुके हैं और भाजपा के करीबी होने का लगातार दावा कर रहे हैं। चिराग यहां तक कह रहे हैं कि उनके सभी विधायक राज्य में भाजपा-लोजपा की सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

हालांकि इससे नीतीश की परेशानी बढ़ गई है और वो केन्द्र में लोजपा को गठबंधन से अलग करने का भी दबाव बना रहे हैं। रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट को लेकर भी जदयू का कहना है कि अब वह लोजपा को न दी जाए। ऐसे में लोजपा एनडीए गठबंधन से पूरी तरह बाहर हो जाएगी। जबकि भाजपा इस पूरे चुनाव को राज्य तक ही सीमित रखना चाहती है और नतीजे आने के बाद ही वो आगे की रणनीति तय करेगी।

दरअसल चिराग पासवान का संकल्प है कि वो राज्य में इस बार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनने देंगे। दूसरी तरफ यह भी माना जा रहा है कि खुद भाजपा ‘दलितों की पार्टी’ लोजपा को एनडीए गठबंधन से अलग नहीं करना चाहती। ऐसे में पार्टी के दलित वोट बैंक के नुकसान की आशंका है। कहा जा रहा है कि रामविलास पासवान के निधन के बाद लोजपा के पास अभी दलित सहानुभुती है जिसे भाजपा खोना नहीं चाहती। ऐसे में भाजपा, जदयू के दबाव में लोजपा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती।

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