कोविड वैक्सीन से पेटेंट हटाने का बाईडन प्रशासन ने किया समर्थन

by GoNews Desk 1 year ago Views 14365

patent to be removed on vaccine

बाईडन प्रशासन ने बुधवार को कोविड वैक्सीन से पेटेंट को हटाने की मांग का समर्थन किया है. इससे कोविड रोधी टीकों के लिए परेशानी का सामना कर रहे पिछड़े देशों में एक उम्मीद की किरण जगी है. युनाइटेड स्टेट्स ट्रेड की रिप्रेजेंटेटिव केथरीन ताई ने बुधवार को एक बयान में कहा कि बाईडन-हैरिस प्रशासन कोविड वैक्सीन से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन हटाने का समर्थन करता है. बयान में कहा गया, “ये एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट है और असाधारण महामारी की स्थिति के लिए असाधारण फैसलों की ज़रूरत है. प्रशासन मज़बूत तौर पर पेटेंट में भरोसा रखता है लेकिन इस महामारी को खत्म करने के लिए कोरोना रोधी वैक्सीन से प्रोटेक्शन हटाने का समर्थन भी करता है.” कैथरीन के द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वैक्सीन से पेटेंट हटाने के पीछे प्रशासन का लक्ष्य जितनी जल्दी और जितनी अधिक हो सके उतनी वैक्सीन अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है. अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी यह बयान कई नज़रियों से अहम है. वैक्सीन से पेटेंट हटाने पर मौजूदा टीकों की तुलना में और सस्ते टीकों को बाज़ार में न सिर्फ जगह मिलेगी बल्कि इससे टीकों के उत्पादन को भी रफ्तार मिलेगी. 

यहां तक कि एंटी वायरस वैक्सीन से प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन हटाने पर दुनियाभर के देशों को वैक्सीन तक पहुंच बढ़ाने को रास्ता मिलेगा. मौजूदा समय में सिर्फ वह कंपनियां जिनके पास पेटेंट है, कोरोना रोधी टीके का निर्माण कर सकती हैं हालांकि अगर पेटेंट को हटा दिया जाए तो कंपनियां टीके बनाने में प्रयोग होंने वाली रेसिपी साझा कर सकेंगी और वैक्सीन पर किसी भी तरह का एंबार्गो नहीं होगा. इसका मतलब ये हुआ कि कोई भी कंपनी जिसके पास टीके बनाने के लिए ज़रूरी तकनीक और दूसरी व्यवस्था है, वह कोविड टीके का निर्माण कर सकेगी. वैक्सीन से पेटेंट्स हटाने से कम कीमत की वैक्सीन बाज़ार में उपलब्ध होगी. साथ ही वैक्सीन की कीमत जितनी कम होगी उतने गरीब देशों की पहुंच इस तक बनेगी. 

अमेरिका के फार्मास्युटिकल रिसर्च एंड मैन्युफैक्चरर्स ट्रेड ग्रुप ने वैक्सीन से पेटेंट हटाए जाने का विरोध किया और कहा है कि बाईडन प्रशासन द्वारा लिया गया फैसला अमेरिका की महामारी पर वैश्विक प्रतिक्रिया को कमज़ोर करेगा और सुरक्षा से समझौता करेगा. ट्रेड ग्रुप जिसमें वैक्सीन निर्माता एस्ट्राजेनेका, पीफाइजर और जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कपंनी शामिल है, इसके अध्यक्ष Stephen J. Ubi  ने कहा, “इस फैसले से सार्वजनिक और निजी पार्टनर्स के बीच उलझन पैदा होगी. ये फैसला न सिर्फ टीकों की पहले से कमज़ोर उपलब्धता चेन को और कमज़ोर करेगा बल्कि इससे नकली टीकों के प्रसार को भी बढ़ावा मिलेगा.” 

अमेरिका ने भले ही अब कोरोना रोधी टीकों से पेटेंट हटाने की बात कही है लेकिन भारत समेत कई और देश यहां तक की विश्व स्वास्थ्य संगठन वैक्सीन बनाने में प्रयोग होंने वाला फार्मुले को साझा करने की मांग कर चुकें हैं. भारत और दक्षिण अफ्रीका ने पिछले साल अक्टूबर में ही WHO से कोविड वैक्सीन से पेटेंट को अस्थायी तौर पर हटाने का प्रस्ताव रखा था और एस्ट्रजेनेका की बनाई वैक्सीन का फार्मुला साझा करने की मांग की थी. WHO प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने भी मार्च महीने में कम से कम महामारी के अंत तक टीकों से प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन हटाने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि ‘अभूतपूर्व समय’ के कारण ये फैसला लिया जाना चाहिए. उन्होंने एक प्रेस ब्रिफिंग में कहा था, “ऐसे देश जिनके पास अपनी वैक्सीन बनाने की क्षमता है, उन्हें WTO के तहत स्पेशल एमरजेंसी प्रोविजंस को मानते हुए वैक्सीन से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शंस को हटाना शुरू कर देना चाहिए.”

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