2020 में दुनिया में 720 से 811 मिलियन लोग भूखे रहे: UN-FAO रिपोर्ट

by M. Nuruddin 11 months ago Views 2255

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दुनिया में खाद्य असुरक्षा का स्तर बढ़ने से वर्षों तक हुआ ग्रोथ रिवर्स मोड में आ गया है। पहले कोविड की वजह से इनकम और सप्लाई चेन बाधित हुआ। इससे पहले सामाजिक-आर्थिक परिस्थियों, प्राकृतिक ख़तरों, जलवायु परिवर्तन और अन्य कारकों से हंगर में बढ़ोत्तरी देखी जा रही थी।

अब कोविड की वजह से दुनिया में खाद्य असुरक्षा में गंभीर वृद्धि दर्ज की गई है। इस वजह से लगभह हर देश में कमज़ोर परिवार प्रभावित हुए हैं और इसका प्रभाव इस साल के साथ अगले साल तक रहने की आशंका है।


‘दि स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन इन द वर्ल्ड 2021’ शीर्षक वाली UN-FAO की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2020 में दुनिया में 720 से 811 मिलियन लोगों को हंगर का सामना करना पड़ा। हालांकि इसके 768 मिलियन तक पहुंचने के अनुमान लगाए जा रहे थे लेकिन सर्वे के बाद इसमें 118 मिलियन की बढ़ोत्तरी देखी गई। आंकड़े देखें तो यह साल 2019 की तुलना में लगभग 161 मिलियन ज़्यादा है।

रिपोर्ट को यूएन की फूड एंड एग्रिकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन (FAO), इंटरनेश्नल फंड फॉर एग्रिकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD), यूएन चिल्ड्रंस फंड (UNICEF), वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने संयुक्त रूप से तैयार किया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2020 के दौरान 720-811 मिलियन में एशिया में लगभग आधे से भी ज़्यादा 418 मिलियन लोगों ने हंगर का सामना किया। रिपोर्ट के मुताबिक़ कुल संख्या में एक तिहाई लोग लगभग 282 मिलियन अफ्रीका के हैं जिन्हें भीषण हंगर का सामना करना पड़ा। इनके अलावा लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों में 60 मिलियन लोगों को हंगर का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में दुनिया की लगभग 2.37 बिलियन लोगों के पास पर्याप्त भोजन नहीं थे। इनमें 2019 के मुक़ाबले 320 मिलियन की बढ़ोत्तरी देखी गई है। मसलन मोडिरेड और सिवियर फूड इनसिक्योरिटी पिछले छह सालों से लगातार बढ़ रही है और अब रिपोर्ट के मुताबिक़ इससे दुनिया की 30 फीसदी आबादी प्रभावित हो रही है। इनमें 18.5 फीसदी आबादी सिवियर फूड इनसिक्योरिटी का सामना कर रही है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि फूड इनसिक्योरिटी की वजह से दुनिया में स्टंटिंग की समस्या बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2020 में पांच साल से कम उम्र के अनुमानित 22 फीसदी या 149.2 मिलियन बच्चे स्टंटिंग का शिकार थे।

वेस्टिंग की वजह से दुनिया के 6.7 फीसदी या 45.4 मिलियन और 5.7 फीसदी या 38.9 मिलियन ओवर वेट की समस्या से जूझ रहे थे। रिपोर्ट में इस बात पर आशंका जताई गई है कि साल 2030 तक स्टंटिंग की समस्या को 12.8 फीसदी तक कम करना एक चैलेंजिंग हो सकता है।

अगर भारत की बात करें तो साल 2018-19 के दौरान भारत में कुल आबादी में 15.3 फीसदी कुपोषण का शिकार थी। साल 2020 में पांच साल से कम उम्र के 17.3 फीसदी बच्चों में लंबाई के हिसाब से वेस्ट वृद्धि देखी गई, जो अन्य देशों के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा है। आंकड़े देखें देश के लगभग 31 फीसदी पांच साल के बच्चे स्टंटिंग का शिकार हैं। हालांकि इनमें साल 2012 में 41.7 फीसदी के मुक़ाबले सुधार हो रही है।

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