जहांगीरपुरी बुल्डोज़र कार्रवाई में बेघर हुए लोगों की मासिक आय 10 हज़ार रूपये, खाने के लिए करते थे काम: रिपोर्ट

by GoNews Desk 3 weeks ago Views 4260

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उत्तर पश्चिम दिल्ली के जहांगीरपुरी में 20 अप्रैल को एमसीडी के बुल्डोज़र के ग़रीबों पर कहर बरपाने का मामला काफी चर्चा का विषय बना रहा। इस मामले को लेकर IMPAR - Indian Muslims for Progress and Reforms ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि प्रभावित लोग निम्न आय वर्ग के हैं और उनमें 75 फीसदी लोग अपनी आजीविका के लिए दिहाड़ी, कूड़ा चुनने के काम पर निर्भर हैं।

हिंसाग्रस्त इलाके में रह रहे लोगों में बड़ी संख्या दिहाड़ी मज़दूरों की है जो बहुत कम आय में एक 4-5 सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में सदस्य ज़्यादा हैं और कमाने वालों की संख्या कम है। परिस्थितियाँ और वातावरण भी शिक्षा को प्रोत्साहित नहीं करते, और पुरुषों, महिलाओं और युवाओं सहित 99% लोग अशिक्षित हैं।


IMPAR ने बताया है कि जिन लोगों पर बुल्डोज़र कार्रवाई की गई वे झुग्गियों में रहते हैं और अपनी आजीविका के लिए टी-स्टॉल, सब्ज़ी की दुकानें, जूस और जंक फूड की दुकानें चलाते हैं और बड़ी संख्या में लोग कूड़ा चुनने के काम में लगे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक़ आय के स्त्रोतों के नुक़सान की वजह से वे आर्थिक रूप से और ज़्यादा कमज़ोर हो गए हैं। इनके अलावा हिंसा की वजह से लोग अपने काम पर जाने में असमर्थ हैं; वे बहुसंख्यक बहुल क्षेत्रों में टी-स्टॉल, सब्ज़ी की दुकानें लगाने से भी डर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़ लाचारी ने भी खास कर युवाओं में काफी निराशा पैदा की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से वर्तमान घटना ने कमज़ोर लोगों को और ज़्यादा संवेदनशील बना दिया है। सर्वे के दौरान ऐसे भी घरों की पहचान की गई जिनके सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और उनके घरों पर ताले लगे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक़ गणेश कुमार गुप्ता की चार लाख रूपये कीमत की जूस की दुकान, मन्नू की 55 हज़ार रूपये कीमत की ग्रोसरी की दुकान, आमिर अंसारी की 60 हज़ार कीमत की फल की दुकान, शान जिनका जंक फूड स्टॉल था उन्हें 40 हज़ार रूपये का नुक़सान हुआ है। इनके अलावा रिक़्शा, पान की दुकान, फलों और सब्ज़ियों के छोटे कारोबारियों को भी नुक़सान का सामना करना पड़ा।

बुल्डोज़र कार्रवाई पीएम मोदी की योजना के ख़िलाफ़ !

आपको बता दें कि यह बुल्डोज़र कार्रवाई तब हो रही है जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेहड़ी-पटरी वालों का जीवन बेहतर बनाने में मदद के लिए ख़ास योजनाओं का विस्तार किया है।

प्रधानमंत्री ने इसके लिए जून 2020 में स्वनिधि योजना शुरु की थी जिसके तहत स्ट्रीट वेंडर्स को दस हज़ार रूपये की आर्थिक मदद दी जाती है जिसपर कोई ब्याज़ नहीं लिया जाता - ताकि वे अपना जीवन बेहतर करने के लिए कारोबार कर सके या अपने कारोबार का विस्तार कर सके।

जबकि पुलिसिया कार्रवाई ने प्रधानमंत्री के इस योजना को नज़रअंदाज़ किया है जिससे उन ग़रीबों का जीवन बेहतर बनाने का उद्देश्य है।

हनुमान जयंति जुलूस, हिंसा और कार्रवाई !

ग़ौरतलब है कि 16 अप्रैल को हनुमान जयंति के मौके पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा कर जुलूस का आयोजन किया था। स्थानीय के मुताबिक़ कथित रूप से जुलूस में शामिल युवा अपने हाथों में भगवा झंडा, माथे पर भगवा पट्टी और हाथों में पिस्टल और धारदार तलवार और हथियार लिए नज़र आए थे।

स्थानीय का दावा था कि वे शाम के समय में एक मस्जिद परिसर में प्रवेश कर भगवा झंडा स्थापित करने की कोशिश की जिसके बाद दोनों समुदाय में तनाव बढ़ गया था जो हिंसा में तब्दील हो गई।

इसी हिंसा के संदर्भ में बीजेपी दिल्ली इकाई के चीफ आदेश गुप्ता ने एमसीडी और संबंधित अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर इलाके में बुल्डोज़र कार्रवाई करने का आह्वान किया था। इसके बाद एमसीडी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कथित रूप से उल्लंघन करते हुए बुल्डोज़र चलाए और सड़क किनारे और आसपास के क्षेत्र में बने घरों को ध्वस्त कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ हिंसा मामले में जिन लोगों की गिरफ़्तारी हुई है उनमें मुस्लिम समुदाय के लोगों की तादाद ज़्यादा है। साथ ही बताया जा रहा है कि उनके परिवार वालों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है।

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