सिर्फ दीनी तालीम देने वाले सरकारी मदरसों को बंद करेगी असम सरकार, 100 संस्कृत स्कूलों पर भी लगेगा ताला

by Ankush Choubey 1 year ago Views 1975

Assam to shut down government-run madrasas as part
असम की भाजपा सरकार ने सरकारी मदरसों और 100 संस्कृत स्कूलों को बंद करने का बड़ा फैसला किया है. असम सरकार में वित्त और शिक्षा मंत्री हेमंता बिस्वा शर्मा ने इसका ऐलान किया है. हेमंता बिस्वा सर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी मदरसों को स्कूल में बदल दिया जाएगा और कुछ मामलों में टीचर्स को सरकारी स्कूल में शिफ्ट करके मदरसा बंद किया जाएगा. इसके लिए अगले महीने नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा.

हेमंता बिस्वा शर्मा ने कहा कि सरकारी पैसों पर सिर्फ कुरान को नहीं पढ़ाया जा सकता है, अगर मदरसा सरकारी अनुदान से चलता है तो फिर बाइबिल और गीता को भी पढ़ाना चाहिए. इसी कड़ी में सरकार ने ऐसे मदरसों को बंद करने का फैसला किया है जो सरकारी आदेश नहीं मानेंगे। इसके साथ ही हेमंता बिस्वा शर्मा ने बताया है कि सिर्फ मदरसों को बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि प्रदेश भर में 100 संस्कृत स्कूलों को बंद करने का निर्णय भी सरकार ने लिया है. उन्होंने कहा कि असम सरकार ऐसे किसी भी संस्था को पैसे नहीं देगी जो सिर्फ किसी एक धर्म विशेष को प्राथमिकता देते हो. बता दें, भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को उसके धर्म से जुडी शिक्षा प्राप्त करने की आज़ादी देता है.


सरकार के इस फैसले के बाद ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष और सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने सरकार पर हमला किया है. उन्होंने एलान किया कि अगर बीजेपी की असम सरकार राज्य द्वारा संचालित मदरसों को बंद करती है, तो उनकी पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद इस फैसले को पलट देगी।

असम के एसएमईबी यानी राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के मुताबिक, राज्य में 614 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं. इनमें से 400 हाई मदरसे, 112 जूनियर हाई मदरसे हैं और अन्य 102 सीनियर मदरसे हैं. राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अनुसार असम में कुल मान्यता प्राप्त मदरसों में से 57 लड़कियों के लिए हैं, 3 लड़कों के लिए हैं और 554 को-ऐड यानी जिसमे लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ते हैं, जबकि 17 मदरसे सिर्फ उर्दू माध्यम से चल रहे हैं.

इसी प्रकार से असम में करीब एक हज़ार संस्कृत स्कूल और महाविद्यालय हैं, जिसमें से 100 को असम सरकार द्वारा संचिलत किया जा रहा और इन्हें अब सरकार बंद करने जा रही है. असम सरकार हर साल मदरसों पर 3 से 4 करोड़ रुपये खर्च करती है जबकि संस्कृत संस्थानों पर हर साल लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

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