नाराज़ शिक्षक, कर्मचारी योगी सरकार से क्या मांग रहे हैं ?

by GoNews Desk 1 year ago Views 2500

Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश में चुनाव की प्रक्रिया में कई शिक्षक और दूसरे कर्मचारियों ने संक्रमण से अपनी जान गंवाई है. उत्तर प्रदेश के शिक्षक संगठन ने दावा किया है कि राज्य में चुनावी ड्यूटी देने के दौरान 1200 से ज़्यादा अध्यापकों की मौत हुई है जबकि सरकार इस बात से लगातार मुकर रही है. सरकार के लापरवाह रवैये ने शिक्षक और दूसरी वर्कर युनियन में गुस्सा पैदा कर दिया है. 

ये संगठन सरकार पर असंवेदनशील और कठोर बर्ताव का आरोप लगा रहे हैं. उनकी नाराज़गी इस बात से है कि मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी संख्या में चुनावी ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों की मौत पर कोई दुख ज़ाहिर नहीं किया है और इसके विपरीत वह उनकी सालों पुरानी मांगों पर भी ध्यान न दे कर ज़िद दिखा रहे हैं. 

यूपी में चार चरणों में हुए चुनाव में पंचायत सदस्य क्षेत्र पंचायत सदस्यों के, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य के पदों के लिए कुल 14,15,188 लोग मैदान में उतरे थे. पंचायत चुनावों में करीब 4 लाख शिक्षक, मनरेगा और दूसरे कर्मचारियों ने ड्यूटी दी. ये चुनाव पूरे महीने चलते रहे और इस बीच कोरोना तेज़ी से राज्य में फैल रहा था. उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ पहले चरण के चुनावों से पहले पत्र लिख इन्हें टालने की मांग की लेकिन उनकी मांग को दरकिनार कर चुनाव जारी रहे. 

मनरेगा कर्मचारी प्रदेश संघ के अध्यक्ष भूपेश सिंह का कहना है कि 50 से अधिक मनरेगा कर्मचारियों की मौत संक्रमण से हो चुकी है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े शिक्षा संघ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने 17 मई को एक प्रेस रिलीज में बताया कि चुनाव में ड्यूटी देने वाले 1205 शिक्षक, शिक्षा मित्रों और दूसरे कर्मचारियों की मौत हुई है. 

अब शिक्षा संगठनों की ओर से चुनाव में ड्यूटी के दौरान मारे गए शिक्षकों के परिवारों के लिए एक करोड़ के मुआवज़े और नौकरी की मांग की जा रही है. संविदा एएनएम की भी सरकार से नाराज़गी पुरानी हो चली है. वह पिछले कई समय से सरकार से कुछ मांगे कर रही हैं. 

संविदा कर्मियों का कहना है कि उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन मिलना चाहिए जबकि कई जोखिम भरे कार्य करने के बाद भी उन्हें सिर्फ 10,000 रूपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं. उनकी मांग है कि पेट परीक्षा से बाहर रख कर सभी संविदा एएनएम को नियमित पदों पर नियुक्त किया जाए और संक्रमण से जान गंवाने वाले कर्ममचारियों को 50 लाख का मुआवज़ा दिया जाए. 

उधर मनरेगा कर्मियों ने भी मांग पूरी न होंने पर हड़ताल पर जाने की धमकी दे दी है. वह अपना बकाया भुगतान न होंने से नाराज़ हैं. महासंघ के अध्यक्ष भूपेश सिंह ने बताया कि पिछले साल तीन वर्षों से मनरेगा कर्मियों का मानदेय बकाया था. बड़ी परेशानियों के बाद 2020 में 232 करोड़ का बकाया भुगतान किया गया और सरकार ने ये वादा किया कि अब नियमित रूप से भुगतान होगा लेकिन स्थितियां फिर वहीं पहुंत गई हैं. 

उन्होंने कहा कि 2021 में सरकार की ओर से कर्मचारियों का मानदेय 6,000 से बढ़ाकर 10,000 करने की घोषणा की गई थी लेकिन चार महींनों बाद भी इस पर अमल नहीं हुआ है जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है.
 

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