चार दशक से कांग्रेस के नेता रहे अमरिंदर सिंह बनाएंगे राजनीतिक पार्टी, बीजेपी से गठबंधन की पेशकश

by M. Nuruddin 8 months ago Views 1251

इससे अटकलों का दौर तेज़ हो गया है कि केंद्र की मोदी सरकार क्या पंजाब की सत्ता के लिए इतना बड़ा रिस्क लेने को तैयार है ?

Amarinder Singh, leader of Congress for four decad
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंपर सिंह ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने का ऐलान कर दिया है। इसी के साथ उन्होंने अपने सबसे बड़े विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करने की भी पेशकश की और अकाली दल सहित अन्य दलों को भी अगले साल विधानसभा चुनाव में साथ लेकर चलने की बात कही।

कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि वो बीजेपी के साथ (तब) गठबंधन करेंगे जब किसानों की मांगें किसानों के मन मुताबिक़ मान ली जाती है। इससे अटकलों का दौर तेज़ हो गया है कि केंद्र की मोदी सरकार क्या पंजाब की सत्ता के लिए इतना बड़ा रिस्क लेने को तैयार है ?


पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पिछले महीने केंद्रीय मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं को ख़ारिज कर दिया था। तब यह दावा किया गया था कि उन्होंने किसानों के विरोध पर चर्चा के लिए अमित शाह से मुलाक़ात की थी।

मंगलवार शाम ट्वीट्स की एक सीरीज में, पूर्व मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने अमरिंदर सिंह को टैग करते हुए यह कहा कि, “वो जल्द ही पंजाब और उसके लोगों के हितों की सेवा के लिए अपनी राजनीतिक पार्टी शुरू करने की घोषणा करेंगे, जिसमें हमारे किसान भी शामिल हैं जो अपने अस्तित्व के लिए एक साल से ज़्यादा समय से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।"

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, "अगर किसानों के हित में किसान आंदोलन का समाधान किया जाता है तो 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ सीट की व्यवस्था की उम्मीद है, साथ ही समान विचारधारा वाले दलों जैसे कि अलग-अलग अकाली समूहों, विशेष रूप से ढींडसा और ब्रह्मपुरा गुटों के साथ गठबंधन पर भी विचार है।"

79 वर्षीय, अमरिंदर सिंह चार दशकों से ज़्यादा समय से कांग्रेस के साथ थे और पंजाब में पार्टी के सबसे बड़े नेता रहे। उन्होंने सितंबर में अपने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था।राज्य में नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने और दोनों के बीच मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी पर अपमान का आरोप लगाया था। इसके बाद सिद्धू ने भी पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि अब नवजोत सिंद्ध हाई प्रोफाइल ड्रामे के बाद पार्टी के साथ फिर जुड़ गए हैं और राज्य में पार्टी के अध्यक्ष हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह का राजनीतिक कैरियर:

कैप्टन अमरिंदर सिंह को राजीव गांधी ने कांग्रेस में शामिल किया था, जो स्कूल के समय से उनके दोस्त थे और पहली बार 1980 में लोकसभा के लिए चुने गए थे। 1984 में, उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान पंजाब में सेना की कार्रवाई के विरोध में संसद और कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद, वो शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए और तलवंडी साबो से राज्य विधानमंडल के लिए चुने गए और राज्य सरकार में कृषि, वन, विकास और पंचायत मंत्री बने।

दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए कैप्टन

1992 में अमरिंदर सिंह ने अकाली दल से नाता तोड़ लिया और शिरोमणि अकाली दल (पंथिक) नामक एक अलग समूह का गठन किया, जिसका बाद में 1998 में कांग्रेस में विलय हो गया। कैप्टन के दोबारा कांग्रेस के साथ जाने के पीछे वजह यह रही, कि तब हुए विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर की पार्टी को करारी हार मिली थी और सोनिया गांधी के नेतृत्व में कैप्टन ख़ुद सिर्फ 850 वोटों पर ही सिमट गए थे। उन्हें उनके पटियाला निर्वाचन क्षेत्र से अकाली दल के उम्मीदवार प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने 33 हज़ार से भी ज़्यादा मतों के भारी अंतर से हराया था।

उनके पार्टी में दोबारा आने के बाद सोनिया गांधी ने उन्हें पार्टी का राज्य अध्यक्ष बनाया और उनके नेतृत्व में राज्य में पार्टी ने 1999 के लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया।

जनता का असंतोष प्रकाश सिंह बादल सरकार के ख़िलाफ़ था और कैप्टन के पास यह कांग्रेस और सिखों के बीच की दूरी को पाटने का बेहतर मौका साबित हुआ। 2002 में, उन्होंने कांग्रेस को राज्य में जीत दिलाई और प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजा, जहां से वो बाद में रिहा कर दिए गए थे।

कैप्टन के चुनावों में जीत का रेकॉर्ड

कैप्टन ने 1999 से 2002 और 2010 से 2013 तक दो मौकों पर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में काम किया, कैप्टन 2002 में पंजाब के मुख्यमंत्री भी बने और 2007 पद पर बने रहे।

सितंबर 2008 में, पंजाब विधानसभा की एक विशेष समिति ने अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान, उन्हें अमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से संबंधित भूमि के हस्तांतरण में नियमितता की वजह से निष्कासित कर दिया था। 

2010 में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उनके निष्कासन को इस आधार पर असंवैधानिक ठहराया था कि यह (कार्रवाई) बहुत ज़्यादा और असंवैधानिक था।

कांग्रेस में ऊंचे पदों पर रहे अमरिंदर सिंह

उन्हें 2008 में पंजाब कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह 2013 से कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य भी रहे। उन्होंने 2014 के आम चुनावों में भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे अरुण जेटली को 1,02,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया था। वो पटियाला (शहरी) में तीन बार, समाना और तलवंडी साबो का एक-एक बार प्रतिनिधित्व करते हुए पांच बार पंजाब विधानसभा के सदस्य रहे।

27 नवंबर 2015 को, अमरिंदर सिंह को 2017 के पंजाब चुनावों के लिए पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। 11 मार्च 2017 को कांग्रेस पार्टी ने उनके नेतृत्व में राज्य विधानसभा चुनाव जीता।

अमरिंदर सिंह ने 16 मार्च 2017 को पंजाब राजभवन, चंडीगढ़ में पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पद की शपथ पंजाब के राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर ने दिलाई थी। अब कैप्टन अरिंदर सिंह कांग्रेस पार्टी आलाकमान से बुरी तरह नाराज़ हैं और पार्टी आलाकमान कैप्टन को साथ लेकर चलने में नाकाम रही।

ताज़ा वीडियो