कासगंज में पुलिस कस्टडी में "अल्ताफ की हत्या"; 30 दिन में यूपी के पुलिस थाने में दूसरी मौत

by M. Nuruddin 7 months ago Views 2714

"थाने में अभियुक्त के शरीर को सुइयों से चुभाया जाता है और गर्म लोह की रॉड से शरीर को जलाया तक जाता है और अभियुक्त के मुंह में पेशाब तक कर दिया जाता है"

"Altaf murdered" in police custody in Kasganj, sec
उत्तर प्रदेश के कासगंज में एक शख़्स की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है। घटना मंगलवार की है जब एक हिंदू महिला के अपहरण के आरोपी मुस्लिम शख़्स को पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस का दावा है कि 22 वर्षीय अल्ताफ ने अपने जैकेट के हुड की डोरी से पुलिस थाने के शौचालय में फांसी लगा ली। अल्ताफ के परिवार वालों ने पुलिस थाने में अपने बच्चे के हत्या का आरोप लगाया है।

अल्ताफ के पिता चाहत मियां का कहना है कि उन्होंने खुद ही अपने बच्चे को पुलिस के हवाले किया था। उन्होंने बताया कि लड़की से मामला जुड़े होने के आरोप के बाद उन्होंने खुद ही अल्ताफ को पुलिस के हवाले सौंपा था लेकिन 24 घंटे बाद पुलिस ने बताया कि अल्ताफ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अल्ताफ के पिता ने पुलिस पर अपने बच्चे को फांसी लगाकर मारने का गंभीर आरोप भी लगाया है।


अल्ताफ के परिवार के सदस्यों का दावा है कि अल्ताफ को गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने भी पेश नहीं किया गया। जबकि कासगंज के पुलिस अधीक्षक बोत्रे रोहन प्रमोद ने दावा किया कि अल्ताफ को सोमवार की शाम नहीं बल्कि मंगलवार सुबह थाने बुलाया गया था। 

कासगंज एसपी बोत्रे रोहन प्रमोद का दावा है, “पूछताछ के दौरान उसने वॉशरूम जाने की इजाज़त मांगी। “उन्हें लॉक-अप के अंदर वॉशरूम भेज दिया गया। वहां उसने अपने जैकेट के हुड की डोरी को एक नल से बांधकर खुद का गला घोंटने की कोशिश की।

अधिकारी ने दावा किया कि पुलिस ने उसे बेहोशी की हालत में पाया और उसे कासगंज के अशोक नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। पुलिस ने बताया कि 5 से 10 मिनट के इलाज के बाद अल्ताफ की मौत हो गई।

पुलिस ने कहा कि 22 वर्षीय अल्ताफ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, और पांच अधिकारियों को ड्यूटी में लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में पुलिस कस्टडी में आए दिन होती है मौत

उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां से पुलिस कस्टडी में मौत की ख़बरें आना मानो आम बात हो गई है। पिछले महीने अक्टूबर में ही आगरा के एक पुलिस थाने में एक दलित शख़्स की मौत हो गई थी। दलित शख़्स अरुण वाल्मिकी पर आगरा के एक पुलिस थाने से 25 लाख रूपये की चोरी करने का आरोप था।

अरुण पेशे से एक सफाईकर्मी थे और परिवार वालों का आरोप था कि पुलिस ने उनकी बर्बरता से पिटाई की, जिससे अरुण की मौत हो गई। अरुण के परिवार वालों ने उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस पर हत्या के आरोप लगाए और झूठे केस में फंसाने के भी आरोप लगाए थे।

पुलिस हिरासत में प्रत्येक साल सैकड़ों मौतें

देशभर में प्रत्येक साल सैकड़ों लोगों की पुलिस हिरासत में मौत होती है। नेशनल कैंपेन अगेंस्ट टॉर्चर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में 2019-20 के दौरान पुलिस हिरासत में 14 मौतें दर्ज की गई थी। इनके अलावा साल 2020 में उत्तर प्रेदेश में पुलिस हिरासत में आठ मौतें दर्ज की गई। जबकि इस दौरान “मॉडल राज्य गुजरात” टॉप पर रहा जहां सबसे ज़्यादा 17 मौतें दर्ज की गई।

नेश्नल कैंपेन अगेंस्ट टॉर्चर के मुताबिक़ पुलिस थाने में अभियुक्तों के साथ दयनीय व्यवहार किया जाता है। NCAT के एक सदस्य परितोष ने बताया कि 2019 के दौरान पुलिस थाने में अभियोक्तों के साथ यातना के तरीकों में शरीर में लोहे की कील ठोकना, पैरों पर रोलर लगाना और जलाना, 'फालंगा' जिसमें पैरों के तलवे पीटे जाते हैं, शामिल थे।

इनके अलावा कस्टडी के दौरान अभियुक्तों को बिजली के झटके, उनपर पेट्रोल डालना, निजी अंगों पर मिर्च पाउडर लगाना भी शामिल था। इतना ही नहीं थाने में अभियुक्त के शरीर को सुइयों से चुभाया जाता है और गर्म लोह की रॉड से शरीर को जलाया तक जाता है और अभियुक्त के मुंह में पेशाब तक कर दिया जाता है, जो कि एक बेहद क्रूर व्यवहार है।

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