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सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में चारो सदस्य नये कृषि क़ानूनों के समर्थक

by M. Nuruddin 1 week ago Views 2345

कमेटी के चारों सदस्य नये कृषि कानूनों के पक्ष में है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का कमेटी बनाने का फैसला सवालों और विवादों में घिरता नज़र आ रहा है।

All the members of the Supreme Court committee are
कृषि क़ानून और किसान आंदोलन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया। अपने फैसले में कोर्ट ने तीनों कृषि क़ानून लागू करने पर रोक लगा दी है। साथ ही ज़मीनी हक़ीक़त जाँचने के लिए कोर्ट ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। कोर्ट ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, कृषि जानकार प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घणावत को कमेटी का सदस्य बनाया है।

सुनवाई के दौरान सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि उनके पास क़ानून को निलंबित करने की शक्ति है लेकिन क़ानून का निलंबन खाली एक उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए। इस कमेटी के माध्यम से जो बात निकलकर सामने आएगी, आगे उन बातों पर विचार होगा। हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा कोर्ट के कमेटी बनाने के पक्ष में नहीं है। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से योगेन्द्र यादव ने साफ कहा कि किसानों ने कोई कमेटी मांग नहीं की थी, इसलिए ये आंदोलन जारी रहेगा। उधर कमेटी में शामिल सदस्यों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं जो विवाद का कारण बन सकता है। कहा जा रहा है कि जिन चार लोगों को कमेटी का सदस्य बनाया गया है वे घोषित रूप से नये कृषि क़ानूनों के समर्थक हैं।


अशोक गुलाटी

अशोक गुलाटी भारत सरकार के कमीशन ऑफ एग्रिकल्चर कॉस्ट्स एंड प्राइसेज़ (सीएसीपी) के पूर्व चेयरमैन हैं। सीएसीपी भारत सरकार की खाद्य आपूर्ति और दाम निर्धारण नीति पर काम करती है। अशोक गुलाटी फिलहाल इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेश्नल इकोनॉमिक पॉलिसी में कृषि क्षेत्र के प्रोफेसर हैं। अशोक गुलाटी को मोदी सरकार ने साल 2015 में पद्म श्री से नवाज़ा था।

प्रोफेसर अशोक गुलाटी का मानना है कि कृषि में कॉर्पोरेट क्षेत्र की भूमिक बढ़ाना आवश्यक है क्योंकि सरकार इस क्षेत्र में निवेश की ज़रूरतें पूरा नहीं कर सकती। प्रोफेसर गुलाटी का कहना है कि पंजाब और हरियाणा के किसानों की एमएसपी को लेकर चिंताएं जायज़ हैं लेकिन देश के बाकी किसान एमएसपी पर अपना उपज नहीं बेच पाते हैं। ऐसे में किसान संगठनों को ज़रूरी बदलावों को नहीं रोकना चाहिए। ये ‘बदलाव’ भारतीय कृषि क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।

प्रमोद कुमार जोशी

प्रमोद कुमार जोशी मानते हैं कि तीनों कृषि क़ानून किसानों के हित में हैं और इससे किसानों को मुनाफा होगा। प्रमोद जोशी का मानना है कि एमएसपी से परे नई मूल्य नीति पर विचार करने की ज़रूरत है। यह किसानों, उपभोक्ताओं और सरकार के लिए एक जीत होनी चाहिए। जोशी का कहना है कि एमएसपी को घाटे की अवधि के दौरान लागू किया गया था जिसे अब हम पार कर चुके हैं।

प्रमोद जोशी कृषि क्षेत्र में शोध का काम करते हैं। उन्होंने हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च मैनेजमेंट और नेशनल सेंटर फॉर एग्रिकल्चरल इकोनॉमिक्स पॉलिसी रिसर्च में डायरेक्टर के पद पर काम किया है। उन्होंने इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में साउथ एशिया को-ऑर्डिनेटर के पद पर भी काम किया है। इनके अलावा डॉ जोशी इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ अर्थशास्त्री के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

अनिल घणावत

अनिल घणानत शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं। यह संगठन कृषि क़ानून के समर्थन में हैं। अनिल घणावत कह चुके हैं कि यह कृषि क़ानून ‘किसानों के लिए वित्तीय स्वतंत्रता’ की दिशा में पहला क़दम है। बीते दिनों उन्होंने कहा था कि इस क़ानून के ज़रिये एपीएमसी की शक्तियों को सीमित किया गया है जो एक अच्छा क़दम है। उन्होंने तीनों क़ानून का स्वागत करते हुए कहा है कि कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।

भूपिंदर सिंह मान

भूपिंदर सिंह पूर्व राज्यसभा सांसद हैं और वर्तमान में भारतीय किसान यूनियन के मान गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। साथ ही वो किसान को-ऑर्डिनेशन कमिटी के चेयरमैन भी हैं। उन्होंने 14 दिसंबर को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात करके कृषि कानूनों का समर्थन किया था।

ज़ाहिर है, कमेटी के चारों सदस्य नये कृषि कानूनों के पक्ष में है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का कमेटी बनाने का फैसला सवालों और विवादों में घिरता नज़र आ रहा है।

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