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युनाइटेड नेशन के महासचिव पद के लिए दावेदारी पेश करने वाली कौन हैं आकांक्षा अरोड़ा ?

by M. Nuruddin 4 weeks ago Views 1595

युनाइटेड नेशन में सिक्योरिटी कांउसिल की सिफारिश पर जनरल असेंबली, महासचिव को नियुक्त करता है।

Akanksha Arora, who is going to present the claim
करीब 200 देशों के संगठन युनाइटेड नेशन के महासचिव पद के लिए चुनाव होने वाले हैं। भारतीय मूल की आकांक्षा अरोड़ा ने भी इसके लिए अपनी दावेदारी पेश की है। 34 साल की आकांक्षा यूएन के डेवलपमेंट प्रोग्राम में ऑडिट को-ऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रही हैं।हालांकि अपने दूसरे कार्यकाल के लिए एंटोनियो गुटेरेस अपनी दावेदारी पहले ही पेश कर चुके हैं।

आकांक्षा का कहना है कि ’75 साल होने के बाद भी युनाइटेड नेशन ने अपने वादे पूरे नहीं किए। रिफ्यूज़ी सुरक्षित नहीं हैं। मानवीय मदद पर्याप्त नहीं है। पुराने इनोवेशन और तकनीक पर ही संगठन काम कर रहा है। हम एक प्रोग्रेसिव यूएन चाहते हैं।’ आकांक्षा कहती हैं कि ‘यही वजह है कि मैंने संगठन के महासचिव पद के लिए दावेदारी की है।’ आकांक्षा यूएन पर नेताओं की सेवा करने के आरोप लगाती हैं। वो कहती हैं कि ‘यूएन को नेताओं की सेवा करने की बजाय लोगों की सेवा करनी होगी। यह बदलाव का समय है, कोई भी काम नामुमकिन नहीं है।’


भारत में जन्मी आकांक्षा छह साल की उम्र में सऊदी अरब चली गईं। उसके तीन साल बाद पश्चिमी सऊदी शहर में उनके माता-पिता के एकमात्र अमेरिकी स्कूल का ख़र्च नहीं उठा पाने की वजह से वो भारत लौट आईं। यहां उन्होंने बोर्डिंग स्कूल में दाख़िला लिया और अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी कीं। 18 साल की उम्र में वो टोरंटो चली गईं जहां उन्हें ग्रेजुएशन की पढ़ाईं के लिए यॉर्क विश्वविद्यालय में स्कॉलरशिप मिली।

विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की कनाडा शिफ्ट हो गईं। यहां उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले ली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उनके पास भारत और कनाडा दोनों देशों की नागरिकता है। साल 2016 में वो युनाइटेड नेशन के साथ काम करने के लिए न्यूयॉर्क चली गईं। युनाइटेड नेशन में आकांक्षा का काम फाइनेंशियल रूल्स और रेगुलेशन बनाना है। उनके पास यूएनडीपी में इंटरनल और एक्सटर्नल ऑडिट की भी ज़िम्मेदारी है।

34 वर्षीय आकांक्षा कहती हैं कि दुनिया में सबसे बड़ी समस्या शरणार्थियों की है। उनका कहना है कि वो सबसे पहले इसी समस्या को ख़त्म करने के लिए काम करेंगी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी, UNHCR के मुताबिक़ दुनिया भर में कम से कम 79.5 मिलियन लोग अपने घरों से भागने के लिए मज़बूर हैं। इनमें लगभग 46 मिलियन IDP और लगभग 26 मिलियन शरणार्थी हैं - इनमें करीब 50 फीसदी 18 साल से कम उम्र के हैं।

आकांक्षा कहती हैं कि ‘संयुक्त राष्ट्र के पास शरणार्थियों पर चर्चा को प्राथमिकता देने की ज़िम्मेदारी है। यह भी ध्यान की बात है कि एक दशक से शिविरों में रहने वाले ये लोग आडीपी नहीं हो सकते। यह दस साल का लॉकडाउन है।’ आकांक्षा ने जलवायु, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुधार के अलावा कोरोना को भी अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल की हैं। आकांक्षा कहती हैं कि युनाइटेड नेशन को महिला सशक्तिकरण पर भी बहुत ज़्यादा काम करने की ज़रूरत है। यह संगठन के विश्व स्तरीय योजना का हिस्सा है।

ग़ौरतलब है कि युनाइटेड नेशन के हाल्फ सेंचुरी से ज़्यादा बीत जाने के बाद भी अबतक संगठन की एक भी महिला महासचिव नहीं रही हैं। महासचिव के लिए 2017 में हुए चुनाव में 13 नामांकित उम्मीदवारों में सात महिलाएं थीं। हालांकि संगठन के उप-महासचिव के पद पर नाइजीरियाई मूल की अमीना मोहम्मद काम कर रही हैं।

युनाइटेड नेशन के चीफ का कार्यकाल पांच साल का होता है। मौजूदा चीफ एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर 2021 को ख़त्म हो रहा है। साल 2017 में गुटेरेस युनाइटेड नेशन के 9वें महासचिव बने थे। युनाइटेड नेशन में सिक्योरिटी कांउसिल की सिफारिश पर जनरल असेंबली, महासचिव को नियुक्त करता है।

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