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कांग्रेस के संकट मोचक और गाँधी परिवार के सबसे विश्वनीय अहमद पटेल नहीं रहे

by Ankush Choubey 5 months ago Views 908

Ahmad Patel is no more the Congress's troubleshoot
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, गुजरात राज्य सभा सांसद और पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में बुधवार तड़के निधन हो गया। 71 साल के अहमद पटेल एक महीना पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे और इसके बाद उनका इलाज चल रहा था।   अहमद पटेल के बेटे फैजल पटेल ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उनके पिता अहमद पटेल का आज सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर निधन हो गया है।  

फैसल पटेल ने ट्वीट किया- बड़े दुख के साथ मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरे पिता अहमद पटेल का बुधवार देर रात 3.30 बजे निधन हो गया है। करीब एक महीने पहले उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी और उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर चुके थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। साथ ही फैजल पटेल ने अपने सभी शुभचिंतकों से कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की अपील की और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की भी अपील की है।


अहमद पटेल के निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा - अहमद पटेल के रूप में मैंने एक अपरिवर्तनीय कॉमरेड, एक वफादार सहयोगी और एक दोस्त खो दिया है।  जिसका पूरा जीवन कांग्रेस पार्टी को समर्पित था।  उनकी ईमानदारी और समर्पण, अपने कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, वह हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते थे।  उनकी उदारता दुर्लभ गुण थे, जो उन्हें दूसरों से अलग करते थे।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया- अहमद पटेल जी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने कई साल सार्वजनिक जीवन में समाज के लिए काम किया। उन्हें अपने तेज दिमाग के लिए जाना जाता था। कांग्रेस को मजबूत करने के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। मैंने उनके बेटे फैजल से बात की है। उनकी आत्मा को शांति मिले।

अहमद पटेल के निधन पर राहुल गांधी ने ट्वीट किया, - ये एक दुखद दिन है। श्री अहमद पटेल कांग्रेस पार्टी के एक स्तंभ थे।  उन्होंने कांग्रेस पार्टी को जिया और सबसे कठिन समय में पार्टी के साथ खड़े रहे।  वो अतिमहत्वपूर्ण थे. हम उन्हें याद करेंगे।  फैसल, मुमताज और परिवार को मेरा प्यार और संवेदनाएं।

गुजरात से ताल्लुक रखने वाले अहमद पटेल तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए तो 5 बार राज्यसभा के सांसद रहे।  अगस्त 2018 में अहमद पटेल को कांग्रेस का कोषाध्याक्ष नियुक्त किया गया था।  अहमद पटेल पहली बार 1977 में महज़ 28 साल की उम्र में भरूच से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे और जल्द ही वह इंदिरा गांधी के करीबी बन गए।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव 1984 में लोकसभा की 400 सीटों के बहुमत के साथ सत्ता में आए तो उस समय अहमद पटेल सांसद होने के अलावा पार्टी के संयुक्त सचिव बनाए गया और बाद में उन्हें कांग्रेस का महासचिव भी बनाया गया।

फिर बाद में वह राजीव गांधी के बेहद करीबी और खास रहे।  अहमद पटेल 1993 से लगातार राज्यसभा सांसद थे। हमेशा से काम बोलने वाले, पर्दे के पीछे से राजनीति करने वाले अहमद पटेल गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम किया और उनके सबसे करीबी बनकर रहे, लेकिन कभी भी मंत्री नहीं बने।

गांधी परिवार के साथ-साथ उन्हें कांग्रेस का संकट मोचक नेता माना जाता था। शुरुआत के दिनों में सोनिया गांधी को राजनीति में स्थापित करने में अहमद पटेल ने बड़ी भूमिका निभाई। जब राजीव गाँधी की हत्या हुई उसके बाद जब से सोनिया गाँधी राजनीती में सक्रिय हुईं तो अहमद पटेल कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे।

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