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कृषि मंत्री ने बुलाई किसनों की बैठक, किसान बोले- 500 संगठन प्रदर्शन में शामिल तो सिर्फ 32 से बातचीत क्यों?

by Ankush Choubey 5 months ago Views 1672

Agriculture Minister called meeting of farmers, fa
केंद्र सरकार द्वारा लाये गए कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ कड़ाके की ठंड और कोरोना संक्रमण के ख़तरे के बीच दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन छठे दिन भी जारी है। इस बीच सोमवार की देर रात केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के नेताओं को कोविड-19 महामारी और सर्दी का हवाला देते हुये 3 दिसंबर की जगह मंगलवार यानी कि आज बातचीत के लिये आमंत्रित किया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और सर्दी को ध्यान में रखते हुये हमने किसान यूनियनों के नेताओं को तीन दिसंबर की बैठक से पहले ही चर्चा के लिये आने का न्यौता दिया है। बैठक 1 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में दोपहर 3 बजे बुलायी गयी है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को हुई बैठक में शामिल सभी किसान नेताओं को इस बार भी आमंत्रित किया गया है।


कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने 32 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों को पत्र लिख कर एक दिसंबर को चर्चा के लिये आमंत्रित किया है। अग्रवाल ने जिन संगठनों को पत्र लिखा है उनमें क्रांतिकारी किसान यूनियन, जम्मुहारी किसान सभा, भारतीाय किसान सभा (दकुदा), कुल हिंद किसान सभा और पंजाब किसान यूनियन शामिल हैं। मगर कृषि मंत्री द्वारा बुलाई गयी इस बैठक को लेकर भी किसान नेताओं ने ऐतराज जताया है।

पंजाब किसान संघर्ष समिति संयुक्त सचिव सुखविंदर एस सब्रन ने कहा कि देश में किसानों के 500 से अधिक समूह हैं लेकिन सरकार ने केवल 32 समूहों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। बाकी को सरकार द्वारा नहीं बुलाया गया है। हम तब तक बातचीत नहीं करेंगे, जब तक सभी समूहों को नहीं बुलाया जाता।  

इस बीच मंगलवार सुबह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक बार फिर सरकार निशाना साधा। राहुल गाँधी ने ट्वीट किया- सैकड़ों अन्नदाता मैदानों में धरना दे रहे हैं और ‘झूठ’ टीवी पर भाषण! किसान की मेहनत का हम सब पर कर्ज है। ये कर्ज उन्हें न्याय और हक़ देकर ही उतरेगा, न कि उन्हें दुत्कार कर, लाठियां मारकर और आंसू गैस चलाकर। जागिए, अहंकार की कुर्सी से उतरकर सोचिए और किसान का अधिकार दीजिए।

कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ देश की राजधानी दिल्ली को घेरकर बैठे किसान बॉर्डर से हटने को तैयार नहीं है और अब वो दिल्ली के 5 एंट्री प्वाइंटस को सील करने की तैयारी में हैं। किसानों का साफ़ कहना है कि वह इस निर्णायक लड़ाई के लिए दिल्‍ली आए हैं जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका प्रदर्शन ख़त्म नहीं होगा।

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