पंजाब के बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान की कांग्रेस सरकार लाएगी कृषि कानून के ख़िलाफ़ प्रस्ताव

by Ankush Choubey 1 year ago Views 1920

After Punjab, Chhattisgarh, and Rajasthan Congress
विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ अब कांग्रेस शासित राज्यों ने क़ानूनी तौर पर मोर्चा खोल दिया है. मंगलवार को पंजाब की कांग्रेस सरकार के विधानसभा में विवादित केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ बिल के सर्वसम्मति से पारित होने के बाद अब छत्तीसगढ़ और राजस्थान की कांग्रेस सरकार भी इन कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य विधानसभा में जल्द नया विधेयक लाने की तैयारी में है. वहीँ छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने इसकी प्रक्रिया भी तेज़ कर दी है, जिसके बाद सरकार और राज्यपाल के बीच ठन गई है.

अक्टूबर महीने के अंत में सीएम भूपेश बघेल ने विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करने के लिए राज्यपाल से अनुमति लेने के लिए फाइल भेजी थी, लेकिन राज्यपाल अनुसुइया उइके ने इस पर आपत्ति जताते हुए फाइल लौटा दी.


सरकार को यह फाइल मिलते ही आनन-फानन में जवाब तैयार कर दूसरी बार राजभवन भेजा गया है. राजभवन और राज्य सरकार के बीच विधानसभा के विशेष सत्र बुलाने को लेकर जारी गतिरोध के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पूर्ण बहुमत की सरकार को विधानसभा सत्र बुलाने से कोई नहीं रोक सकता. हालाँकि, सीएम बघेल ने कहा कि राज्यपाल ने कुछ जानकारी मांगी है, सरकार उन्हें दे दी जाएगी, उम्मीद है उसके बाद अनुमति मिल जाएगी. 

वहीं दूसरी ओर सीएम अशोक गहलोत नवंबर के पहले हफ्ते  में राजस्थान विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने जा रह हैं. अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला किया गया कि पंजाब की तर्ज पर ही अब राजस्थान सरकार तीन नए कानून बनाएगी और केंद्र के तीनों कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश करेगी.

वहीं सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसान विरोधी कानून जो एनडीए सरकार ने बनाए हैं, उसका विरोध करती रहेगी. अभी पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध बिल पारित किए हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा.

दरअसल, विवाद कृषि कानून बनने के बाद ही कांग्रेस ने अपनी प्रदेश सरकारों से कहा था कि कृषि विधेयकों को खारिज करने के लिए वो कानून पर विचार करें. कांग्रेस अध्यक्ष ने कांग्रेस शासित राज्यों को संविधान के अनुच्छेद 254 (2) के तहत अपने राज्यों में कानून पारित करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए कहा था, जो राज्य विधानसभाओं को एक केंद्रीय कानून को रद्द करने के लिए एक कानून पारित करने की अनुमति देता है, फिर जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होती है.

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