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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात के बाद चीन ने कहा, ‘हम एक इंच ज़मीन नहीं छोड़ेंगे’

by Shahnawaz Malik 8 months ago Views 1642

After meeting Defense Minister Rajnath Singh, Chin
मॉस्कों में भारत-चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच ढाई घंटे तक चली बैठक बेनतीजा रही. इस मुलाक़ात के बावजूद दोनों के बीच जारी तल्ख़ी में ज़रा भी कमी नहीं आई है. मीटिंग में दोनों देशों ने एलएसी पर जारी विवाद के लिए एक दूसरे पर आरोप मढ़ दिए.

इस मुलाक़ात के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बयान जारीकर कहा, ‘चीनी सैनिका का आक्रामक रवैया, यथास्थिति को बदलने की मनमानी कोशिश, सीमा पर सैनिकों के जमावड़े का यही मतलब है कि चीन ने द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया और कार्रवाई के दौरान दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति को ध्यान में नहीं रख रहा है.’ वहीं चीनी रक्षा मंत्रालय ने एलएसी पर जारी तनाव के लिए पूरी तरह भारत ज़िम्मेदार ठहरा दिया है.


लद्दाख से लगी सीमा पर भारत-चीन के बीच मई से ही तनाव बना हुआ है. इस दौरान सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत की. दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने भी मुलाक़ात की और बातचीत की लेकिन शांति बहाली की दिशा में किसी तरह की प्रगति नहीं दिखाई दे रही है.

मॉस्को में मीटिंग के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा, ‘सीमा प्रबंधन के मामले में भारतीय सैनिकों ने हमेशा ज़िम्मेदारी भरा रवैया अपनाया है लेकिन भारत की संप्रभुता और सीमा सुरक्षा को लेकर उसकी प्रतिबद्धता पर किसी को शक़ नहीं होना चाहिए.’ भारत ने यह भी कहा कि एलएसी पर जल्द से जल्द शांति बहाली और सैनिकों की पूरी तरह वापसी के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी रहनी चाहिए.

चीन ने इसपर सहमति जताई और कहा कि इस विवाद का हल शांतिपूर्ण तरीक़े से निकाला जाना चाहिए. हालांकि चीनी रक्षा मंत्रालय का बयान बेहद आक्रामक रहा. चीन ने कहा, ‘दोनों देशों के बीच संबंध हालिया सीमा विवाद से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

दोनों देशों के बीच इस तनाव का कारण और सच बिल्कुल स्पष्ट है और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी भारत की है. चीन अपनी ज़मीन नहीं छोड़ सकता है. चीनी सेना अपने देश की सीमा सुरक्षा और संप्रभुता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध, समर्थ और आत्मविश्वास से भरी हुई है.’

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बयान से साफ़ है कि बातचीत बेशक चलती रहे हैं लेकिन पश्चिमी सीमा पर उपजा विवाद अब फौरन ख़त्म होने वाला नहीं है. आगे चलकर इस विवाद से दोनों देशों के रिश्त बुरी तरह प्रभावित भी हो सकते हैं.

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