किसान संघ के बाद, आरएसएस के मज़दूर संघ ने एलआईसी आईपीओ का किया विरोध

by GoNews Desk 2 years ago Views 1783

After Kisan Sangh, RSS's Mazdoor Sangh opposes LIC
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के भारतीय मज़दूर संघ (बीएमएस) ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम ( Life Insurance Corporation of India) का इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग या आईपीओ लाने के सरकार के फैसले का विरोध किया है।

भारतीय मज़दूर संघ के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पब्लिक सेक्टर की दिग्गज कंपनी का आईपीओ इश्योरेंस सेक्टर की "पिछले दरवाज़े के निजीकरण" करने की कोशिश है, जिस कंपनी का लाइफ इश्योरेंस सेक्टर में कंज़्युमर मार्केट बेस का 70 फीसदी हिस्सा है। सरकार के समर्थन के बावजूद, बीएमएस ने नवंबर 2022 में राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के निजीकरण के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।


आरएसएस के एक अन्य सहयोगी, भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों का विरोध किया था, जिसे सरकार को किसानों के एक साल लंबे आंदोलन के बाद निरस्त करना पड़ा। किसानों ने सरकार से क़ानूनों को निरस्त किए जाने और उनकी अन्य मांगों पर विचार करने का वादा करने के बाद आंदोलन वापस ले लिया था। कई विश्लेषकों का मानना ​​है कि चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान, ख़ासकर पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, आंदोलन का प्रतिकूल प्रभाव महसूस किया जा रहा है।

केन्द्र सरकार बजट घाटे को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है और एलआईसी आईपीओ का निर्णय सरकारी स्वामित्व वाली फर्मों में 'विनिवेश (Disinvestment)' की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है, जो सरकार को इसी वित्तीय वर्ष (2021-22) के भीतर पूरी करनी है जो 31 मार्च को समाप्त हो रहा है।

क्योंकि एलआईसी की बिक्री के बिना और एयर इंडिया की बिक्री के बावजूद इस साल सरकार के लिए विनिवेश के अपने 65,000 करोड़ रूपये के लक्ष्य को पूरा करना असंभव होगा। इस बीच एलआईसी कर्मचारी संघ ने भी केन्द्र के इस फैसले का विरोध किया है। 

संघ ने फैसला किया है कि वो 28 और 29 मार्च को अन्य ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए हड़ताल का समर्थन करेगा और इन दो दिनों में बीमा क्षेत्र के करीब सवा लाख कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे। सरकार ने सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) को कंपनी द्वारा दायर रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस को मंज़ूरी देने के लिए अपने 5 फीसदी शेयरों को जनता को देने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया है।

यह भी तय किया गया है कि जिस दिन आईपीओ जारी होगा, एलआईसी के कर्मचारी पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन करेंगे। एलआईसी कर्मचारी संघ का आरोप है कि सरकार आईपीओ के ज़रिए बड़े पैमाने पर एलआईसी का निजीकरण करने की कोशिश कर रही है।

बाज़ार विश्लेषकों द्वारा एलआईसी को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बीमा कंपनी माना जाता है। सेबी के पास दायर आईपीओ प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक़ एलआईसी की मार्केट कैप 5.4 लाख करोड़ रूपये और कंपनी के मैनेजमेंट में 39 लाख करोड़ रूपये की संपत्ति है। यह अन्य सभी जीवन बीमा कंपनियों की कुल संपत्ति से 3.3 गुना  ज़्यादा है।

एलआईसी का वर्चस्व उसके बाज़ार हिस्सेदारी से समझा जा सकता है- इसमें बीमा पॉलिसियों की कुल संख्या का 70.9 फीसदी और बीमाकर्ताओं द्वारा भुगतान किए गए प्रीमियम का 63.6 फीसदी हिस्सा शामिल है।

कंपनी ने 2020 में 6.24 करोड़ और पिछले साल 7.5 करोड़ बीमा पॉलिसियों की बिक्री की। कंपनी के साथ 13 लाख से ज़्यादा एजेंट जुड़े हैं जो पूरे देश में पॉलिसी बेचने का काम करता हैं। स्पष्ट रूप से बीएमएस को इसके प्रभाव की बखूबी समझ है कि ऐसी कंपनी जिसमें लाखों भारतीय के हित शामिल हैं को शेयर बाज़ार की धक्का-मुक्का में छोड़ दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त महामारी का एलआईसी व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है क्योंकि कंपनी की वार्षिक पॉलिसी बिक्री साल 2021 में 5.25 करोड़ से घटकर 2022 में 1.9 करोड़ रह गई है।

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