हार्ले डेविडसन और जनरल मोटर्स के बाद अब फोर्ड बंद करेगा अपना भारतीय व्यवसाय

by GoNews Desk 8 months ago Views 1780

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अमेरिकी की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्ड मोटर्स ने भारत में अपना व्यवसाय बंद करने का ऐलान किया है। कंपनी के इस ऐलान से 4,000 लोगों की नौकरी पर ख़तरा है। कंपनी के जारी बयान में बताया गया कि फोर्ड इंडिया तत्काल प्रभाव से देश में बिक्री के लिए वाहन का निर्माण बंद कर देगी। वहीं गुजरात के साणंद में इसके प्लांट में निर्यात के लिए कारों का निर्माण 2021 की चौथी तिमाही जबकि चेन्नई प्लांट को 2022 की दूसरी तिमाही में बंद कर दिया जाएगा। 

बयान में कहा गया कि फोर्ड भारत में वाहन निर्माण बंद करते हुए अपनी चेन्नई स्थित फोर्ड बिजनेस सॉल्यूशंस टीम का विस्तार कर कुछ प्रतिष्ठित ग्लोबल वाहनों और इलेक्ट्रिक एसयूवी को बाज़ार में लाने की योजना के साथ अपने संचालन का पुनर्गठन करेगी।

ग़ौरतलब है कि फोर्ड तीसरी अमेरिकन कंपनी है जो भारत में अपना व्यवसाय बंद कर रही है। इससे पहले 2020 में हार्ले डेविडसन और 2017 में जनरल मोटर्स ने देश में व्यवसाय बंद कर दिया था। इन कंपनियों का भारत में असफल होने के दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। इनमें से एक भारतीय बाज़ार में बजट के अनुकूल, उच्च मूल्य वाले निर्माताओं जैसे मारुति सुजुकी और हुंडई का दबदबा है, जबकि कुछ जानकारों का कहना है कि वाहनों पर लगने वाले उच्च कर कंपनियों की सफलता को कम कर रहे हैं। भारत में मोटर वाहनों पर 28 फीसदी तक टैक्स वसूला जाता है। 

आलोचकों का कहना है कि भारतीय बाज़ार से फोर्ड का जाना पीएम मोदी की पहल ‘मेक इन इंडिया’ के लिए एक और झटके की तरह है जिसके तहत स्थानीय निर्माण को समर्थन देने पर ज़ोर दिया गया था। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2021 में निर्माण क्षेत्र में 10 लाख नौकिरयों का नुकसान हुआ है। खासतौर पर भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र को 2019 में संकट के दौर से गुज़रना पड़ा था। ये संकट देश में महामारी की दस्तक से और गहरा गया था। 

जानकार फोर्ड की भारतीय बाज़ार से निकासी को ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़े संकट के तौर पर भी देख रहे हैं। पिछले 20 सालों में साल 2019 इस क्षेत्र के लिए सबसे संकटग्रस्त दौर रहा। जुलाई 2019 में क्षेत्र में 2.3 लाख नौकरियों खत्म हो गई थी। वित्त मंत्री ने इसस संकट का श्रेय ओला और उबर पर अधिक निर्भरता को दिया था। उन्होंने कहा था कि मिलेनियल (युवाओं) का ओला और उबर जैसी सेवाओं पर निर्भर रहना ऑटोमोबाइल क्षेत्र के सुस्त होने की एक वजह है। इस बयान के चलते उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। 
 
आंकड़े देखें तो पता चलता है कि यात्री वाहनों की बिक्री में भी पिछले सालों में कमी आई है। SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटो मैन्युफैक्चरर्स) के मुताबिक 2018 के मुकाबले अप्रैल-नवंबर 2019 में 17.98 फीसदी की कमी आई थी जबकि कार रेटिंग्स के मुताबिक यात्री वाहनों की बिक्री में 2020-21 में 12 फीसदी की कमी देखी गई थी।

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