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पतंजलि समेत तमाम नामी ब्रांड के शहद में चीनी सिरप की मिलावट, सीएसई की जाँच में ख़ुलासा

by GoNews Desk 5 months ago Views 1747

इस गोरखधंधे में बाबा रामदेव की पतंजलि से लकर डाबर जैसे ब्रांड तक शामिल हैं। हालाँकि सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के इस जाँच नतीजे को उन्होंने ख़ारिज किया है।

Adulteration of sugar syrup in honey of various we
कोरोना काल में शहद का इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। सर्दी-ज़ुकाम के लिए बनने वाले काढ़े में पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल होता आया है। बहुत लोग कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए दैनिक रूप से ऐसा काढ़ा पी रहे हैं। लेकिन उन्हें इस ख़बर से झटका लग सकता है कि जिन बड़े-बड़े ब्रांड्स पर वे भरोसा करके शहद ख़रीदते हैं, उनमें ज़्यादातर मिलावटी हैं।

उनमें चीन में बने सिरप की बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही है। इस गोरखधंधे में बाबा रामदेव की पतंजलि से लकर डाबर जैसे ब्रांड तक शामिल हैं। हालाँकि सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के इस जाँच नतीजे को उन्होंने ख़ारिज किया है।


सीएसई की ओर से की गयी जाँच रिपोर्ट बताती है कि 77 फ़ीसदी नमूनों में शुगर सिरप की मिलावट पायी गयी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनएमआर) परीक्षण में 13 में से महज़ 3 ब्रांड्स ही पास हो सके। सीएसई का कहना है कि चीन की कंपनियों ने इस तरह के शुगर सिरप बनाये हैं जो भारतीय जाँच मानकों पर आसानी से खरे उतरते हैं। इसलिए नमूनों की भारतीय और जर्मनी की प्रयोगशालाओं में गहराई से पड़ताल की गयी।

सीएसई के फूड सेफ्टी एंड टॉक्सिन टीम के कार्यक्रम निदेशक अमित खुराना के मुताबिक इस मिलावट को पकड़ पाना बेहद जटिल और कठिनाई भरा है। शुगर सिरप इस तरह से बनाये गये हैं कि उसके तत्वों को पहचाना न जा सक। इस परीक्षण में डाबर, पतंजलि, वैद्यनाथ, झंडु, हितकारी, एपिस हिमालय जैसे ब्रांड एनएमआर टेस्ट में फेल हो गये। सिर्फ सफोला, मार्कफेड सोहना और नेचर्स नेक्टर ब्रांड के शहद ही परीक्षण में खरे उतरे हैं।

पहले शहद का ऐसा परीक्षण नहीं होता था। लेकिन 1 अगस्त 2020 से शहद का एनएमआर परीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। चीन की कंपनियाँ फ्रुक्टोज़ के रूप में इस सिरप को भारत भेजती हैं। सीएसई ने पाया की अलीबाबा जैसे चीन के व्यापारिक पोर्टल अपने विज्ञापन में भी कहते हैं कि उनका फ्रुक्टोज़ सिरप भारतीय परीक्षणों को बाईपास कर सकता है।  सीएसई ने इसके लिए अंडरकवर आपरेशन चलाया था। चीन की कंपनियों की ओर से उन्हें जानकारी भेजी गयी कि यदि शहद में उनका सिरप 50 से 80 फीसदी तक मिलाया जाये तो वे भारतीय परीक्षणों में पास हो जायेंगे।

सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा है कि उन्होंने मिलावट का खेल सामने ला दिया है। अब सरकार की ज़िम्मेदारी है कि परीक्षण की व्यवस्था सुदृढ़ की जाये। कंपनियों को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाये।

इस ख़बर के सामने आने पर शहद बनाने वाली बड़ी कंपनियों में खलबली है। डाबर ने सीएसई की रिपोर्ट को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए अपने शहद को सौ फ़ीसदी शुद्ध और स्वदेसी होने का दावा किया है, वहीं पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर ने इसे भारतीय निर्माताओं को बदनाम करने की साज़िश क़रार दिया है।

बहरहाल, एनएमआर परीक्षण से इस बात का भी पता चल सकता है कि कौन सा शहद किस ख़ास फूल से कब और किस देश में निकाला गया है। इसलिए इस परीक्षण में चूक की गुंजाइश नहीं है।

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