जज के पद पर नियुक्ति के लिए 68 नाम, पांच साल पहले इसी के लिए रो पड़े थे तत्कालीन CJI

by GoNews Desk 8 months ago Views 1375

साल 2016 में मुख्यमंत्रियों के एक कांफ्रेंस के दौरान कोर्ट में जजों के खाली पदों और नियुक्तियां नहीं होने को लेकर तत्कालीन मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर रो पड़े थे...

68 names for appointment to the post of judge, the
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देशभर के उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में जज के रिक्त पदों को भरने के लिए 68 नामों की सिफारिश की है। इनमें 11 महिलाएं शामिल हैं। यह पहली बार है जब कॉलेजियम ने एक साथ इतने नामों को मंज़ूरी दी है। सीजेआई एनवी रमन्ना की अगुवाई में तीन जजों के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने यह सिफारिश 12 हाई कोर्ट में नियुक्तियों के लिए  की है।

जिन हाई कोर्ट में नियुक्तियों की सिफारिश की गई है उनमें - इलाहाबाद, राजस्थान, कलकत्ता, झारखंड, जम्मू और कश्मीर, मद्रास, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और हरियाणा, केरल, छत्तीसगढ़ और असम के हाई कोर्ट शामिल हैं। 25 अगस्त और 1 सितंबर को हुई कॉलेजियम की बैठकों में 112 उम्मीदवारों में 68 की सूची तैयार की गई। इनमें 44 बार से और 24 न्यायिक सेवा से जुड़े हैं।


न्याय विभाग के मुताबिक़ 1 सितंबर तक 25 हाई कोर्ट में 465 पद खाली थे। इनमें स्थायी जजों के 281 और अतिरिक्त जजों के 184 पद खाली थे। जबकि देशभर के इन हाई कोर्ट में कुल जजों की संख्या 1,098 होनी चाहिए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में 68 पद खाली हैं जहां नियुक्ति के लिए 16 नामों को मंज़ूरी दी गई है। इनके अलावा पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में 40 पद खाली हैं जहां नियुक्ति के लिए चार नामों को मंज़ूरी मिली है और कलकत्ता हाई कोर्ट में 36 पद खाली हैं और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने यहां नियुक्ति के लिए दस नामों की सिफारिश की है।

वहीं केरल हाई कोर्ट में नियुक्ति के लिए आठ, राजस्थान हाई कोर्ट में सात, झारखंड हाई कोर्ट में पांच और गुवाहाटी हाई कोर्ट में भी पांच नामों को मंज़री दी गई है। इससे पहले सीजेआई रमन्ना की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जजों के पद पर नियुक्ति के लिए एक साथ 9 नामों की सिफारिश की थी जिसे केन्द्र ने मंज़ूर किया था।

इनमें तीन महिला समेत सभी ने 31 अगस्त को शपथ ली है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 32 हो गई है और सिर्फ एक पद खाली हैं। उससे पहले कॉलेजियम ने 17 अगस्त को तेलंगाना हाई कोर्ट में नियुक्ति के लिए सात नामों को मंजूरी दी थी।

ग़ौरतलब है कि देश के न्यायिक संस्थानों में जजों की नियुक्ति का मामला बहुत पुराना है। आपको याद हो- साल 2016 में मुख्यमंत्रियों के एक कांफ्रेंस के दौरान कोर्ट में जजों के खाली पदों और नियुक्तियां नहीं होने को लेकर तत्कालीन मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर रो पड़े थे। इस कांफ्रेंस में ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल थे लेकिन इसके चार साल बाद अब सुधार देखने को मिल रहा है।

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