65 फीसदी लोगों की आय घटी, 80 फीसदी महंगाई से परेशान

by M. Nuruddin 10 months ago Views 1647

65 percent of people's income declined, 80 percent
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कम होने के बाद लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट और एम्पलॉयमेंट रेट दोनों ही में सुधार देखा गया है, लेकिन नौकरी की क्वालिटी कमज़ोर हुई है। मसलन महामारी की लहरों में नौकरीपेशा वालों पर गाज़ गिरी है और यह वर्ग महामारी से नहीं उबर पाया है। सेलरिड क्लास वालों की नौकरी में कोई ख़ास सुधार नहीं हुआ है।

महामारी की दूसरी लहर के बाद लेबर फोर्स पर्सिप्शन रेट और एम्पलॉयमेंट रेट में सुधार दिहाड़ी और खेतिहर मज़दूरों की वजह से हो रहा है। अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने सीएमआइई, आरबीआई और एमओएसपीआइ के हवाले से एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें बताया गया है कि महामारी के बाद भी हालात में सुधार नहीं हो रहे हैं।


मसलन रिपोर्ट में 2012 से जुलाई 2021 तक के आंकड़े दिए गए हैं जिसके मुताबिक़ रोजगार जहां बढ़ रहा था वो अब घट रहा है। एक सर्वे के मुताबिक़ 80 फीसदी लोग मानते हैं कि रोजगार के हालात महामारी की वजह से बिगड़ गए हैं। इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था की हालत भी बिगड़ रही है। सर्वे में शामिल 70 फीसदी से ज़्यादा लोग मानते हैं महामारी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था की हालत बिगड़ रही है।

महामारी में अर्थव्यवस्था की हालत बिगड़ने और रोजागर की हालत ख़राब होने की वजह से लोगों की आय में कमी आई है। सर्वे के मुताबिक़ 65 फीसदी से ज़्यादा लोग मानते हैं कि महामारी के बाद उनके इन्कम में कमी आई है। एक तरफ तो लोगों का इन्कम कम हो ही रहा है लेकिन दूसरी तरफ सामानों की कीमतें भी बढ़ रही है। ऐसे में लोगों के कॉन्फिडेंस लेवल में भी गिरावट देखी गई है।

रिज़र्व बैंक ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी कर बताया था कि कंज़्युमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स जुलाई महीने में गिरकर 48.6 पर आ गया है। सीसीआई का गिरना लोगों की नौकरियां और इन्कम में कमी और महंगाई बढ़ने की आशंका को बढ़ाती है। सीसीएस आर्थिक प्रदर्शन, विशेष रूप से निजी खपत का एक उपयोगी संकेतक है। ऐसे में ये कहना भ्रामक है कि पूरी अर्थव्यवस्था में सुधार आ रहा है।

ताज़ा वीडियो