भारतीय शहरों की 60 फ़ीसदी आबादी अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंतित: रिपोर्ट

by GoNews Desk 1 year ago Views 3442

60% population of Indian cities worried about thei
कोरोना वायरस की वैक्सीन आने के बावजूद शहरों में रहने वाले 60 फीसदी आबादी अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंतित है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना से शहरों के 60 फीसदी से ज़्यादा लोगों की वित्तीय स्थिति कमज़ोर हुई है। इसके चलते उनके ख़र्च करने के तरीके में बदलाव आया है। आपको बता दें कि डेटा एनालिटिक्स फर्म नीलसन की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति अन्य देशों के मुकाबले ज़्यादा नाज़ुक है। ख़र्च करने के तरीके में यह बदलाव दुनिया के अन्य देशों के मुक़ाबले भारत में ज़्यादा है। नीलसन की रिपोर्ट में ऐसे कंज्यूमर की संख्या 60 फीसदी से ज़्यादा है जबकि ग्लोबल एवरेज 46 फीसदी है। इससे पता चलता है कि भारतीय उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति कोरोना के कारण ज़्यादा बिगड़ी है और इसका सीधा सीधा असर उनके खरीदारी और ख़र्च पर देखने को मिल रहा है।


इसके अलावा, नीलसन द्वारा 16 देशों में किए गए अध्ययन से पता चला है कि शहरी भारत के एक तिहाई से अधिक लोग साल 2021 के पहली छमाही में अपने इनकम में सुधार की कोई उम्मीद नहीं कर रहे हैं। इसी के साथ इनकम में सुधार को लेकर निराशा तेज़ी से बढ़ती जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के चलते इनकम प्रभावित होने से उपभोक्ताओं की ख़र्च करने की आदत बदल गई है। बड़ी संख्या में शहरों के उपभोक्ता अपने घर का बजट मैनेज करने के लिए नए तरीके आज़मा रहे हैं। 46 फीसदी उपभोक्ता ब्रांड के मुकाबले सबसे सस्ती चीज़ें खरीद रहे हैं, वहीं 50 फीसदी की पंसद ब्रांड है। इसके अलावा, 45 फीसदी का कहना है कि वे प्रोमोशन वाले प्रोडक्ट खरीद रहे हैं।

लेकिन 61 फीसदी उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी पहली पसंद ब्रांड है और वो अपने ब्रांड में तभी बदलाव करेंगे जब इनकी कीमतें बढ़ जाएंगी।

सर्वे के मुताबिक, 31 फीसदी भारतीय उपभोक्ताओं ने कहा कि अगर आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो वे ग्रॉसरी पर कम खर्च करेंगे जबकि 26 फीसदी ने कहा कि वे अधिक खर्च करेंगे। इसके अलावा, 90 फीसदी उपभोक्ता विभिन्न प्रकार के अच्छी क्वालिटी वाले प्रोडक्ट को ज़्यादा कीमत पर भी खरीदना पसंद करेंगे, 83 फीसदी सीधे निर्माताओं से खरीदने के लिए तैयार हैं और 79 फीसदी उपभोक्ता अधिक भुगतान करेंगे अगर प्रोडक्ट की क्वालिटी अच्छी हो।

पर कुल मिलाकर अगर इस रिपोर्ट को देखें तो यह तो साफ़ साफ़ पता चलता है कि कोरोना ने जितनी चोट भारतीयों की जेब पर पहुँचाई है वो बाक़ी देशों के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा है।

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