5 Points: क्या आपको LIC IPO में निवेश करना चाहिए ?

by M. Nuruddin 3 months ago Views 1855

5 Points: Should you invest in LIC IPO?
भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ मार्च महीने के मध्य तक दलाल स्ट्रीट पर दस्तक दे सकता है। इस बीच फर्स्ट टाइम निवेशकों के मन में कई सवाल हैं। वे इस कशमकश में हैं कि एक ख़राब समय में लाए जा रहे कंपनी के आईपीओ में निवेश करना ठीक रहेगा या नहीं। निवेश से पहले कंपनी के बारे में थोड़ा होमवर्क करना बहुत ज़रूरी है।

मसलन जिस कंपनी में निवेश की आपकी योजना है, उस कंपनी का आने वाले समय में कैसा रिटर्न रहेगा, निवेश करने पर आपको क्या मिलेगा, कंपनी के पॉलिसीहोल्डर के तौर पर आपको क्या फायदा या नुक़सान हो सकता है। आइए हम कंपनी के कुछ मेट्रिक्स पर ग़ौर करते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि LIC IPO में निवेश आपके लिए फायदेमंद है या नहीं।


जैसा की Gonewsindia ने आपको पहले बताया था कि- सेबी को दायर दस्तावेज़ में कंपनी ने बताया है कि इसका मार्केट कैप 5.4 लाख करोड़ रूपये है यानि 72 अरब डॉलर। 31 मार्च से पहले सरकार इसके स्टॉक को मार्केट में बेचकर अपने 2021-22 के बजट खातों को संतुलित करना चाहती है।

विश्लेषकों के अनुमानों के मुताबिक़, 2021 में लिस्ट होने वाली एक तिहाई कंपनियां अब अपने शेयरों को अपने लिस्टिंग मूल्य से कम पर बेच रही हैं। पेटीएम और कारट्रेड जैसी कुछ प्रमुख कंपनियां अपने शुरुआती पेशकश मूल्य से 50-60 फीसदी कम पर बेच रही हैं

1) Life Insuarance Industry में LIC की एक महत्वपूर्ण मौजूदगी है लेकिन कुछ समय से कंपनी प्राइवेट खिलाड़ियों की वजह से अपनी बाज़ार हिस्सेदारी खो रही है। लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री में परसिस्टेंसी रेशियो एक महत्वपूर्ण बेंचमार्क होता है जो उन पॉलिसीधारकों (Policyholders) की संख्या को दर्शाता है जिन्होंने एक तय समय में अपने प्रीमियम का रेन्युअल कराया।

इसे व्यापक रूप से बिक्री की क्वालिटी  के साथ-साथ कंपनी के भविष्य के ग्रोथ के रूप में देखा जाता है जो LIC का 13वें महीने के लिए 78.8 फीसदी, 25वें महीने के लिए 70.9 फीसदी और वित्त वर्ष 22 की पहली छमाही यानि 61वें महीने के लिए 60.6 फीसदी था।

जबकि प्राइवेट बीमा कंपनियों की परसिस्टेंसी रेशियो कहीं बेहतर 90-95 फीसदी तक है। साथ ही, एलआईसी का सीएजीआर (CAGR- Compound annual growth rate) 14 फीसदी रहा है जबकि समान अवधि में प्राइवेट बीमा कंपनियां 18 फीसदी सीएजीआर से बढ़ी है।

2) अगर हम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को देखें तो कई ऐसी कंपनियां हैं जो या तो घाटे में चल रही है या बिकने की कगार पर है। अगर आगे किसी कंपनी के साथ दिवालिएपन का संकट पैदा होता है तो सरकार इस तरह की विशाल कंपनी का इस्तेमाल कर सकती है।

अब IDBI बैंक को ही देख सकते हैं जिसमें कंपनी ने जनवरी 2019 में 21,600 करोड़ रूपये का निवेश कर बैंक की 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इतना ही नहीं कंपनी ने उसी साल अक्टूबर महीने में IDBI बैंक में 4,743 करोड़ रूपये का अतिरिक्त निवेश किया।

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चुंकी यह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है और इसका कंट्रोल सरकार के हाथों में है, तो इन्हें सरकार के निर्देशों पर काम करना होता है। इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं।

3) LIC का VNB (value of the new business) मार्जिन अपने प्रतिद्वंदियों की तुलना में उतना ख़ास भी नहीं है। एलआईसी का वीएनबी मार्जिन वित्त वर्ष 2020-21 में 9.9 फीसदी था, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 के छह महीने में 9.3 फीसदी था।

अब यहां यह नहीं कहा जा सकता कि कंपनी के वीएनबी पर कोरोना महामारी का प्रभाव पड़ा क्योंकि समान अवधि में अन्य बीमा कंपनियों, जो आमतौर पर प्राइवेट खिलाड़ी हैं, का वीएनबी 20-25 फीसदी रहा है।

4: सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बाज़ार में लिस्टिंग के बाद बीमा कंपनी को अपने पॉलिसीधारकों और शेयरधारकों के बीच संतुलन बनाकर रखना होगा। LIC पहले अपने सरप्लस प्रोफिट का 95 फीसदी हिस्सा अपने पॉलिसीहोल्डर्स के साथ साझा करती थी लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है।

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अब पॉलिसीधारकों के साथ प्रोफिट-शेयरिंग रेशियो को कम कर दिया गया है। पहले कंपनी अपने प्रोफिट सरप्लस का पांच फीसदी ही अपने शेयरधारक को ट्रांसफर कर सकती थी और 95 फीसदी पॉलिसीधारकों को बोनस के रूप में दिया जाता था। जबकि अन्य बीमा कंपनियों का सरप्लस प्रोफिट रेशियो 90:10 था।

अब चरणबद्ध तरीके से सरकार पॉलिसीधारक और शेयरधारकों के बीच एलआईसी के लिए भी इसी नियम को संशोधित कर 90:10 करने जा रही है। 

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक़ एलआईसी का सरप्लस प्रोफिट शेयरिंग रेशियो वित्त वर्ष 2022 के लिए 95:5 ही रहने वाला है जो अगले महीने समाप्त हो रहा है।

हालांकि इसके बाद वित्त वर्ष 2023 और 2024 के लिए इसे 92.5:7.5 किया गया है और वित्त वर्ष 2025 के बाद यह अन्य बीमा कंपनियों की ही तरह 90:10 कर दिया जाएगा, जो संभावित है कि कंपनी के पॉलिसीहोल्डर पर इसका असर पड़ेगा और इसके ग्राहक प्राइवेट खिलाड़ी की तरफ अपना रुख़ कर सकते हैं।

5) हमने आपको कंपनी की सभी मेट्रिक्स पर उसके स्कोर और उसके परफोर्मेंस के बारे में बताया। जैसे कि कंपनी का सरप्लस प्रोफिट शेयरिंग रेशियो अब अन्य बीमा कंपनियों की ही तरह समान कर दिया जाएगा।

कंपनी का वीएनबी घट रहा है जो किसी भी कंपनी के लिए रिटर्न को दर्शाता है और कंपनी के परसिस्टेंसी रेशियो जो कंपनी का अपने प्रतिद्वंदी के मुक़ाबले घट ही रही है और जिससे कंपनी के भविष्य के ग्रोथ के बारे में पता चलता है।

इन सभी को ध्यान में रखते हुए आप फैसला कर सकते हैं कि आपको इसका IPO लेना चाहिए या नहीं। अब अगर आप सभी डाउन मेट्रिक्स के बावजूद कंपनी की श्रेष्ठता उसके विशाल नेटवर्क को मानते हैं तो उस लीवरेज का लाभ उठाना मुश्किल ही है।

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