2050 तक 21.6 करोड़ लोगों पर विस्थापन का खतराः विश्व बैंक

by GoNews Desk 1 month ago Views 1645

internal migration

विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि साल 2050 तक दुनियाभर के 21.6 करोड़ लोगों पर विस्थापन का ख़तरा है। ग्राउंड्सवेल नाम से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले समय में दुनियाभर में आंतरिक विस्थापितों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो सकती है। 

सस्सटनेबल डेवलपमेंट या सतत विकास, विश्व बैंक के उपाध्यक्ष, जुएर्गन वोगेले ने रिपोर्ट के बारे में कहा कि यह “जलवायु परिवर्तन मानवीय नुक़सान की ओर एक इशारा है। (ख़तरा) ख़ासकर दुनिया के सबसे ग़रीब लोगों के लिए है जो इसकी वजहों में अपना योगदान सबसे कम दे रहे हैं।” इस रिपर्ट के प्रकाशित होने से एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि पर्यावरणीय ख़तरा ‘मानवाधिकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।’ 

रिपोर्ट बताती है कि आने नावे समय में पानी की कमी, कम फसल उत्पादन, समुद्र के स्तर में बढ़ोतरी और तूफानों की बढ़ती संख्या प्रवास का कारण बनेंगे। जबकि गर्मी के तनाव, गंभीर मौसम की घटनाएं और ज़मीनी नुक़सान की वजह से क्षेत्रों में आवास की संभावना कम हो जाएगी। 

रिपोर्ट में भारत समेत दक्षिण एशियाई क्षेत्र के 3-4 करोड़ आंतरिक प्रवासियों को असमान विकास और उच्च उत्सर्जन वाले सबसे निराशावादी परिदृश्य में अनुमानित किया गया है। यानि कि इतने लोग देश या राज्य के एक हिस्से को छोड़कर दूसरे हिस्से में प्रवास कर सकते हैं। वहीं कम उत्सर्जन और मध्यम विकास की स्थिति में भी 1-2  करोड़ लोग आंतरिक प्रवासी बन सकते हैं।

अन्य ख़तरे वाले क्षेत्रों में सब सहारा अफ्रीका शामिल है, जहां हालात सबसे अच्छे और सबसे बुरे हैं। वहां आने वाले समय में लगभग 3 करोड़ से 7 करोड़ आंतरिक प्रवासियों की संख्या बढ़ने का अनुमान है। इसके बाद पूर्वी एशिया और पैसिफिक क्षेत्र में सबसे ख़राब हालातों में 3  करोड़ जबकि सबसे अच्छी स्थिति में 2 करोड़ लोगों के आंतरिक प्रवास करने की आशंका है।

रिपोर्ट में Internal Displacement Monitoring Centre (IDMC) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि 2020 में 4.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे, जिनमें से 3.7 करोड़ लोग के विस्थापन का कारण आपदा थी। मौसमी आपदाओं में ज़्यादातर लोग तूफान और बाढ़ के कारण विस्थापित हुए थे। ज़्यादातर नए विस्थापन पूर्वी एशिया एवं पैसिफिक क्षेत्र और दक्षिण एशिया में हुए। वहां क्रमशः 12 लाख और 92 लाख लोग विस्थापित हुए थे। 

ग़ौरतलब है कि विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भी हाल ही में अपनी रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया है कि 1970 के दशक के बाद से मौसम संबंधी आपदाएं सबसे ज़्यादा और सबसे अधिक हानिकारक रही हैं। इस रिपोर्ट में मौत और तबाही का मुख्य कारण पानी आधारित आपदाओं को बताया गया था।

आईडीएमसी का कहना है कि 2020 के अंत में 5.5 करोड़ लोग विस्थापित परिस्थितियों में रह रहे थे। संघर्ष और हिंसा के कारण 4.8  करोड़ लोग विस्थापित हुए, जबकि मौसम संबंधी आपदाओं के कारण विस्थापित हुए लोगों का प्रतिशत 12.72 था। 

उस पर भी COVID-19 महामारी ने जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित लोगों के प्रवास और आजीविका के विकल्पों को और मुश्किल बना दिया है। रिपोर्ट में मई 2020 में बांग्लादेश और पूर्वी भारत, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में आए चक्रवात अम्फान का हवाला दिया गया है। इस दौरान कोरोना को रोकने के लिए लगी पाबंदियों के कारण लोग जोखिम वाले क्षेत्रों को छोड़ नहीं पा रहे थे।

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