असम सरकार के फ़ैसले से एक झटके में 20,000 लोग बेघर

by GoNews Desk 9 months ago Views 1832

20,000 people homeless in Assam

असम सरकार इन दिनों ‘अवैध अतिक्रमण’ के खिलाफ अभियान चला रही है। सरकार के आदेशों पर सोमवार को असम के दरांग जिले के धालपुर गांव में 800 घरों को ढहा दिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ढहाए गए घरों की संख्या 900 है। दरअसल सरकार इन लोगों से खाली कराई गई ‘4,500 बीघा जमीन’ पर सरकारी भूमि का कृषि उद्देश्यों के लिए उपयोग’ वाली परियोजना को लागू करना चाहती है। 

गुरखूटी परियोजना राज्य सरकार के बजट का हिस्सा थी और इसके लिए 9.60 करोड़ की राशि निर्धारित की गई थी। इसी परियोजना के चलते 20 सितंबर को 800 परिवारों के घर ढहा दिए गए हैं और अब इन परिवारों के 20,000 लोग बेघर हो गए हैं। 

गुवाहाटी स्थित एक मीडिया आउटलेट के मुताबिक सरकार ने दरांग जिले के सिपाझार राजस्व मंडल के तहत आने वाला धालपुर नं. 1 और धालपुर नं. 3 क्षेत्रों में कार्रवाई की है। यह गांव उन क्षेत्रों में से है जहां पूर्वी बंगाल के मूल मुस्लमानों की आबादी बहुत ज़्यादा है। ग़ौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है कि जब शर्मा सरकार ने ‘अवैध अतिक्रमण’ के खिलाफ ऐसी कड़ी कार्रवाई की हो। 

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी ही एक कार्रवाई के दौरान जून में होजाई के लंका में 70 और सोनितपुर के जमुगुरीहाट में 25 परिवारों बेघर हो गए थे जबकि मई के महीने में भी सरकार की तरफ से विश्वनाथ, नागांव और मोरीगांव जिलों में ‘अतिक्रमण’ के खिलाफ ऐसी कार्रवाई देखने को मिली थी। 

इस तरह के कदमों को उचित ठहराने के लिए सरकार की तरफ से कई दावे किए गए हैं। स्थानीय अखबरों के मुताबिक जून में 120 बीघा ज़मीन साफ कराई गई थी जो कि कथित तौर पर  प्रागैतिहासिक काल के शिव मंदिर से संबंधित है हालांकि ‘अतिक्रमण’ के खिलाफ उठाए गए इन कदमों का जायज़ा लेने पहुंची फैक्ट फाइंडिंग कमेटी टीम के कुछ और तर्क हैं। इस कमेटी ने अपने दौरे के बाद बताया कि जिला प्रशासन की इस कार्यवाही में 49 मुस्लमान परिवार और 1 हिंदु परिवार को बेघर कर दिया गया है। 

कमेटी ने बताया कि इस इलाके में वह लोग रहते हैं जो 1983 में असम आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद वहां बस गए थे। कमेटी ने भाजपा शासित सरकार की भी इस कार्यवाही के लिए काफी आलोचना की थी। कमेटी ने कहा था कि ऐसी झूठी जानकारी दी जा रही है कि खाली कराई गई ज़मीन का ज़्यादातर हिस्सा शिव मंदिर का था जबकि ‘प्रागैतिहासिक काल’ के मंदिर की स्थापना उन हिंदू परिवारों में से एक ने की थी जो 1980 के दशक में इस क्षेत्र में बस गए थे।

प्रशासन बार बार इन लोगों को ‘अवैध निवासी’ बता रहा है जबकि द वायर के मुताबिक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि प्रभावित लोग जब उनसे मिलने पहुंचे तब वह अपडेटेड राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) में अपने नाम का प्रमाण साथ लाए थे। 

बिना किसी पुनर्वास योजना के हज़ारों को लोगों को उनके घरों से बेदखल कर सरकार से आलोचनाओं को न्योता दिया है। खासकर ऐसे समय में जब देश में महामारी के कारण कई पाबंदियां लागू हैं। यहां तक कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 10 मई 2021 को अपने एक आदेश में बेदखली/बेदखल करने या तोड़ने के फरमान को रोक कर रखने के आदेश दिए थे।

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