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20 लाख करोड़ के पैकेज से अर्थव्यवस्था को ख़ास गति नहीं मिली : CAG

by Rahul Gautam 7 months ago Views 901

20 lakh crore package did not give special momentu
भारतीय अर्थव्यवस्था किस कदर के मुश्किल हालात से गुज़र रही है, ये किसी से छुपा नहीं है। अब ताज़ा आंकड़े और भयानक तस्वीर पेश कर रहे है। सीएजी के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जुलाई में भारत सरकार के खर्च में केवल 11.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा पहुंच गया 10.5 लाख करोड़ जबकि इसी काल में मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था में जान फुंकने के लिए 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया था। आसान भाषा में कहे तो उस आर्थिक पैकेज से अर्थव्यवस्था को कुछ ख़ास गति नहीं मिली।

आंकड़ों के मुताबिक सरकारी खर्च भले ही मामूली रूप से बढ़ा हो लेकिन अलग अलग चीज़ो पर सरकारी सब्सिडी या रियायत में 30 फीसदी की भारी कमी दर्ज़ हुई। यह वो खर्च है जो सरकार सबसे गरीब तबको पर खर्च करती है जैसे किसान और असंगठित क्षेत्र के मजदूर। आप अंदाज़ा लगा सकते है की कोरोना काल में ऐसे लोगो को बिना सब्सिडी के कितनी मुश्किलें झेलनी पड़ी होगी। इसके अलावा अगर बात करें की अप्रैल से जून की तिमाही में सरकार ने किन क्षेत्रों में खर्च की कटौती की, तो वो है रोड बनाना, शहरी विकास और पुलिस व्यवस्था पर पैसा कम खर्च किया।


लेकिन सवाल है आखिर पैसा गया कहा ? तो जवाब है की असल में सरकार का ख़ज़ाना खुद खाली है और इसी वजह से उसके हाथ में पैसा नहीं है। गो-न्यूज़ पहले भी रिपोर्ट कर चुका है कि चालू वित्त वर्ष के 4 महीने में ही सरकार ने अपने निर्धारित वित्त घाटे के लक्ष्य को पार कर चुकी है।

कैग के आंकड़ों के मुताबिक राजस्व यानि कमाई और व्यय यानि खर्च के बीच अंतर जुलाई महीने में ही 8.21 लाख करोड़ रुपये या बजटीय अनुमान के 103 फ़ीसदी तक पहुंच गया। बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में सरकार बजट लक्ष्य के 79 फ़ीसदी के आंकड़े पर थी। बता दें कि केंद्रीय बजट 2020-21 में देश का अनुमानित राजकोषीय घाटा लक्ष्य 7.96 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि अब उम्मीद की जा रही है कि इसे संशोधित किया जाएगा क्योंकि सरकार इस वित्त वर्ष के अभी 8 महीने बचे है।

अगर बात करें कमाई की तो सरकार जुलाई तक अपने राजस्व के निर्धारित लक्ष्य का 11.3 फ़ीसदी ही उगा पाई है। हालांकि बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में सरकार ने अपने लक्ष्य के मुकाबले 19.5 फ़ीसदी का लक्ष्य हासिल कर लिया था। बता दें कि अप्रैल-जुलाई 2020 में सरकार का राजस्व 2.27 लाख करोड़ रुपये था।

आसान भाषा में कहें तो केंद्र सरकार की आय के स्रोत कम हो रहे हैं और योजनाओं को चलाने के लिए हाथ में पैसे नहीं हैं. अक्टूबर के महीने में दूसरी तिमाही के नतीजे आने वाले हैं जो बताएंगे की अर्थव्यवस्था कितने दबाव में है।

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