भारत में बच्चों में कुपोषण का अनुपात बढ़ा

by Rahul Gautam 11 months ago Views 1314

जीएचआइ की नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 14 फीसदी आबादी कुपोषण का शिकार है। वहीं भारत के बच्चों में स्टंटिंग रेट 37.4 फीसदी है।

14% of India's population malnourished, child maln
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-20 के ताज़ा आंकड़ों ने बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की है। देश के कई राज्यों के बच्चों में कुपोषण घटने के बजाय बढ़ता जा रहा है। 2015-16 में पिछले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की तुलना में कई बड़े राज्यों में, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण का अनुपात बढ़ गया है। यहां तक कि गुजरात और महाराष्ट्र जैसे अमीर समझे जाने वाले राज्यों ने में भी 2015 के बाद से अपने बच्चों के पोषण कल्याण में गिरावट दर्ज हुई है।

आर्थिक तरक्की की एक कसौटी यह भी है कि लोगो को पौष्टिक भोजन मिले।आँकड़ों के मुताबिक गुजरात में 2015-16 के मुकाबले 2019-20 में 5 साल से काम उम्र के बच्चों में कुपोषण का अनुपात 0.5 फीसदी बढ़ा है। इसी तरह 5 साल से कम उम्र के बच्चों के कुपोषण के अनुपात में महाराष्ट्र में 0.6 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 1.3 फीसदी और तेलंगाना में 3.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।लेकिन सबसे चौकाने वाले आंकड़े हैं केरल के जहाँ 3.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है।


भारत में भूखमरी की ज़मीनी हकीकत 2020 की ग्लोबल हंगर इंडेक्स की सालाना रिपोर्ट भी पेश करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़ 107 देशों की सूची में भारत 94वें पायदान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक़ साउथ एशिया में भारत के पड़ोसी देशों ने कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है जिसमे म्यांमार को 78वीं और पाकिस्तान को 88वीं रैंकिंग मिली थी ।

जीएचआइ की नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 14 फीसदी आबादी कुपोषण का शिकार है। वहीं भारत के बच्चों में स्टंटिंग रेट 37.4 फीसदी है। स्टंटेड बच्चे वो कहलाते हैं जिनकी लंबाई उनकी उम्र की तुलना में कम होती है और जिनमें भयानक कुपोषण दिखता है।

ध्यान रहे, अगर बच्चे पर्याप्त पोषण नहीं पाते हैं तो वे स्कूल में भी बेहतर नहीं कर पाते। साथ ही, आगे चलकर उन्हें उच्च-कुशल, अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियों में सेलेक्ट होने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे बच्चे देश के विकास में योगदान करने से वंचित रह जाते है। इसके अलावा, इस बात के भी प्रमाण हैं कि पोषण संबंधी कमियाँ, विशेष रूप से स्टंटिंग, जेनेटिक्स पर प्रभाव छोड़ सकती हैं। इस प्रकार, कुपोषण का असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है।

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