स्मॉग टॉवर की वर्तमान क्षमता, दिल्ली सरकार के 80 फीसदी के दावे के मुक़ाबले आधा !

by GoNews Desk Edited by M. Nuruddin 2 years ago Views 1887

जानकार बताते हैं कि टॉवर की प्रभाविक क्षमता पंखे में प्रदूषण के कणों के जमा हो जाने से कम हो सकती है...

The current efficiency of the Smog Tower is half o
दिल्ली सरकर ने इसी साल अगस्त महीने में प्रदूषण कम करने के लिए कनॉट प्लेस में एक स्मॉग टॉवर स्थापित किया था। दावे किए गए कि यह स्मॉग टॉवर 80 फीसदी प्रदूषित हवा को साफ कर सकता है। हालांकि इस टॉवर की एफिशियेंसी पर सवाल भी उठे जो सच साबित होता नज़र आ रहा है। मसलन प्रदूषण के स्तर की रीडिंग के मुताबिक़ इससे हवा की होने वाली सफाई आधे से भी ज़्यादा 34 से 43 फीसदी कम हो गई है।

कनॉट प्लेस में इस स्मॉग टॉवर को स्थापित करने में 20 करोड़ रूपये से ज़्यादा की लागत आई है जिसे दिल्ली सरकार पायलट प्रोजेक्ट बता रही है। इसका उद्धाटन 23 अगस्त को ख़ुद सीएम अरविंद केजरीवाल ने किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा था कि अगर इसके बेहतर परिणाम आते हैं तो राजधानी के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के टॉवर लगाए जाएंगे।


अरविंद केजरीवाल ने यह दावा किया था कि उनकी पहली ऐसी सरकार है जिसने स्मॉग टॉवर स्थापित किया है जो झूठा साबित हुआ। इसके बाद अक्टूबर महीने में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने स्मॉग टॉवर की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी और गोपाल राय ने तब दावा किया था स्मॉग टॉवर से प्रदूषित हवा 80 फीसदी तक साफ हो सकती है।

स्मॉग टॉवर का प्रभाव !

हालांकि द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़ 1 दिसंबर को उस टॉवर की रीडिंग - सुबह 10 बजे इनलेट पीएम 2.5 का स्तर 460.03 (Micrograms per Cubic Meter - ug/m3) दर्ज किया गया था। जबकि आउटलेट 299 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर रहा जो कि करीब 35 फीसदी कम है। ज़ाहिर है टॉवर से दूर स्थिल इलाकों में प्रदूषण के स्तर में कमी और भी कम होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक़ 30 नवंबर को सुबह 9 बजे, टावर के इनलेट पर PM2.5 का स्तर 314.62 ug/m3 था और टावर के आउटलेट पर 179.1 ug/m3 था, जो 43.07 की कमी है जो 30 नवंबर से 1 दिसंबर के बीच प्रदूषण के स्तर में यह सबसे ज़्यादा कमी है।

IIT बॉम्बे ने इस स्मॉग टॉवर की प्रभाविक क्षमता को लेकर दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी को अपनी एक रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस स्मॉग टॉवर की प्रभाविक क्षमता 50-60 फीसदी है, जो दिल्ली सरकार के दावे से बेहद कम है।

काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वॉटर ने अपने एक अध्ययन में बताया कि सिर्फ टॉवर के बाउंड्री वॉल से बाहर जाने पर ही इसका प्रभाव कम हो जाता है।

अध्ययन में बताया गया कि टॉवर से दूर जाने पर प्रदूषण के स्तर में कोई कमी नहीं देखी गई जो 20 करोड़ की लागत के स्मॉग टॉवर को लेकर दिल्ली सरकार के दावों पर सवाल खड़े करता है। अध्ययन से पता चलता है कि इसका फायदा सिर्फ उन लोगों को ही होता है जो इस स्मॉग टॉवर के आसपास रहते हैं।

क्या है स्मॉग टॉवर ?

स्मॉग टॉवर एक 24 मीटर ऊंची ढांचा है जिसमें पंखे और एयर फिल्टर लगे होते हैं जो ऊपर से प्रदूषित हवा को खींचते हैं और उसमें लगे पंखे के माध्यम से ज़मीन के पास शुद्ध हवा छोड़ते हैं। किनारों पर टॉवर में 40 बड़े पंखे और हवा को साफ करने के लिए 5,000 फिल्टर लगे हैं।

जानकार बताते हैं कि टॉवर की प्रभाविक क्षमता पंखे में प्रदूषण के कणों के जमा हो जाने से कम हो सकती है, जिसकी समय-समय पर सफाई की ज़रूरत भी होती है।

दिल्ली में और भी स्मॉग टॉवर !

जनवरी 2020 में भारतीय जनता पार्टी के सांसद गौतम गंभीर द्वारा लाजपत नगर बाज़ार में दिल्ली में पहला स्मॉग टॉवर स्थापित किया गया था। इसके बाद गौतम गंभीर द्वारा दो अन्य गांधी नगर और कृष्णा नगर बाज़ारों में स्थापित किए गए थे।

दिल्ली के आनंद विहार में भी एक स्मॉग टॉवर स्थापित है जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केन्द्र सरकार ने लगवाया था जिसका उद्घाटन सितंबर महीने में किया गया था। हालांकि टॉवर प्रदूषित हवा को साफ करने में कितनी कारगर है इसको लेकर केन्द्र की तरफ से कोई रिपोर्ट जारी नहीं की गई है और ना ही इसका कोई अध्ययन हुआ है।

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